फाइनेंशल ईयर 25-26 : टैरिफ वार के बीच कैसी रहेगी मार्केट की चाल और अर्थव्यवस्था की रफ्तार …..

नया वित्तीय वर्ष कल एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। अनुमान है नया साल भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा। इस बिच अमेरिका की ट्रंप सरकार की तरफ से 2 अप्रैल को टैरिफ लगाने के एलान ने इस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है. 31 मार्च यानी आज […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 31 मार्च 2025, 06:55 AM 6 मिनट read
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फाइनेंशल ईयर 25-26 : टैरिफ वार के बीच कैसी रहेगी मार्केट की चाल और अर्थव्यवस्था की रफ्तार …..
Photo: UB India News Archive

नया वित्तीय वर्ष कल एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। अनुमान है नया साल भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा। इस बिच अमेरिका की ट्रंप सरकार की तरफ से 2 अप्रैल को टैरिफ लगाने के एलान ने इस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है. 31 मार्च यानी आज ईद की वजह से बाजार बंद है. ऐसे में 1 अप्रैल से शुरू होने वाले छोटे सप्ताह में बेंचमार्क इंडेक्स के मजबूत होने की संभावना है. हालांकि, उससे पहले 31 अप्रैल को सोना अब तक सर्वोच्च स्तर 3100 डॉलर के पार पहुंच गया है.

अमेरिका की तरफ से 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ उन देशों के खिलाफ प्रभावी हो जाएगा, जो अमेरिकी सामानों पर जितना टैरिफ लगाता है, उन देशों के खिलाफ उसी हिसाब से लगाया जाएगा. तो वहीं, ऑटो टैरिफ भी 2 अप्रैल से लगना शुरू हो जाएगा. एक्सपर्ट्स लगातार इस बात को लेकर आगाह कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में ट्रेड वॉर बढ़ शुरू हो सकती है और इसका नतीजा वैश्विक मंदी के रुप में सामने आ सकता है.

अब आइये जानते हैं कि वो कौन से फैक्टर रहेंगे, जिन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगे:

चीन, जापान और अमेरिका के साथ ही कई देशों के मैन्युफैक्चरिंग डेटा मार्च के महीने में जारी होंगे. अमेरिकी नौकरियों के डेटा जारी होने पर भी सबकी नजर रहेगी. इसके साथ ही, ब्याज दर पर किसी तरह का फैसला लेते समय अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व नौकरियों के आंकड़ों पर भी फोकस करता है.

इसके अलावा, फाइनेंशल ईयर 2025 के आखिरी सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े 4 अप्रैल को जारी होंगे. देश का विदेशी मुद्रा भंडार 21 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में बढ़कर 658.8 डॉलर हो गया था. इसी तरह से ऑटोमोबाइल कंपनियां आने वाले हफ्ते में बिक्री को लेकर नया डेटा जारी करेगी. इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टरस (एफआईआई) की एक्टिविटीज पर भी मार्केट पार्टिसिपेंट्स का फोकस रहेगा.

कोई नया आईपीओ इस हफ्ते नहीं खुल रहा है. पहले से ही खुले तीन आईपीओ में पैसा लगाने के लोगों के पास मौका रहेगा. इसके अलावा, साथ ही, डीआईआई यानी डॉमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने पिछले हफ्ते 6797 करोड़ के शेयर खरीदकर मार्केट में अपने सपोर्ट को बरकरार रखा है.

जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘आगे चलकर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का प्रवाह मुख्य रूप से ट्रंप के जवाबी शुल्क पर निर्भर करेगा. यदि शुल्क का प्रतिकूल प्रभाव बहुत अधिक नहीं रहता है, तो एफआईआई का प्रवाह जारी रह सकता है.’’  उन्होंने कहा कि एफआईआई की रणनीति बिकवाली से मामूली खरीद की हो गई है.

21 मार्च को समाप्त सप्ताह में यह दिखाई दिया था और 28 मार्च को समाप्त सप्ताह में भी यह रुख जारी रहा.  निवेशकों की निगाह रुपये-डॉलर के रुझान और वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘इस सप्ताह शुल्क को लेकर चीजें अधिक साफ हो सकेंगी. इससे निवेशक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का आकलन कर सकेंगे.

 

नया वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। यह साल भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा। ईवाई इकोनॉमी वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि नए वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर दिया गया है। संतुलित राजकोषीय रणनीति को मतदीर्घकालिक विकास संभावनाओं को काफी बढ़ा सकती है।

ईवाई इकोनॉमी वॉच के मार्च संस्करण में कहा गया कि वित्त वर्ष 25 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया। जबकि नए वित्तीय वर्ष में 6.5 प्रतिशत से वृद्धि का अनुमान है।

पिछले महीने एनएसओ ने वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत, 9.2 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत का अनुमान लगाया। जबकि वित्त वर्ष 25 की तीसरी तिमाही की वृद्धि 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि के लिए निजी अंतिम उपभोग व्यय में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट में कहा गया कि संशोधित अनुमानों के अनुसार सरकार का राजकोषीय घाटा अनुदान की पूरक मांग से प्रभावित हो सकता है। बढ़ती आबादी और विकसित आर्थिक संरचना के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में अतिरिक्त निवेश दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने और मानव पूंजी परिणामों में सुधार करने के लिए आवश्यक हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगले दो दशकों में भारत को अपने सामान्य सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यय को धीरे-धीरे बढ़ाने की आवश्यकता होगी। जिससे यह उच्च आय वाले देशों के करीब आ जाएगा।

भारत की युवा आबादी और बढ़ती कार्यबल आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार को शिक्षा पर खर्च को वित्त वर्ष 2048 तक जीडीपी के मौजूदा 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत करने की जरूरत होगी। जबकि स्वास्थ्य सेवा पहुंच और परिणाम के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यय को वित्त वर्ष 2048 तक जीडीपी के 3.8 प्रतिशत तक बढ़ाना होगी। इसके लिए अधिक युवा आबादी वाले कम आय वाले राज्यों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की जरूरतों को पूरा करने के लिए समान हस्तांतरण के माध्यम से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि वित्तीय पुनर्गठन के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण विकास से समझौता किए बिना इन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है। समय के साथ राजस्व-जीडीपी अनुपात को 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 29 प्रतिशत करने से आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की बदलती आयु संरचना से कुल आबादी में कामकाजी उम्र के व्यक्तियों की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। अगर उन्हें बेहतर रोजगार दिया जाए तो इससे विकास, रोजगार, बचत और निवेश का एक अच्छा चक्र बन सकता है। इसे हासिल करने के लिए भारत को अपने राजस्व-जीडीपी अनुपात को बढ़ाने और स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च का हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है।

 

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