पूरा देश न्यू ईयर का जश्न मनाने (New Year Celebration) के लिए तैयार है. आज 2024 का आखिरी दिन है. नए साल में सिर्फ एक दिन बाकी बचा है. सभी लोग नए साल का वेलकम (Happy New Year 2025) करने के लिए बेताब हैं. आज यानी कि 31 दिसंबर की शाम से ही लोग घरों से बाहर निकलने लगेंगे. इस दौरान होटल, पब और रेस्टोरेंट पूरी तरह से फुल रहेंगे. नए साल के जश्न को लेकर हर किसी की अपनी प्लानिंग है और लोग बहुत ही उत्साहित हैं. पब और रेस्टोरेंट भी लोगों के स्वागत के लिए पूरी तरह सजकर तैयार हैं. लेकिन घर से निकलने से पहले एक बार ट्रैफिक एडवाइजरी (Delhi Traffic Advisory) जरूर देख लें. बसों, मेट्रो से जुड़ी एडवायजरी देखना नहीं भूलें, ताकि नए साल के जश्न में कोई बाधा न आए.
गुजरात में न्यू ईयर से पहले हुए विंटर ब्रेक के चलते साल 2024 को अलविदा कहने और 2025 के वेलकम के लिए बड़ी संख्या में लोग टूरिस्ट प्लेस पर पहुंच रहे हैं। कच्छ रण उत्सव में पर्यटकों की भारी भीड़ से सोमवार मेले जैसा नजारा हो गया। कच्छ में सफेद रण की खूबसूरत देखने के लिए अलग-अलग शहरों में रहने वाले दो बहनें वहां पहुंचीं। पंजाब से पहुंची अनुराधा शर्मा ने नमक के समुद्र को अपना कौतूहल व्यक्त किया। कच्छ के धाेरडो गांव को पिछले साल यूनेस्को ने बेस्ट टूरिज्म विलेज में शामिल किया था। यहां बनने वाली टेंट सिटी टूरिस्ट को काफी लुभाती है। टेंट सिटी के प्रबंधक अमित गुप्ता ने कहा कि न्यू ईयर के लिए बैंड की व्यवस्था की गई है।
बनारस का फक्कड़ अंदाज
काशी अपने बेफिक्र और उत्साही स्वभाव के लिए दुनियाभर में मशहूर है। यही अंदाज नववर्ष के जश्न को और भी खास बनाता है। सितारा होटलों, रिसॉर्ट्स, गेस्ट हाउसों, मॉल्स और क्लबों से लेकर दशाश्वमेध घाट, नमो घाट, सारनाथ और रविदास पार्क जैसे स्थानों पर जोरदार जश्न की तैयारी है। हालांकि, डीजे पर लगी रोक के कारण शोर-शराबा कम होगा, लेकिन जश्न का उत्साह कहीं भी फीका नहीं पड़ेगा।
बनारसी अपनी मस्ती और दिल खोलकर खर्च करने के लिए प्रसिद्ध हैं। नववर्ष के स्वागत में इस उत्साह को महसूस किया जा सकता है। चाहे परिवार के साथ पिकनिक हो या दोस्तों के साथ पार्टी, बनारस के लोग हर पल को जीने में यकीन रखते हैं। रमणीय और तीर्थ स्थलों पर भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना है, और यह जश्न बनारसी अंदाज को और भी खास बना देगा।
न्यू ईयर जश्न से पहले दिल्ली पुलिस सख्त
न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए लोगों के साथ ही पुलिस ने भी पूरी तरह से कमर कस ली है. कानून-व्यवस्था में कोई खलल न पड़े, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. साथ ही कई तरह की पाबंदियां भी लागू की गई हैं. दिल्ली पुलिस के साथ ही ट्रैफिक पुलिस भी पूरी तरह से तैयार है. किसी भी तरह का हू-हल्ला, हुड़दंग आपको भारी पड़ सकता है. वाहनों की आवाजाही सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस 2500 पुलिसकर्मियों की तैनाती करने जा रही है. वहीं शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर नजर रखने के लिए भी 250 टीमें बनाई गई हैं. कनॉट प्लेस और इंडिया गेट जाने वाले लोगों को खास तौर पर सावधान रहने की जरूरत है.
