UNSC सदस्‍यता की रेस में भारत के लिए फंसा पेच…

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 31 अगस्त 2026, 05:51 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
UNSC सदस्‍यता की रेस में भारत के लिए फंसा पेच…
Photo: UB India News Archive
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दौरा सिर्फ मध्य एशिया के साथ संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की बड़ी कूटनीतिक रणनीति छिपी है। वर्ष 2028-2029 के अस्थायी कार्यकाल के लिए भारत की राह में ताजिकिस्तान एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। दोनों देश एशियाई ब्लॉक की एकमात्र सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। भारत और ताजिकिस्तान दोनों ही देशों ने 2028-2029 के कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रखी है और ताजिकिस्तान को इस्लामिक देशों के संगठन OIC का समर्थन हासिल हो चुका है।

UNSC में पिछले एक-दो वर्षों में हुए चुनावों में जबरदस्त उलटफेर हुआ है और जर्मनी जैसे देशों को भी हार का सामना करना पड़ा है इसलिए भारत बहुत फूंक फूंककर कदम रखने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पीएम मोदी 2009 के सफल फॉर्मूले को दोहराते हुए ताजिकिस्तान को अपनी दावेदारी पीछे हटने के लिए मना पाएंगे?
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि की अस्थायी सदस्यता के चुनाव जून 2027 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में होंगे।

Bishkek [Kyrgyzstan], Aug 30 (ANI)_ Prime Minister Narendra Modi receives a warm
बिश्केक में एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत

UNSC अस्थाई सदस्यता जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?

  • अस्थाई सदस्यता हासिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में मतदान करने वाले देशों का दो-तिहाई बहुमत हासिल करना अनिवार्य है।
  • संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 सदस्य देश हैं। यदि सभी देश मतदान में हिस्सा लेते हैं तो भारत को जीत के लिए कम से कम 129 वोटों की आवश्यकता होगी।
  • ताजिकिस्तान को 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का आधिकारिक समर्थन हासिल हो चुका है जो कि एक बड़ा वोट बैंक है।
  • भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रिया, फिजी और श्रीलंका जैसे देशों से शुरुआती समर्थन की प्रतिबद्धता मिल चुकी है। इसके अलावा गुप्त मतदान की वजह से खाड़ी के कई देशों जैसे यूएई, कुवैत, कतर जैसे देशों का समर्थन भारत को मिल सकता है।
  • इसके अलावा अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों में ताजिकिस्तान की राजनयिक पहुंच भारत के मुकाबले काफी सीमित है। यहां भारत को फायदा है फिर भी 129 वोट हासिल करना आसान नहीं है। पिछली बार 2021-22 के टर्म भारत को रिकॉर्ड 184 वोट मिले थे।
इसीलिए मोदी की उज़्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य की चार दिन की यात्रा, मध्य एशिया के दो अहम देशों या शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तक पहुंचने की कोशिश से कहीं ज्यादा है। इस यात्रा के एजेंडे में तीन और मल्टीलेटरल (बहुपक्षीय) मंचों पर बातचीत शामिल होगी। 1- सितंबर में होने वाला ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन, 2- 2028-2029 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दो साल का कार्यकाल, और 3- लंबे समय से लंबित भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की योजना बनाना जो 2022 के बाद से नहीं हुआ है।
जानकारों का कहना है कि इस देरी की वजह से इलाके में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि नई दिल्ली की इस जुड़ाव में दिलचस्पी कम हो गई है खासकर 2015 में मोदी की पहली यात्रा की तुलना में जब उन्होंने मध्य एशिया के सभी पांच देशों का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इस धारणा को बदलना होगी।


ताजिकिस्तान को चुनाव से हटने के लिए मना पाएगा भारत?

भारत के लिए बड़ी चुनौती ताजिकिस्तान है। द हिंदू के मुताबिक भारत का डिप्लोमैटिक प्रभाव काफी ज्यादा होने के बावजूद UN जनरल असेंबली में हाल के वोटों के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं। इस साल UNSC के वोटों में जर्मनी पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया से हार गया और फिलीपींस किर्गिज रिपब्लिक से हार गया। इसके अलावा जनरल असेंबली के प्रेसिडेंट पद के लिए कड़े मुकाबले में बांग्लादेश के खलीलुर रहमान ने साइप्रस के अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा दिया जबकि माना जाता है कि अमेरिका, यूरोपीय देशों और भारत ने साइप्रस का समर्थन किया था।
अगले साल के चुनाव के लिए कोई 'साफ रास्ता' न होने की स्थिति में भारत के लिए सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि वह ताजिकिस्तान को अपनी उम्मीदवारी किसी और साल के लिए टालने के लिए मना ले और मोदी आने वाले समिट के दौरान ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान और मध्य एशियाई देशों के अपने समकक्षों के साथ इस पर चर्चा करें। 2009 में भारत ने कजाकिस्तान को 2011-2012 के कार्यकाल के लिए चुनाव से हटने के लिए मना लिया था और बाद में 2017-2018 के कार्यकाल के लिए कजाकिस्तान का समर्थन किया था। इसीलिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है।
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