गिरावट के कई कारण हैं जिम्मेदार ……………..

बीते हफ्ते भारतीय मुद्रा रुपया 19 पैसा टूटकर पहली बार डॉलर के मुकाबले 90.15 के स्तर पर आ गया था, जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है। इस गिरावट के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता, व्यापार घाटा, डॉलर की बढ़ती मांग, अनिश्चितता […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 8 दिसंबर 2025, 03:26 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
गिरावट के कई कारण हैं जिम्मेदार ……………..
Photo: UB India News Archive

बीते हफ्ते भारतीय मुद्रा रुपया 19 पैसा टूटकर पहली बार डॉलर के मुकाबले  90.15 के स्तर पर आ गया था, जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर है। इस गिरावट के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता, व्यापार घाटा, डॉलर की बढ़ती मांग, अनिश्चितता और शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा निकासी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हठधर्मिता की वजह से अमेरिका के साथ भारत का व्यापार समझौता नहीं हो पा रहा है। ट्रंप ने भारत के ऊपर 25 फीसदी टैरिफ के साथ रूसी कच्चा तेल खरीदने की वजह से 25 फीसदी अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगा दिया है, जिससे हमारे निर्यात को काफी झटका लग रहा है, खासकर श्रम आधारित निर्यात को। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के साथ ही हमारा व्यापार अधिशेष सबसे ज्यादा होता था, जिसमें गिरावट आने से व्यापार अधिशेष कम हो रहा है, जिसका असर चालू खाते के संतुलन पर पड़ रहा है। नतीजतन हमारी मुद्रा कमजोर पड़ रही है।

दूसरी बात, अमेरिका में शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन हमारे यहां शेयर बाजार की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है। इसलिए विदेशी निवेशक लगातार हमारे शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, उससे भी डॉलर की मांग बढ़ रही है। तीसरी बात यह है कि पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल है, इसलिए सोने की मांग बढ़ गई है। इसकी वजह से डॉलर की साख भी कम हो रही है। सोने की मांग बढ़ने से उसकी कीमत आसमान छू रही है।

इसके अलावा, जबसे अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाया है, तबसे पूरी दुनिया में यह डर समा गया है कि कहीं हमारे ऊपर भी अमेरिका प्रतिबंध न लगा दे और हमारी मुद्रा का मूल्य गिर न जाए। इसलिए रिजर्व बैंक सहित दुनिया के विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक ज्यादा सोना खरीद रहे हैं और अपने भंडार में डॉलर कम रख रहे हैं। इससे भी सोने की कीमतों को पंख लग गए हैं। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि हमारे यहां सोने का आयात महंगा हो गया है, जिससे हमारा भुगतान संतुलन गड़बड़ा रहा है और हमारी मुद्रा कमजोर पड़ रही है।

अब जबकि रुपया गिरावट की ओर अग्रसर है, तो रिजर्व बैंक चाहता है कि रुपया एकदम धड़ाम से न गिरे, धीरे-धीरे गिरे, क्योंकि एकदम धड़ाम से अगर रुपया गिर जाएगा, तो विदेशी निवेशक और ज्यादा डॉलर की तरफ जाएंगे और उससे रुपया और ज्यादा गिरेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय मुद्रा रुपया की गिरावट पर नियंत्रण रखने के लिए दखल देते हुए डॉलर को बेचा। सितंबर 2025 से रुपये के मूल्य को स्थिर करने के लिए 26 अरब से ज्यादा डॉलर बेचे गए हैं।

लेकिन लगातार बाहरी दबावों के चलते रुपये का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया।  बड़े वित्तीय बाजार में यह दबाव स्पष्ट दिखा, जिसमें भारतीय शेयरों में गिरावट आई और टैरिफ को लेकर चल रही अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों की भावना प्रभावित हुई। रुपये की कमजोरी का असर महंगाई और आयात लागत पर भी पड़ता है, हालांकि यह एक ऐसी समस्या है, जो लगभग एक साल से बनी हुई है, जब मुद्रा डॉलर के मुकाबले 87 के स्तर को पार कर गई थी। गिरते रुपये का असर भारत के कच्चे तेल के आयात और दूसरी जरूरी चीजों पर भी पड़ता है। इसके साथ ही, इससे डॉलर का प्रवाह देश में कम हो जाता है और बहिर्वाह बढ़ जाता है। इससे अनिश्चितता बढ़ती जाती है तथा रुपया और भी ज्यादा कमजोर होता है एवं डॉलर मजबूत होता है। उच्च आयात मूल्य से व्यापार घाटा भी बढ़ता है, जिससे मुद्रा पर दबाव बढ़ जाता है। यही नहीं, इस सबका असर हमारे व्यवसाय पर भी पड़ता है, क्योंकि अनिश्चितता के कारण निवेश कम हो जाता है, और अंततः उसका असर हमारी विकास दर पर भी पड़ सकता है।

रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव से विदेशी निवेश पर भी काफी असर पड़ सकता है। वैसे भी 2025 में भारत में विदेशी संस्थागत निवेश नकारात्मक हो गया, जिससे बड़े पैमाने पर निकासी हुई। अगर रुपया इसी तरह कमजोर होता रहेगा, तो विदेशी निवेशक और ज्यादा निकासी करेंगे, जिससे शेयर बाजार में भी गिरावट आ सकती है, हालांकि अभी शेयर बाजार में तेजी बनी हुई है।

