देश में महंगाई कम हो रही है, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है और उन्हें राहत महसूस हो रही है. सरकार ने सोमवार, 14 जुलाई को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़े जारी किए. इससे पता चला कि जून का WPI 20 महीने के निचले स्तर 0.13 परसेंट पर रहा, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे कम है. वहीं, मई के महीने का थोक मूल्य सूचकांक 0.39 परसेंट रहा. यानी कि कुल मिलाकर देश में महंगाई तेजी से घटी है. सरकार का कहना है कि क्रूड पेट्रोलियम, नैचुरल गैस, मिनरल ऑयल व बेसिक मेटल्स की मैन्युफैक्चरिंग सस्ती होने के चलते यह गिरावट आई है. इसके अलावा, खाने-पीने की चीजों की कीमत भी कम हुई है.
आलू-प्याज से लेकर दालें हुईं सस्ती
जून में सब्जियों की महंगाई दर घटकर 22.65 परसेंट रही, जो मई में 21.62 परसेंट थी. प्याज की महंगाई 33.49 परसेंट रही, जो मई में 14.41 परसेंट थी. इस दौरान आलू की कीमत में 32.67 परसेंट तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि मई में यह 29.42 परसेंट कम थी. दालों की कीमतों में भी 22.65 परसेंट तक की गिरावट आई, जो मई में 10.41 परसेंट तक कम हुई थी. अनाज की महंगाई भी 3.75 परसेंट कम हुई रही, जो मई में 2.56 परसेंट थी. कुल मिलाकर, रसोई का सामान सस्ता होने से आम आदमी को राहत मिली है.
ईंधन और बिजली की कीमतें भी हुईं कम
इस दौरान ईंधन और बिजली की कीमतें भी काबू में रहीं. जमन में इस सेगमेंट की महंगाई दर 2.65 परसेंट रही, जो मई में 22.27 परसेंट थी. यानी कि ईंधन और बिजली की कीमतों में भी भारी कमी आई है. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 1.97 परसेंट रही, जो WPI बास्केट का 60 परसेंट हिस्सा रखता है. प्राथमिक वस्तुओं (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई जून में 3.38 परसेंट तक कम हुई, जबकि मई में ये 2.02 परसेंट कम हुई थी.
महंगाई में और गिरावट की उम्मीद
अप्रैल में हुई मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कहा था कि मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों के दाम घटने से महंगाई में कमी आई है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 26 में महंगाई और कम होने का अनुमान लगाया. बैठक में वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई का अनुमान 4 परसेंट लगाया गया, जबकि पहले 4.2 परसेंट तक अनुमान लगाया गया था.
रॉयटर्स की ओर से कराए गए अर्थशास्त्रियों के एक सर्वेक्षण में जून में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि के साथ 0.52% तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। थोक मुद्रास्फीति में 60% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति इस महीने 1.97% रही। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर जून में 3.38% रही। मई में यह 2.02% थी।
खाद्य पदार्थों की कीमतों नरमी से थोक महंगाई में कमी
थोक महंगाई दर में नरमी के बीच जून में कीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट खाद्य पदार्थों की कीमतों में देखी गई। सब्जियों की मुद्रास्फीति जून में घटकर 22.65% रह गई, जबकि मई में यह 21.62% थी। प्याज की मुद्रास्फीति घटकर 33.49% रह गई, जो एक महीने पहले 14.41% थी। वहीं, आलू की मुद्रास्फीति (-)32.67% रही, जबकि मई में यह (-)29.42% थी। दालों की कीमतें (-)22.65% रही, जबकि पिछले महीने यह 10.41% थी। वहीं अनाज की मुद्रास्फीति मई में 2.56% दर्ज की गई थी, जो घटकर 3.75% रह गई। इसके अलावा, देश में खुदरा मुद्रास्फीति मई 2025 में छह साल के निचले स्तर 2.82% पर आ गई।
रिजर्व बैंक की एमपीसी ने महंगाई पर क्या कहा है?
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी अप्रैल की बैठक में, मूल्य दबावों में निरंतर नरमी का हवाला दिया थो। एमपीसी ने मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी को इसका कारण बताया था। इसने वित्त वर्ष 26 में मुद्रास्फीति में और नरमी का अनुमान लगाया था। महंगाई कम होने से उपभोक्ताओं को राहत मिली है। एमपीसी ने अपने वित्त वर्ष 26 के मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4% तक संशोधित किया, जो इसके पहले के 4.2% के अनुमान से कम है। तिमाही-वार अनुमानों से पता चला है कि पहली तिमाही में मुद्रास्फीति औसतन 3.6%, दूसरी तिमाही में 3.9%, तीसरी तिमाही में 3.8% और वित्त वर्ष 26 की अंतिम तिमाही में 4.4% रहने की उम्मीद है।








