भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ गया, जब उसने अपने बाहुबली कहे जाने वाले प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 के जरिये अमेरिकी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया, जो भारत से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। गौरतलब है कि […]
By UB India News • Patna, Bihar गुरुवार, 25 दिसंबर 2025, 04:53 AM • 9 मिनट read
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ गया, जब उसने अपने बाहुबली कहे जाने वाले प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 एम6 के जरिये अमेरिकी संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया, जो भारत से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। गौरतलब है कि इसरो द्वारा विकसित करीब 640 टन वजनी तीन चरणीय लॉन्च व्हीकल एलवीएम-3 अपने गौरवशाली इतिहास में इससे पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब मिशनों में भी सफलतापूर्वक अपनी छाप छोड़ने में सफल रहा था।
2023 के बाद यह दूसरा वर्ष है, जब इसरो ने एक ही वर्ष में दो एलवीएम-3 मिशनों का संचालन किया है, जो भारी उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती गति, क्षमता व विश्वास को रेखांकित करता है। दूसरी ओर, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 इसरो की व्यावसायिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के समझौते का हिस्सा है। इस उपग्रह का वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है और इसमें एक 223 वर्ग मीटर फेज्ड ऐरे एंटीना लगा हुआ है, जिसकी मदद से बगैर मोबाइल टावरों के हिमालय, रेगिस्तान, महासागर या आपदाग्रस्त जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी मोबाइल फोन पर 4जी और 5जी वॉयस कॉल, वीडियो, टेक्स्ट और डाटा का इस्तेमाल करना संभव हो सकेगा। इस कामयाबी का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिकी अंतरिक्ष सहयोग भी है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी, डाटा साझाकरण व संयुक्त शोध में तेजी आई है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का प्रक्षेपण इस सहयोग को एक ठोस व्यावहारिक रूप देता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारत केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि तकनीकी भागीदार बनने की क्षमता भी रखता है। ऐसे वक्त में, जब अंतरिक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, यह विश्वास व पारदर्शिता दोनों देशों के बीच रणनीतिक रूप से लाभकारी है। यह मिशन भारत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में प्रतिस्पर्धा तीव्र है, जहां स्पेसएक्स जैसी निजी कंपनियां आक्रामक रणनीतियों के साथ मौजूद हैं।
इसके बावजूद, इसरो की विश्वसनीयता, अपेक्षाकृत कम लागत और कामयाब ट्रैक रिकॉर्ड उसे विशिष्ट स्थान दिलाते हैं। ताजा कामयाबी से भारत के लिए भविष्य में अधिक वाणिज्यिक अनुबंध मिलने की संभावना बढ़ेगी। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक मील का पत्थर है। अगर इस गति को दूरदर्शी नीतियों, निजी भागीदारी और वैश्विक सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में महज एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि निस्संदेह नेतृत्वकारी राष्ट्र के रूप में पहचाना जाएगा।
एलवीएम3-एम6 मिशन की शानदार सफलता ने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के प्रति भरोसे को और मजबूत कर दिया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि लगातार नौ सफल एलवीएम3 लॉन्च ने यह साबित कर दिया है कि भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।
बुधवार को एलवीएम3-एम6 रॉकेट के जरिए ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया गया। इस मिशन को खास बताते हुए नारायणन ने कहा कि एलवीएम3 वही मानव-रेटेड लॉन्च व्हीकल है, जिसे गगनयान मिशन के लिए चुना गया है। ऐसे में इसकी निरंतर सफलता बेहद अहम है।
अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट भारत की धरती से लॉन्च
उन्होंने बताया कि इस मिशन में सैटेलाइट को बेहद सटीकता के साथ तय कक्षा में पहुंचाया गया। लक्ष्य 520 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा था, जबकि सैटेलाइट को 518.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया, जो अब तक भारतीय लॉन्चरों की सबसे बेहतरीन सटीकता मानी जा रही है। इस मिशन की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि यह भारत की धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट था। करीब 5,908 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाकर इसरो ने एक नया कीर्तिमान रचा। यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे हुई। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका की AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए कॉमर्शियल समझौते का हिस्सा है।
नारायणन ने बताया कि एलवीएम3 रॉकेट ने इस मिशन में 100 प्रतिशत विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया। साथ ही पहली बार एस200 सॉलिड मोटर कंट्रोल सिस्टम में एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया। पहले जहां इलेक्ट्रो-हाइड्रो एक्ट्यूएटर का उपयोग होता था, वहीं अब स्वदेशी रूप से विकसित शक्तिशाली इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्ट्यूएटर लगाया गया है, जिससे रॉकेट की पेलोड क्षमता लगभग 150 किलोग्राम तक बढ़ गई है।
तो मोबाइल नेटवर्क के लिए नहीं लगेंगे टावर?
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) इस साल के अपने आखिरी मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया । 24 दिसंबर (बुधवार) को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के एक अहम सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है। एलवीएम3-एम6 मिशन के जरिए अमेरिकी कंपनी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाना है। यह इस रॉकेट की छठी ऑपरेशनल उड़ान (एलवीएम3-एम6) है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इसरो का ये मिशन क्या है? कैसे भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि बनेगा? जिस मिशन का भारत ने बीड़ा उठाया है, वह सैटेलाइट क्यों खास है? कैसे इसरो की मदद से आने वाले समय में अमेरिकी कंपनी मोबाइल नेटवर्क का पूरा स्वरूप बदल सकती है और स्टारलिंक जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है? आइये जानते हैं…
पहले जानें- क्या है इसरो का मिशन, क्या इतिहास बनाने की तैयारी?