दिल्ली शराब नीति पर CAG रिपोर्ट , 2026 करोड़ रु का हुआ नुकसान

दिल्ली चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की टेंशन बढ़ाने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है. जी हां, दिल्ली शराब नीति पर अब कैग की रिपोर्ट आ गई है. दिल्ली सरकार की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति पर कैग यानी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई खामियां पाई गई हैं. रिपोर्ट में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 11 जनवरी 2025, 06:55 AM 5 मिनट read
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दिल्ली शराब नीति पर CAG रिपोर्ट , 2026 करोड़ रु का हुआ नुकसान
Photo: UB India News Archive

दिल्ली चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल की टेंशन बढ़ाने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है. जी हां, दिल्ली शराब नीति पर अब कैग की रिपोर्ट आ गई है. दिल्ली सरकार की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति पर कैग यानी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई खामियां पाई गई हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी खजाने को 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कथित शराब घोटाले का क्या असर हुआ, यह दिखाने के लिए यह आंकड़ा पहली बार पेश किया गया है. यहां बताना जरूरी है कि यह भाजपा का दावा है कि यह कैग रिपोर्ट है.

भाजपा जिसे कैग रिपोर्ट बता रही है, उसमें दावा किया गया है कि कुछ बोलीदाताओं को अरविंद केजरीवाल सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में लाइसेंस तब दिए, जब वे घाटे में चल रहे थे. कैग (सीएजी या CAG) रिपोर्ट में एक्साइज पॉलिसी में ‘खामियां’ बताई गई हैं. रिपोर्ट में एक्साइज पॉलिसी लागू करने में बड़ी चूक का जिक्र है. कैग रिपोर्ट के मुताबिक, इस चूक की वजह से सरकार को करीब 2,026 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. रिपोर्ट में कहा गया है कि आम आदमी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी जबकि ‘आप’ नेताओं को मोटा कमीशन मिला.

रिपोर्ट में क्या-क्या जिक्र
रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि उस समय आबकारी विभाग का नेतृत्व करने वाले मनीष सिसोदिया और उनके मंत्रियों के समूह ने विशेषज्ञ पैनल की सिफारिशों को’ नजरअंदाज’ कर दिया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करने में नियमों का उल्लंघन हुआ है और उल्लंघन करने वालों को ‘जानबूझकर’ दंडित नहीं किया गया.

जानिए रिपोर्ट की मुख्य-मुख्य बातें
CAG रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई अहम फैसले मनमाने ढंग से लिए गए. इसके लिए कैबिनेट या दिल्ली के उपराज्यपाल से मंजूरी नहीं ली गई. चलिए जानते हैं कैग रिपोर्ट की अहम बातें क्या-क्या हैं.

1.भारी नुकसान: नीति में खामियों के कारण सरकार को ₹2,026 करोड़ का नुकसान हुआ.
2.विशेषज्ञों की अनदेखी: शराब नीति बनाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह ली गई थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को मान नहीं गया.
3.बोलियों में गड़बड़ी: जिन कंपनियों की शिकायतें थीं या जो घाटे में चल रही थीं, उन्हें भी लाइसेंस दिए गए.
4.जरूरी मंजूरी नहीं ली गई:
•कैबिनेट और उपराज्यपाल (LG) से कई बड़े फैसलों पर मंजूरी नहीं ली गई.
•नीति के नियमों को विधानसभा में पेश भी नहीं किया गया.
5.पारदर्शिता की कमी:
•शराब की कीमत तय करने और लाइसेंस जारी करने में साफ-सफाई नहीं रखी गई.
•नियम तोड़ने वालों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया.
6.नीति सही से लागू नहीं हुई:
•शराब की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब और टेस्टिंग सुविधाएं नहीं बनाई गईं.
•खुदरा शराब की दुकानों को सभी क्षेत्रों में बराबर तरीके से नहीं बांटा गया.
7.गलत माफियां और छूट:
•कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी.
•सरकार ने जो लाइसेंस वापस लिए, उन्हें फिर से टेंडर नहीं किया, जिससे ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ.
•ज़ोनल लाइसेंसधारकों को छूट देने से ₹941 करोड़ का और नुकसान हुआ.
•सुरक्षा जमा राशि ठीक से वसूलने में ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ.
राजस्व नुकसान का आसान विश्लेषण
•₹890 करोड़: वापस लिए गए लाइसेंसों को फिर से टेंडर नहीं करने से.
•₹941 करोड़: ज़ोनल लाइसेंसधारकों को दी गई छूट से.
•₹144 करोड़: कोविड-19 के नाम पर दी गई गलत माफी से.
•₹27 करोड़: सुरक्षा जमा राशि सही से वसूलने में गड़बड़ी से.
दिल्ली शराब नीति की मुख्य खामियां
1.नीति सही से लागू नहीं हुई:
•सरकार ने नीति को ठीक से लागू नहीं किया, जिससे भारी नुकसान हुआ.
2.बोलियां सही से जांची नहीं गईं:
•जिन कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब थी, उन्हें भी लाइसेंस दिए गए.
3.अनुचित समझौते:
•लाइसेंसधारकों और थोक विक्रेताओं के बीच गलत तरीके से समझौते किए गए.
4.गुणवत्ता जांच नहीं हुई:
•शराब की गुणवत्ता जांचने के लिए लैब और टेस्टिंग सुविधाएं नहीं बनाईं.
5.दुकानों का गलत वितरण:
•शराब की दुकानें हर जगह समान रूप से नहीं बांटी गईं.
रिपोर्ट में और क्या
रिपोर्ट में कहा गया है कि केजरीवाल सरकार ने कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण 144 करोड़ रुपये के लाइसेंस शुल्क माफ कर दिए. इससे राजस्व का और नुकसान हुआ. जबकि टेंडर एग्रीमेंट में साफ तौर पर कहा गया था कि अप्रत्याशित घटना के लिए कोई प्रावधान नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट गलत तरीके से जमा करने से 27 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
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