कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले देश भारत के बाजार पर अमेरिका की नजर …………..

अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए कई कृषि उत्पादों पर भी ध्यान दे रहा है. इनमें सबसे अहम हैं सोयाबीन, मक्का और कपास. ये तीनों फसलें अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह इनका दुनिया भर में बड़ा निर्यातक है. साल 2022 में इन तीनों फसलों का कुल निर्यात मूल्य […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 24 मार्च 2025, 05:22 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले देश भारत के बाजार पर अमेरिका की नजर …………..
Photo: UB India News Archive

अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए कई कृषि उत्पादों पर भी ध्यान दे रहा है. इनमें सबसे अहम हैं सोयाबीन, मक्का और कपास. ये तीनों फसलें अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वह इनका दुनिया भर में बड़ा निर्यातक है.

साल 2022 में इन तीनों फसलों का कुल निर्यात मूल्य लगभग 62 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जो दिखाता है कि ये अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए कितने बड़े हैं. अमेरिका चाहता है कि भारत इन उत्पादों को खरीदे ताकि उसका व्यापार और मुनाफा बढ़े. भारत में इन फसलों की मांग बढ़ रही है, और अमेरिका इसे एक सुनहरा मौका मानता है.

दरअसल अमेरिका भारत को एक बहुत बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार मानता है. भारत की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है और लोगों की आय भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. इससे भारत में खाने-पीने की चीजों की मांग बढ़ रही है, खासकर पशु उत्पादों जैसे दूध, अंडे, मछली, और मांस की.

अमेरिका की एक सरकारी रिपोर्ट (USDA) कहती है कि अगले कुछ सालों में भारत में इन चीजों की खपत बहुत बढ़ेगी. जब लोग ज्यादा मांस, दूध या अंडे खाएंगे, तो पशुओं को खिलाने के लिए चारे की जरूरत भी बढ़ेगी. इस चारे में मक्का और सोयाबीन मुख्य रूप से इस्तेमाल होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत को अपने पशुओं के लिए बहुत सारा चारा चाहिए होगा.भारत में अभी मक्का और सोयाबीन का उत्पादन इतना नहीं है कि यह मांग पूरी हो सके. इसलिए उसे बाहर से यानी अमेरिका जैसे देशों से ये फसलें आयात करनी पड़ सकती हैं. इसके अलावा, कपास की बात करें तो भारत पहले इसे बहुत निर्यात करता था, लेकिन अब उसे खुद कपास खरीदना पड़ रहा है. अमेरिका दुनिया का बड़ा कपास निर्यातक है, और वह भारत को अपना कपास बेचकर फायदा उठाना चाहता है. भारत का बढ़ता बाजार अमेरिका के लिए एक बड़ा मौका है.

हालांकि अमेरिका के इन उत्पादों को भारत में लाने में कई मुश्किलें हैं. पहली मुश्किल है भारत का आयात शुल्क (टैक्स). भारत सरकार सोयाबीन पर 45% और मक्का पर 50% शुल्क लगाती है. इसका मतलब है कि ये चीजें भारत में बहुत महंगी हो जाती हैं, और अमेरिका के लिए इन्हें बेचना मुश्किल हो जाता है. दूसरी बड़ी रुकावट है भारत का जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों पर नियम. GM फसलें ऐसी होती हैं जिनमें वैज्ञानिक तरीके से बदलाव किया जाता है ताकि वे कीटों से बची रहें या ज्यादा पैदावार दें. लेकिन भारत में GM मक्का, सोयाबीन, और सोयाबीन मील (चारा) पर पाबंदी है.

अमेरिका में ज्यादातर मक्का और सोयाबीन GM होते हैं, इसलिए भारत इन्हें खरीद नहीं सकता. ये नियम और शुल्क अमेरिकी उत्पादों को भारत में आने से रोकते हैं. अमेरिकी सरकार चाहती है कि भारत इन शुल्क को कम करे और GM फसलों पर पाबंदी हटाए, ताकि उसका व्यापार बढ़ सके. लेकिन भारत के अपने नियम और किसानों की चिंताएं भी हैं, जो इन बदलावों को मुश्किल बनाती हैं.

भारत में मक्का और सोयाबीन का इस्तेमाल ज्यादातर पशु चारे के लिए होता है. जैसे-जैसे भारत में लोग ज्यादा दूध, अंडे, मछली, और मांस खाने लगेंगे, पशुओं की संख्या और उनके चारे की जरूरत भी बढ़ेगी. मक्का और सोयाबीन मील पशुओं के लिए बहुत जरूरी हैं क्योंकि ये उन्हें ताकत और पोषण देते हैं. USDA की रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक भारत में चारे की मांग बहुत बढ़ जाएगी.

अभी भारत में मक्का और सोयाबीन का उत्पादन सीमित है. अगर मांग बढ़ती है, तो भारत को अपने खेतों में ज्यादा पैदावार करनी होगी या बाहर से आयात करना होगा. अमेरिका इसी मौके का फायदा उठाना चाहता है, क्योंकि वह इन फसलों का बड़ा उत्पादक है. भारत की बढ़ती आबादी और बेहतर जीवनशैली इस मांग को और बढ़ा रही है.

बात करें कपास की तो पहले भारत बहुत बड़ा निर्यातक था. लेकिन हाल के सालों में उसकी स्थिति बदल गई है. अब वह कपास खरीदने वाला देश बन गया है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत में GM कपास की मदद से पहले बहुत उत्पादन होने लगा था. लेकिन 2006 के बाद नई GM तकनीक को मंजूरी नहीं मिली. साथ ही, पुरानी GM किस्मों पर कीटों ने हमला करना शुरू कर दिया, जिससे पैदावार कम हो गई.