पटनावासी पूरे जश्न और धमाल के साथ स्वागत करने के लिए तैयार….
नया साल 2025 का पटनावासी पूरे जश्न और धमाल के साथ स्वागत करने के लिए तैयार हैं. पटना के होटल से लेकर कैफे और पार्टी जोन में नया साल सेलिब्रेशन की व्यवस्था की गयी है. लोग म्यूजिक के फ्यूजन और लाजवाब डिसेज के साथ नए साल का जश्न मनाने के लिए तैयार हैं. आज 31 दिसंबर की रात को धूमधाम से साल 2024 को विदा करने और नए साल 2025 का स्वागत करने के लिए पटना में अलग-अलग तैयारी की गई है. लोगों को शानदार अनुभव देने के लिए जगह-जगह रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
‘कसीनो नाइट’ में मस्ती: 31 दिसंबर की शाम को गार्गी ग्रैंड होटल, एग्जीविशन रोड में न्यू ईयर इव सेलिब्रेशन का आयोजन किया जा रहा है. यहां कसीनो नाइट की शानदार शाम होगी. बॉलीवुड एक्ट्रेस लेखा प्रजापति मुख्य आकर्षण होंगी. वेस्टर्न फ्यूजन डांस, बेली डांस, मुजरा और आल स्टार्स डांस ट्रूप्स भी दर्शकों को अपनी प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध करेंगे. कसीनो नाइट में नेल पेंट्स, टैटू आर्टिस्ट, किड्स प्ले जोन, पल्मिस्ट, सेल्फी जोन, डीजे, लाइव सिंगिंग, गिटार और सेकसाफोन जैसी शानदार गतिविधियां भी होंगी. स्वादिष्ट अनलिमिटेड फ़ूड और स्नैक्स के साथ मस्ती और धमाल का यह अवसर बेहद खास है. एंट्री पास की कीमत कपल एंट्री ₹4999, स्टेज एंट्री ₹2999 और किड्स एंट्री ₹1999 है.
सूफी नाइट में मुर्शिद बैंड की प्रस्तुति: होटल पनाश में सूफी नाइट का आयोजन होने जा रहा है. होटल के आठवें तले पर मौजूद हाल में सूफी नाइट का आयोजन होगा. वर्ल्डवाइड प्रस्तुति दे चुके मुर्शीद बैंड की प्रस्तुति होगी. मुर्शीद बैंड यहां पहली बार प्रस्तुति देगी. इसके अलावा डीजे सागर डीजे की धुन पर पटना वासियों को नचायेंगे. खाने की कई डिश मौजूद होंगी. सिंगल के लिए 3999 रुपये, कपल के लिए 6999 रुपये, 5-12 साल के बच्चों के लिए 2499 रुपये एंट्री फीस है. पांच साल से कम उम्र के बच्चे नि:शुल्क आ सकते हैं.
कोलकाता और बेंगलुरु के बैंड की प्रस्तुति: होटल मौर्या में भी नये साल के स्वागत को लिए खास तैयारी की गई है. 31 दिसंबर की शाम लोगों के लिए खास बनाने के लिए कोलकाता और बेंगलुरू के कलाकार गायिकी और नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी को झूमने पर मजबूर करेंगे. फेमस सिंगर कोमल सिंह, जोजो सिंह और मुंबई से डांस ग्रुप को बुलाया गया है.
टिकट प्राइज क्या है: कई सरप्राइज खेल और विजेताओं के लिए कई खास चीजें होंगे. 90 से ज्यादा प्रकार की खाने की वैराइटी होगी. एंट्री फीस कपल के लिए ₹9000, सिंगल के लिए ₹5500, 4 साल से 12 साल के बच्चे के लिए ₹4500 और 4 साल से नीचे के बच्चे के लिए एंट्री फ्री है.
