RBI ने ब्याज दर आधा फीसदी घटाकर 5.50% की, 5 महीने में तीसरी बार कम हुआ रेपो रेट

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद आज आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा की. रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती की है. इस कटौती के साथ रेपो रेट […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 6 जून 2025, 05:02 AM 6 मिनट read
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RBI ने ब्याज दर आधा फीसदी घटाकर 5.50% की, 5 महीने में तीसरी बार कम हुआ रेपो रेट
Photo: UB India News Archive
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद आज आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा की. रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (bps) की कटौती की है. इस कटौती के साथ रेपो रेट अब घटकर 5.50 फीसदी रह गया है. आरबीआई ने फरवरी और अप्रैल में भी रेपो रेट में 25-25 आधार अंकों की कटौती की थी. फरवरी 2025 में करीब पांच वर्षों के अंतराल के बाद ब्‍याज दरों में कटौती की गई थी. उस समय रेपो रेट को 6.5% से घटाकर 6.25% किया गया था.
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. जब रेपो रेट कम होता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन दे पाते हैं. रेपो रेट में कटौती से होम और कार लोन जैसे ऋण सस्‍ते हो जाएंगे और ग्राहकों की ईएमआई घट जाएगी. खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बने रहने ने आरबीआई को रेपो रेट में कटौती करने को प्रेरित किया है.

इस साल रेपो रेट में कुल 1% की कटौती हुई

इस साल फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी।

फिर अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। अब तीसरी बार दर घटाई गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दर को 1% घटाया गया है।

रेपो रेट के घटने से क्या बदलाव आएगा?

रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर अपनी ब्याज दरें कम कर सकते हैं। वहीं ब्याज दरें कम होंगी तो हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।

CRR घटने से ₹2.5 लाख करोड़ फाइनेंशियल सिस्टम में आएंगे

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में 1% की कटौती करके इसे 4.00% से घटाकर 3.00% करने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि RBI के इस कदम से ₹2.5 लाख करोड़ फाइनेंशियल सिस्टम में आएंगे।

CRR वो पैसा है जो बैंकों को अपने कुल जमा का एक हिस्सा रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के पास रखना होता है। इससे RBI ये कंट्रोल करता है कि बाजार में कितना पैसा रहेगा। अगर CRR कम होता है, तो बैंकों के पास लोन देने के लिए ज्यादा पैसा बचता है, जैसे इस बार 1% की कटौती से ₹2.5 लाख करोड़ रुपए सिस्टम में आएंगे।

रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है?

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है?

किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।

पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है।

बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हो रही है।

आरबीआई के रुख में बदलाव

एमपीसी बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को लेकर अपना रुख भी बदला है. अब उसने ‘अकोमो‍टेडिव’ की बजाय ‘न्‍यूट्रल’ रुख अपनाया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह महसूस किया है कि आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने की गुंजाइश अब सीमित है. उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) भी नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय वस्तु कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है. महंगाई दर लक्ष्य से भी नीचे रह सकती है.

आरबीआई के रुख में बदलाव

एमपीसी बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को लेकर अपना रुख भी बदला है. अब उसने ‘अकोमो‍टेडिव’ की बजाय ‘न्‍यूट्रल’ रुख अपनाया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह महसूस किया है कि आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने की गुंजाइश अब सीमित है. उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) भी नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय वस्तु कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है. महंगाई दर लक्ष्य से भी नीचे रह सकती है.

 

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