निर्यातकों को कमजोर रुपये से थोड़ा फायदा हो सकता है, क्योंकि उनका सामान विदेशों में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएगा, लेकिन आयातित कच्चे माल की बढ़ती लागत शायद उनके फायदे को कम कर देगी। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि रुपया कमजोर होने से आयात कम हो जाएगा और निर्यात बढ़ेगा। हो सकता है कि भारतीय रिजर्व बैंक भी चाह रहा हो कि हमारी मुद्रा में थोड़ी गिरावट आए, ताकि टैरिफ से परेशान निर्यातकों को थोड़ी राहत मिले। लेकिन मेरा मानना है कि अमेरिका ने हम पर कुल पचास फीसदी टैरिफ लगाया है, लेकिन इस वर्ष रुपये में गिरावट मात्र पांच फीसदी हुई है, इससे निर्यातकों को हुए नुकसान की भरपाई तो नहीं हो पाएगी, हां थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।

रुपये के मूल्य में आई गिरावट को पूरी तरह रोकना रिजर्व बैंक के हाथ में नहीं है। वह सिर्फ इतना कर सकता है कि रुपये की गिरावट को थोड़ा नियंत्रण कर सकता है। इसके लिए वह डॉलर को बेचता रहता है। जहां तक सरकार की बात है, तो वह इसमें फंस गई है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप जो चाहते हैं, वह हमारी सरकार कर नहीं पा रही है। ट्रंप चाहते हैं कि भारत का कृषि बाजार अमेरिकी वस्तुओं के लिए खुल जाए और हम रूस से तेल खरीदना बंद करें और उसके साथ व्यापार घटाएं। लेकिन हम यह नहीं कर सकते हैं। न हम अपने किसानों, मछुआरों आदि के हितों से समझौता कर सकते हैं और न ही अपने सामरिक साझेदार एवं परखे हुए मित्र रूस को नाराज कर सकते हैं। इसलिए सरकार के हाथ में भी फिलहाल बहुत कुछ है नहीं।

हालांकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर प्रगति के संकेत हैं और कहा जा रहा है कि इस महीने के अंत तक व्यापार समझौता हो सकता है। इसके अलावा, सबकी नजरें सरकार और रिजर्व बैंक पर टिकी हुई हैं। अगर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हो जाता है, तो उससे कुछ बाहरी दबाव कम हो सकते हैं और रुपये में मजबूती आ सकती है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
22000 करोड़ के कर्ज पर बवाल…
कारोबार

22000 करोड़ के कर्ज पर बवाल…

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने NCLT विवाद में मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 22000 करोड़ रुपये के कर्ज संबंधी दावे को गलत बताया। रिलायंस ने आरोपों का खंडन किया है।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰
क्या आम जनता के लिए बंद होगा फ्री UPI?
खास खबर

क्या आम जनता के लिए बंद होगा फ्री UPI?

संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली कानून से जुड़े संशोधन के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब यूपीआइ से पैसे भेजने या दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने पर शुल्क देना होगा। इंटरनेट मीडिया पर तरह-तरह के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार […]

UB India News27 अग॰
भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य…………..
खास खबर

भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य…………..

रूस में आईआरआईजीसी-टेक के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए व‍िदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा क‍ि भारत-रूस व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टेक) के 27वें सत्र में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है. इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने […]

UB India News25 अग॰
सरकार चलाएगी कांदा एक्‍सप्रेस !……………..
खास खबर

सरकार चलाएगी कांदा एक्‍सप्रेस !……………..

दिल्‍ली, लखनऊ, पटना समेत देश के अलग-अलग शहरों में प्‍याज की कीमतें अचानक बढ़ने लगी है. कई बड़े शहरों में महीने भर पहले 30 से 40 रुपये किलो मिलने वाला प्‍याज 50 से 65 रुपये किलो तक बिक रहा है. प्‍याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने अपना बफर स्‍टॉक बाजार […]

UB India News24 अग॰
इथेनॉल पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा बिहार?
पटना

इथेनॉल पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा बिहार?

बिहार में उद्योग विभाग संभाल रहीं, मंत्री श्रेयसी सिंह आत्मविश्वास से भरपुर हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस वर्ष के नवंबर तक बिहार में पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का जो लक्ष्य रखा है, उसे वे जरूर पूरा करेंगी। इसमें इथेनॉल की क्या भूमिका होगी। इथेनॉल पर बिहार ने इतना […]

UB India News24 अग॰
भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?
खास खबर

भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?

कुछ साल पहले तक ड्रोन का नाम आते ही कैमरे से तस्वीरें लेने वाली उड़ती मशीन का ख्याल आता था। अब ड्रोन का इस्तेमाल इससे कहीं आगे निकल चुका है। खेती में कीटनाशक का छिड़काव, गांवों में जमीन की मैपिंग, हाईवे और रेलवे की निगरानी, आपदा के समय राहत-बचाव और रक्षा क्षेत्र में निगरानी जैसे […]

UB India News19 अग॰