सिंगर अनीता भट्ट बिखेरेंगी जादू: पटना के गोला रोड स्थित होटल एवीआर में नए साल के स्वागत के लिए 31 दिसंबर की रात द स्प्रिंग्स का आयोजन हो रहा है. यहां बॉलीवुड सिंगर अनीता भट्ट अपने सुर से दर्शकों का मनोरंजन करेंगी. डांस इंडिया डांस-3 की विनर रहीं राज स्मिता भी मौजूद होंगी. इसके अलावा मुंबई से कई डांस ग्रुप के कलाकार भी होंगे. डीजे, लाइव सिंगिंग, डांस प्रस्तुति, सेल्फी जोन, अनलिमिटेड मॉकटेल, लाइव काउंटर, गाला डिनर और सरप्राइज गेम और अवार्ड होंगे. यहां खाने में 100 से भी अधिक व्यंजन रहेंगे. कपल के लिए एंट्री फीस ₹3,299 और सिंगल के लिए ₹1,699 है.
एंकर जेनी का जलवा: पटना के पीएनएम मॉल में स्थित होटल क्लार्क में भी 31 दिसंबर की रात के लिए खास व्यवस्था है. प्रोग्राम में एंकरिंग के लिए गोवा से फेमस एंकर जेनी को बुलाया गया है. इसके अलावा कोलकाता और मुंबई से सिंगर और डांसर के ग्रुप भी आ रहे हैं. म्यूजिक और डांस के साथ-साथ कई सरप्राइज गेम और प्रोग्राम है. 31 दिसंबर की नाइट को शानदार बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई है. एंट्री के लिए एंट्री फीस प्रति कपल ₹3000, एकल व्यक्ति के लिए ₹1499 और बच्चों के लिए ₹999 है.
दुनियाभर में नए साल का जश्न शुरू
31 दिसंबर को जैसे ही रात के 12 बजेंगे, दुनियाभर में नए साल का जश्न शुरू हो जाएगा। पर क्या आप जानते हैं, न्यूजीलैंड में भारत से साढ़े 7 घंटे पहले ही नया साल आएगा जबकि अमेरिका में साढ़े 9 घंटे बाद। इस तरह पूरी दुनिया में नया साल आने की जर्नी 19 घंटों तक जारी रहेगी।
दुनिया में सिर्फ नया साल मनाने का समय ही नहीं बल्कि रिवाज भी अलग-अलग हैं। जापान में नए साल के स्वागत पर लोग मिलकर 108 बार घंटा बजाते हैं, जबकि चीन 29 जनवरी को जश्न मनाएगा।
नए साल पर जानिए अलग-अलग देशों में अलग-अलग टाइम की साइंस और न्यू ईयर मनाने के 6 अजीबो-गरीब रिवाज…
अंग्रेजों ने किया था दुनिया के समय का बंटवारा पृथ्वी के सूरज का एक चक्कर पूरा करने से साल बदलता है। वहीं, अपनी धुरी पर पूरा चक्कर लगाने पर दिन और रातें होती हैं। पृथ्वी के अपनी धुरी पर लगातार घूमते रहने की वजह से कहीं सुबह, कहीं दोपहर तो कहीं पर रात होती है। यही वजह है कि दुनिया के लगभग हर देश को अलग-अलग टाइम जोन में बांट दिया गया है।
टाइम जोन की जरूरत क्यों पड़ी? घड़ी का आविष्कार 16वीं सदी में हुआ, लेकिन 18वीं सदी तक इसे सूरज की पोजिशन के मुताबिक सेट किया जाता था। जब सूरज सिर पर होता था, तभी घड़ी में 12 बजा दिए जाते थे।
शुरुआत में अलग-अलग देशों के अलग-अलग समय से कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन बाद में रेल से लोग कुछ ही घंटे में एक देश से दूसरे देश पहुंचने लगे। देशों के अलग-अलग टाइम से लोगों को ट्रेन के समय का हिसाब रखने में दिक्कतें आईं। जैसे कोई शख्स अगर सुबह 8 बजे स्टेशन से निकलता, तो 5 घंटे बाद, जिस देश पहुंचता वहां कुछ और समय होता।
