निपाह वायरस को लेकर झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट….

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए हैं। इसके बाद झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को सतर्कता बढ़ाने और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026, 07:39 AM 7 मिनट read
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निपाह वायरस को लेकर झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट….
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए हैं। इसके बाद झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को सतर्कता बढ़ाने और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड में अब तक निपाह का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों से लोगों की आवाजाही संभावित खतरा पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने कहा, “रोग की अत्यधिक संक्रामक प्रकृति और इसकी उच्च मृत्यु दर को देखते हुए विभाग ने निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है।” स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निपाह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से मनुष्यों और जानवरों में फैलता है। इसका संक्रमण चमगादड़ों की लार या मूत्र से दूषित फलों या कच्चे खजूर के रस के सेवन से या संक्रमित व्यक्तियों और उनके शारीरिक द्रवों के निकट संपर्क से भी फैल सकता है। परामर्श में निपाह के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश, मानसिक स्थिति में बदलाव तथा दौरे और कोमा जैसी तंत्रिका संबंधी गंभीर जटिलताओं का उल्लेख किया गया है।

सभी जिलों को दिए गए निर्देश

निर्देश जारी करते हुए कहा गया, “जिलों को निर्देश दिया जाता है कि वे निपाह प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले व्यक्तियों की विशेष रूप से जांच और निगरानी करें, ताकि किसी संभावित प्रकोप को रोका और नियंत्रित किया जा सके। सभी संदिग्ध मामलों की एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को तुरंत सूचना दी जाए।” इसमें यह भी कहा गया है कि गंभीर लक्षणों या श्वसन संकट वाले मरीजों को तुरंत क्वारेंटाइन किया जाए और उन्नत चिकित्सा देखभाल के लिए रेफर किया जाए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण (आईपीसी) प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आम लोगों से भी की गई बचाव की अपील

इस एडवाइजरी में आम लोगों से अपील की गई है कि वे गिरे हुए फल न खाएं, कच्चा खजूर का रस या ताड़ी का सेवन न करें, अनावश्यक निकट संपर्क से बचें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। इस बीच एक अधिकारी ने बताया कि रिम्स में एक क्वारेंटाइन वार्ड में 22 बिस्तर तैयार रखे गए हैं। इससे पहले 13 जनवरी को राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जन जागरूकता को लेकर अलर्ट जारी करते हुए दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। बता दें कि निपाह वायरस एक अधिसूचित रोग है, जिसकी मृत्यु दर अधिक है और इसके तेजी से फैलने की आशंका रहती है।

कई मामलों में खतरनाक है निपाह का संक्रमण

निपाह वायरस के संक्रमण को कई अध्ययनों में कोरोनावायरस से अधिक खतरनाक बताया जाता रहा है। इससे संक्रमितों की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है। गंभीर स्थितियों में आईसीयू और वेंटिलेटर की भी जरूरत हो सकती है। निपाह का संक्रमण फेफड़े और ब्रेन को भी अटैक करता है। कुछ मरीजों में संक्रमण के एन्सेफलाइटिस होने के मामले भी देखे गए हैं।

आइए 10 प्वाइटंस में निपाह वायरस से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जान लेते हैं।

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पश्चिम बंगाल में बढ़े निपाह के मरीज –

1. निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा जूनोटिक रोग है, जिसका मतलब है कि ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। मुख्य रूप से ये चमगादड़ों में पाया जाता है और जब इन चमगादड़ों द्वारा दूषित फल इंसान खा लेते हैं तो इसे संक्रमण का खतरा हो सकता है। चमगादड़ों के लार और मूत्र से दूषित खाद्य पदार्थ भी संक्रमण का कारण हो सकते हैं।

2. निपाह वायरस इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह तेजी से शरीर में फैलकर दिमाग और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। कई मामलों में यह संक्रमण बहुत जल्दी गंभीर रूप ले लेता है, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

3. निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, जिससे इसे पहचान में देरी हो सकती है। संक्रमितों को तेज बुखार, सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है। शुरुआत में हल्के लगने वाले ये लक्षण तेजी से गंभीर होते जाते हैं।

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निपाह के कारण होने वाली दिक्कतें

4. निपाह वायरस का असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। संक्रमित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में निमोनिया जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। इसके साथ ही मरीज को चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और बोलने में परेशानी भी हो सकती है।

5. निपाह वायरस की सबसे गंभीर जटिलता एन्सेफेलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन होना है। जब वायरस दिमाग तक पहुंचता है, तो इससे मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। इसके अलावा  भ्रम, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज कोमा की हालत में भी चला जाता है।

6. मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ मरीजों में संक्रमण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बनी रहती हैं। जिन स्थानों पर इसका जोखिम रहता है वहां लोगों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। पिछले साल ये वायरस केरल में भी प्रकोप मचा चुका है।

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7. निपाह वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है, जो लगभग 40 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है। ग्रामीण और कम संसाधन वाले इलाकों, जहां समय पर रोग की पहचान और इलाज नहीं हो पाती है वहां पर खतरा और बढ़ जाता है।

8. फिलहाल निपाह वायरस का कोई विशेष विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें बुखार नियंत्रित करना, सांस की मदद और आईसीयू सपोर्ट शामिल है। गंभीर मामलों में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। समय पर पहचान और सही देखभाल से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

9. निपाह वायरस से बचाव ही सबसे कारगर तरीका है। खुले में रखे फल खाने से बचें और अच्छी तरह धोकर ही फल का सेवन करें। जिन इलाकों में निपाह के मामले सामने आए हों, वहां लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। चमगादड़ों के रहने के स्थान या बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें।

10. निपाह का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, हालांकि जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें रोग का खतरा अधिक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस की तकलीफ या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखें और वह निपाह प्रभावित क्षेत्र में रहा हो, तो तुरंत उससे दूरी बनाए रखें और उसे डॉक्टर के पास भेजें।

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