अब भारत को अपने कपड़ा उद्योग के लिए ज्यादा कपास चाहिए और वह इसे बाहर से खरीद रहा है. अमेरिका के लिए यह एक बड़ा मौका है, क्योंकि वह दुनिया में कपास का बड़ा निर्यातक है. अगर भारत कपास पर 11% आयात शुल्क हटाए, तो अमेरिका और ज्यादा कपास भारत को बेच सकता है.

GM तकनीक ने भारत के कपास उत्पादन को पूरी तरह बदल दिया था. 2000 के दशक में Bt जीन वाली GM कपास आई, जो कीटों से बचाती थी. इससे भारत में कपास की पैदावार बहुत बढ़ गई, और 2011-12 तक वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक बन गया. भारत उस समय कपास का बड़ा निर्यातक भी था. लेकिन 2006 के बाद नई GM तकनीक को मंजूरी नहीं मिली. पुरानी Bt किस्में कीटों के खिलाफ कमजोर पड़ गईं, और उत्पादन घटने लगा. इस वजह से भारत अब फिर से कपास आयात करने लगा.

भारत में हर व्यक्ति साल में औसतन 82.6 किलो पशु उत्पाद (दूध, अंडे, मांस आदि) खाता है (2020 के आंकड़े). यह दुनिया के औसत (143 किलो) से बहुत कम है. लेकिन भारत में पशु उत्पादों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. 2000 से 2022 तक मुर्गी, अंडे, मांस, दूध, और घी का उत्पादन बहुत बढ़ा है. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि आने वाले सालों में लोग और ज्यादा पशु उत्पाद खाएंगे.

अगर भारत अमेरिकी उत्पादों, खासकर कपास, पर आयात शुल्क और पाबंदी हटाए, तो इसका बड़ा फायदा उसके कपड़ा उद्योग को हो सकता है. भारत का कपड़ा और तैयार कपड़े का उद्योग दुनिया में मशहूर है. अगर सस्ता और अच्छा कपास अमेरिका से आए, तो भारतीय कंपनियां ज्यादा कपड़े बना सकती हैं और उन्हें सस्ते दाम पर बेच सकती हैं. इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा, जिसमें अमेरिका भी शामिल हो सकता है. साथ ही, ज्यादा कपास उपलब्ध होने से नौकरियां भी बढ़ेंगी. यह भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
22000 करोड़ के कर्ज पर बवाल…
कारोबार

22000 करोड़ के कर्ज पर बवाल…

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने NCLT विवाद में मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 22000 करोड़ रुपये के कर्ज संबंधी दावे को गलत बताया। रिलायंस ने आरोपों का खंडन किया है।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰
क्या आम जनता के लिए बंद होगा फ्री UPI?
खास खबर

क्या आम जनता के लिए बंद होगा फ्री UPI?

संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली कानून से जुड़े संशोधन के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब यूपीआइ से पैसे भेजने या दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने पर शुल्क देना होगा। इंटरनेट मीडिया पर तरह-तरह के दावे भी किए जा रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार […]

UB India News27 अग॰
भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य…………..
खास खबर

भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य…………..

रूस में आईआरआईजीसी-टेक के 27वें सत्र की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए व‍िदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा क‍ि भारत-रूस व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टेक) के 27वें सत्र में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है. इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने […]

UB India News25 अग॰
सरकार चलाएगी कांदा एक्‍सप्रेस !……………..
खास खबर

सरकार चलाएगी कांदा एक्‍सप्रेस !……………..

दिल्‍ली, लखनऊ, पटना समेत देश के अलग-अलग शहरों में प्‍याज की कीमतें अचानक बढ़ने लगी है. कई बड़े शहरों में महीने भर पहले 30 से 40 रुपये किलो मिलने वाला प्‍याज 50 से 65 रुपये किलो तक बिक रहा है. प्‍याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने अपना बफर स्‍टॉक बाजार […]

UB India News24 अग॰
इथेनॉल पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा बिहार?
पटना

इथेनॉल पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा बिहार?

बिहार में उद्योग विभाग संभाल रहीं, मंत्री श्रेयसी सिंह आत्मविश्वास से भरपुर हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस वर्ष के नवंबर तक बिहार में पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का जो लक्ष्य रखा है, उसे वे जरूर पूरा करेंगी। इसमें इथेनॉल की क्या भूमिका होगी। इथेनॉल पर बिहार ने इतना […]

UB India News24 अग॰
भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?
खास खबर

भविष्य में भारत का ड्रोन बाजार दायरा कितना बड़ा हो सकता है?

कुछ साल पहले तक ड्रोन का नाम आते ही कैमरे से तस्वीरें लेने वाली उड़ती मशीन का ख्याल आता था। अब ड्रोन का इस्तेमाल इससे कहीं आगे निकल चुका है। खेती में कीटनाशक का छिड़काव, गांवों में जमीन की मैपिंग, हाईवे और रेलवे की निगरानी, आपदा के समय राहत-बचाव और रक्षा क्षेत्र में निगरानी जैसे […]

UB India News19 अग॰
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में आने वाले समय में देखने को मिल सकते है बड़े बदलाव ……………
खास खबर

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में आने वाले समय में देखने को मिल सकते है बड़े बदलाव ……………

भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लक्ष्य के बीच सरकार अब बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार जल्द ही एक हाई-पावर कमेटी बनाएगी, जो देश के बैंकिंग सिस्टम को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से मजबूत बनाने के लिए सुझाव […]

UB India News17 अग॰