ऐसे में कनाडाई रेलवे के इंजीनियर सर सैनफोर्ड फ्लेमिंग ने इस समस्या का सबसे पहले हल निकाला। दरअसल 1876 में अलग टाइम की वजह से उनकी ट्रेन छूट गई थी। इस वजह से उन्हें दुनिया के अलग-अलग इलाके में अलग-अलग टाइम जोन बनाने का आइडिया आया।
उन्होंने दुनिया को 24 टाइम जोन में बांटने की बात कही। धरती हर 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है। यानी हर घंटे में 15 डिग्री, जिसे एक टाइमजोन की दूरी माना गया। इससे पूरी दुनिया में 24 समान दूरी वाले टाइम बने। एक डिग्री की वैल्यू 4 मिनट है। यानी आपका देश अगर GMT से 60 डिग्री की दूरी पर है तो 60X4= 240 मिनट यानी टाइमजोन में 4 घंटे का अंतर होगा।
हालांकि टाइमजोन बनाने के बाद भी यह दिक्कत थी कि 24 टाइमजोन को बांटते समय दुनिया का सेंटर किसे माना जाए। इसी को तय करने के लिए 1884 में इंटरनेशनल प्राइम मेरिडियन सम्मेलन बुलाया गया। इसमें इंग्लैंड के ग्रीनविच को प्राइम मेरिडियन चुना गया। इसे मैप में 0 डिग्री पर रखा गया।
ब्रिटेन से साढ़े 5 घंटे आगे भारत का समय फिलहाल पूरी दुनिया का टाइमजोन GMT यानी ग्रीनविच मीन टाइम से ही मैच किया जाता है। जो देश ग्रीनविच से पूर्व दिशा में हैं, वहां का टाइम ब्रिटेन से आगे और पश्चिम होने पर पीछे हो जाता है। जैसे भारत का टाइम ब्रिटेन के टाइम से साढ़े पांच घंटे आगे चलता है वहीं, अमेरिका, ब्रिटेन के पश्चिम में होने के कारण ब्रिटेन के टाइम से 5 घंटे पीछे है।
ब्रिटेन से सबसे ज्यादा पूर्व में ओशिनिया महाद्वीप के देश हैं। इसमें न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और किरिबाती शामिल हैं। इसलिए नया साल सबसे पहले इन्हीं देशों में मनाया जाएगा। शुरूआत न्यूजीलैंड से होगी। क्योंकि ये सबसे ज्यादा पूर्व में है।
जहां सबसे पहले 12 बजेंगे और नए साल का स्वागत होगा। जब न्यूजीलैंड में नया साल शुरू होगा, तब भारत में 31 दिसंबर को शाम के 4.30 बजे होंगे। यानी भारत में न्यूजीलैंड से साढ़े 7 घंटे बाद नए साल की एंट्री होगी। जबकि अमेरिका तक नया साल आने में 19 घंटे लगेंगे। वहां भारतीय समयानुसार 1 जनवरी को सुबह साढ़े 10 बजे 31 दिसंबर के 12 बजेंगे।
ग्रीनविच को ही GMT क्यों चुना गया? ग्रीनविच में काफी लंबे समय से खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया जाता था। इसलिए ब्रिटेन ने इस जगह को ही टाइमजोन का केंद्र बनाया। तब ब्रिटेन दुनिया का सबसे ताकतवर देश हुआ करता था। व्यापार में भी काफी आगे था और दुनिया के ज्यादातर इलाके पर इसका कब्जा था। समुद्री व्यापार में शामिल ज्यादातर जहाज ब्रिटेन के समय का ही इस्तेमाल करते थे।
दुनिया के साथ नया साल क्यों नहीं मनाता चीन?
