इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, प्रक्षेपण के बाद तकनीकी समस्या,जांच जारी………..

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल का पहला सैटेलाइट मिशन फेल हो गया है। यह सोमवार सुबह 10:18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के हरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV-C62 रॉकेट अन्वेषा समेत 15 सैटेलाइट लेकर उड़ा था। इसरो के मुताबिक, मिशन के तीसरे स्टेज में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण सैटेलाइट […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 12 जनवरी 2026, 05:18 AM 5 मिनट read
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इसरो का PSLV-C62 रॉकेट रास्ते से भटका, प्रक्षेपण के बाद तकनीकी समस्या,जांच जारी………..
Photo: UB India News Archive

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल का पहला सैटेलाइट मिशन फेल हो गया है। यह सोमवार सुबह 10:18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के हरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV-C62 रॉकेट अन्वेषा समेत 15 सैटेलाइट लेकर उड़ा था।

इसरो के मुताबिक, मिशन के तीसरे स्टेज में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण सैटेलाइट अपने तय ऑर्बिट में तैनात नहीं हो सका और रास्ता भटक गया। ISRO प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके बाद वह रास्ता भटक गया।

8 महीने पहले, मई 18 2025 को इसरो का PSLV-C61 मिशन भी तकनीकी खराबी के कारण तीसरे स्टेज में फेल हो गया था। इस मिशन में EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को 524 किमी की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था। इसरो का यह 101वां लॉन्च मिशन था।

इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि PSLV-C62 मिशन में PS3 स्टेज के आखिर में एक गड़बड़ी हुई। इसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले इसरो प्रमुख डॉ. वी नारायणन ने कहा, ‘हमने पीएसएलवी सी62 ईओएस-एन1 मिशन के प्रक्षेपण का प्रयास किया। पीएसएलवी रॉकेट चार चरणों का होता है… तीसरे चरण की समाप्ति से ठीक पहले तक सबकुछ सामान्य रहा, इसके बाद कुछ परेशानी देखी गई। हम जल्द ही अपडेट साझा करेंगे।’
दुश्मन की निगरानी करेगा उपग्रह अन्वेषा
उपग्रह अन्वेषा पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए तस्वीरें लेगा। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो साधारण कैमरों से ज्यादा स्मार्ट हैं। यह आसमान से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। इस लॉन्च में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर वाले पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह मिशन पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान है।

  • अन्वेषा को धरती से करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट में स्थापित किया जाएगा।
  • इससे आतंकियों से लेकर घुसपैठियों के साथ उपद्रवी पर आसानी से पैनी नजर रख जा सकेगी।
  • यह जंगलों या बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें भी खींच सकता है।
  • इससे सेना को बहुत मदद मिलेगी और देश के दुश्मनों पर निगरानी की जा सकेगी।

पीएसएलवी, इसरो का मुख्य लॉन्च व्हीकल है, जिसने चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे महत्वपूर्ण मिशन सहित 63 उड़ानें पूरी की है। 2017 में, पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

देश का सबसे अहम डिफेंस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’
PSLV-C62 मिशन एक बहुत ही अहम अंतरिक्ष मिशन है। यह सिर्फ एक नियमित प्रक्षेपण नहीं है। 16 उपग्रहों को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करने वाला यह मिशन वैश्विक स्मॉल-सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती पकड़ को दिखाता है। मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। यह  रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।

‘अन्वेषा’ की जानें खासियत
मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। यह  रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक है, जो हर पिक्सल में सैकड़ों लाइट बैंड रिकॉर्ड करती है। इससे फसल स्वास्थ्य, मिट्टी की नमी, खनिज संसाधन, शहरी विस्तार और पर्यावरणीय बदलावों की बेहद सूक्ष्म जानकारी मिल सकेगी।

14 अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में स्थापित होंगे

इसरो ने अपने 2026 के प्रक्षेपण कैलेंडर की शुरुआत सोमवार को ‘पीएसएलवी-सी62’ मिशन के साथ किया है। इस मिशन के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘ईओएस-एन1’ और 14 अन्य पेलोड को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इसरो की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (एनएसआईएल) के इस मिशन में शामिल 14 अन्य सह-यात्री उपग्रह देशी और विदेशी ग्राहकों के हैं वे सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम प्रक्षेपण स्थल से लॉन्च हुए हैं।

EOS-N1 की खूबियां

मुख्य पेलोड DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान और पर्यावरण मॉनिटरिंग में क्रांति लाएगा। यह 2025 की असफलता के बाद PSLV का महत्वपूर्ण कमबैक है। इसरो EOS-N1 के अलावा आज 14 दूसरे पेलोड को भी अंतरिक्ष में स्थापित करेगा।

सारे पैरामीटर्स लॉन्च के माकूल 

पहले PSLV C62/ EOS N1 लॉन्च का ऑटोमेटिक सिक्वेंस जारी कर दिया गया। इसका मतलब है कि सारे पैरामीटर्स लॉन्च के माकूल हैं। इसके बाद एक बार अंतिम परीक्षण किया गया। फिर 10 बजकर 18 मिनिट और 30 सेकेंड पर लिफ़्ट ऑफ किया गया।

चीन ने बीते साल किया था परीक्षण

यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी रूप से क्रांतिकारी है, बल्कि भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों और इसरो के सहयोग का भी शानदार उदाहरण है. जब पूरी दुनिया अभी इस जटिल तकनीक से जूझ रही है, तब भारत आज एक बार फिर साबित कर रहा है कि वह अंतरिक्ष की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है.
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