चीन दुनिया के उन देशों में से एक है, जहां 1 जनवरी को नए साल का जश्न नहीं मनाया जाता। दरअसल, चीन उन देशों में से है जो सोलर कैलेंडर के बदले लूनीसोलर कैलेंडर के हिसाब से चलता है।
लूनीसोलर कैलैंडर में 12 महीने होते हैं और हर महीने में चांद द्वारा पृथ्वी का एक चक्कर होने पर महीना पूरा माना जाता है। चांद, पृथ्वी का एक चक्कर 29 दिन और कुछ घंटों में पूरा करता है।
चीन में 12वें महीने के 30वें दिन नए साल का जश्न मनाया जाता है। इसे चीन में दानियन संशी कहा जाता है। इस साल चीन में 29 जनवरी को नया साल मनाया जाएगा। इस दौरान लोग एक-दूसरे को लाल रंग के कार्ड देते हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान पूर्वजों की पूजा और परिवार के साथ डिनर, ड्रैगन और लॉयन डांस का आयोजन भी किया जाता है।
इस फेस्टिवल को चीन ही नहीं, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया और मंगोलिया जैसे बड़े देश भी अलग-अलग परंपराओं के साथ सेलिब्रेट करते हैं।
दुनिया भर में नया साल मनाने के अजीबोगरीब तरीके…
31 दिसंबर को घड़ी में रात के 12 बजते ही, पूरी दुनिया नए साल का स्वागत करती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 1 जनवरी को ही साल की शुरुआत क्यों होती है? इसकी वजह रोम साम्राज्य के तानाशाह जूलियस सीजर को माना जाता है।
सीजर ने भ्रष्टाचारी नेताओं को सबक सिखाने के लिए 2066 साल पहले कैलेंडर में बदलाव किए थे। इसके बाद से पूरी दुनिया ने 1 जनवरी को नया साल मनाना शुरू कर दिया।
आखिर ऐसा क्या हुआ था कि सीजर को कैलेंडर बदलना पड़ा, सबसे पहले नया साल कब मना…
आखिर 1 जनवरी को ही नया साल क्यों मनाया जाता है? 2637 साल पहले यानी 673 ईसा पूर्व की बात है। रोम में नूमा पोंपिलस नाम का राजा हुआ करता था। उसने रोमन कैलेंडर में बदलाव करते हुए मार्च की जगह जनवरी से नया साल मनाने का फैसला किया। इससे पहले रोम में नए साल की शुरुआत 25 मार्च से होती थी।
नूमा पोंपिलस का तर्क था कि जनवरी महीने का नाम रोम में नई शुरुआत करने के देवता जानूस के नाम पर पड़ा है। वहीं, मार्च महीने का नाम रोम में युद्धों के देवता मार्स के नाम पर रखा गया है। इसीलिए नए साल की शुरुआत भी मार्च के बजाय जनवरी में होनी चाहिए।
नूमा पोंपिलस के जारी कैलेंडर में एक साल में 310 दिन और सिर्फ 10 महीने होते थे। उस समय एक सप्ताह में 8 दिन थे। हालांकि 2175 साल पहले यानी 153 ईसा पूर्व तक जनवरी में नया साल मनाया जरूर जाता था, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।
नूमा पोंपिलस के 607 साल बाद रोम में राजशाही को उखाड़ कर फेंक दिया गया। साम्राज्य का सारा दारोमदार रोमन रिपब्लिक के पास आ गया। कुछ साल सत्ता में रहने के बाद रिपब्लिक के नेता भ्रष्टाचारी होने लगे। रोम साम्राज्य में मची उथल-पुथल का फायदा उठा कर रोमन आर्मी के जनरल जूलियस सीजर ने सारी कमान अपने हाथों में ले ली।
इसके बाद उसने नेताओं को सबक सिखाना शुरू किया। दरअसल, रिपब्लिक के नेता ज्यादा वक्त तक सत्ता में रहने के लिए और चुनावों में धांधली के लिए कैलेंडर में अपनी मर्जी के मुताबिक बदलाव करने लगे थे। वो कैलेंडर में अपनी मर्जी से कभी दिनों को बढ़ा देते तो कभी कम कर देते थे।
इसका समाधान निकालने के लिए जूलियस सीजर ने कैलेंडर ही बदल डाला। 46 ईसा पूर्व में रोम साम्राज्य के तानाशाह जूलियस सीजर ने एक नया कैलेंडर जारी किया।
जूलियस सीजर को खगोलविदों ने बताया कि पृथ्वी को सूर्य के चक्कर लगाने में 365 दिन और 6 घंटे लगते हैं। इसके बाद सीजर ने रोमन कैलेंडर को 310 दिन से बढ़ाकर 365 दिन कर दिया। साथ ही सीजर ने फरवरी के महीने को 29 दिन करने का फैसला किया, जिससे हर 4 साल में बढ़ने वाला एक दिन भी एडजस्ट हो सके। अगले साल यानी 45 ईसा पूर्व से 1 जनवरी के दिन नया साल मनाया जाने लगा।








