भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर भारत का निर्यात परिदृश्य सतर्क, लेकिन उम्मीदों से भरा लग रहा…………………..

बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निर्यात के बारे में भविष्यवाणी करना आसान काम नहीं है। 2026 की शुरुआत को अभी दो हफ्ते से थोड़ा ही ज्यादा समय हुआ है, लेकिन साल ने आते ही वैश्विक राजनीति में जबर्दस्त हलचल मचा दी है। इसी कड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026, 08:03 AM 6 मिनट read
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भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर भारत का निर्यात परिदृश्य सतर्क, लेकिन उम्मीदों से भरा लग रहा…………………..
Photo: UB India News Archive

बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निर्यात के बारे में भविष्यवाणी करना आसान काम नहीं है। 2026 की शुरुआत को अभी दो हफ्ते से थोड़ा ही ज्यादा समय हुआ है, लेकिन साल ने आते ही वैश्विक राजनीति में जबर्दस्त हलचल मचा दी है। इसी कड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बेहद चौंकाने वाले तरीके से पकड़े जाने की खबर ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी हैं। इस घटना ने तेल बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है और भू-राजनीति के स्थापित नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के एक नए, अधिक अनिश्चित और अप्रत्याशित दौर में प्रवेश कर रहे हैं।

कई जानकारों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल करने के इरादे से कहीं अधिक है। ऐसा वेनेजुएला के तेल और दुर्लभ खनिजों पर नियंत्रण करने के इरादे से किया गया है, क्योंकि इस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है, जो करीब 303 अरब बैरल है और यह वैश्विक भंडार का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है। उधर ईरान विरोध प्रदर्शनों से उबल रहा है और पता नहीं आने वाले समय में यह किस दिशा में जाएगा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद, भारत ने अब तक आर्थिक विकास और निर्यात, दोनों मामलों में मजबूती दिखाई है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए, पिछला प्रदर्शन भविष्य के प्रदर्शन का संकेत नहीं है। भारत की निर्यात बढ़ोतरी का परिदृश्य सतर्क, लेकिन आशा भरा दिखाई दे रहा है। उम्मीद है कि ऐसा सेवा क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्र के विकास से होगा।

यह भी बताया गया है कि आयात में बढ़ोतरी के कारण भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़ गया है। आयात में बढ़ोतरी हमेशा खराब नहीं होती, क्योंकि भारतीय निर्यात काफी हद तक आयात पर निर्भर रहता है। यह जानना भी जरूरी है कि दिसंबर में अमेरिका को होने वाला निर्यात महीने-दर-महीने बढ़ा है। ट्रंप प्रशासन द्वारा ज्यादा टैरिफ लगाए जाने के बावजूद, अमेरिका से निर्यात की मांग बढ़ी है। हालांकि, दिसंबर 2025 में भारत का कुल निर्यात 74 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो दिसंबर 2024 की तुलना में 1.01 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि है। कुल आयात 80.94 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो दिसंबर 2024 की तुलना में 6.17 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि है। मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में भी अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 65.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 105.31 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत ने 26.45 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) दर्ज किया। इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में द्विपक्षीय व्यापार 94.97 अरब डॉलर था और भारत का व्यापार अधिशेष 25.09 अरब डॉलर रहा था।

भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत के निर्यात में कुछ सुधार देखने को मिला, तो चीन से आयात तेजी से बढ़ा है। यह रुझान साफ तौर पर चीनी मध्यवर्ती और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर भारत की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का कुल व्यापार निर्यात बढ़कर 330.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 322.41 अरब डॉलर था। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में आयात बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया, जिसके चलते वस्तु व्यापार घाटा 248.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

गौरतलब है कि, भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य अभी भी अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) हैं। भारत के आयात स्रोत भी चीन, अमेरिका, हांगकांग, यूएई और आयरलैंड ही हैं। दूसरे शब्दों में, कई अनिश्चितताओं के बावजूद, निर्यात और आयात की समग्र संरचना नहीं बदली है। हालांकि, निर्यात बाजार और आयात स्रोत में निश्चितता और अनुमानितता सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है, लेकिन इस सामान्य व्यावसायिक स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह खासकर राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक रवैये के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जो भारतीय निर्यात पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने और ईरान के साथ व्यापार करने वाले सभी देशों पर 25 फीसदी एकतरफा टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं।

बढ़ती अनिश्चितताओं, जिनमें से अधिकांशतः ट्रंप प्रशासन की वजह से हैं, को कम करने के लिए भारत को अपने निर्यात बाजार में विविधता लाने की जरूरत है। इस संदर्भ में, यह बताना जरूरी है कि भारत का लक्ष्य 2030 तक 20 खरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात करना है। यह तभी संभव हो सकता है, जब नए बाजार तक पहुंचा जाए और उत्पादों में ज्यादा विविधता लाई जाए।

अगर हम भारत के वस्तु निर्यात को देखें, तो 70 फीसदी से ज्यादा निर्यात देश के कुछ बड़े विकसित राज्यों से होता है। ये राज्य भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में भी काफी योगदान देते हैं। इसलिए, ऐसी नीतियां लागू करने की जरूरत है, जो निर्यात मांग में उतार-चढ़ाव को कम कर सकें, जिसके लिए निर्यात के लिए नए बाजार खोजने होंगे। आखिरकार, कुछ ऐसे क्षेत्र भी होते हैं, जिनका निर्यात में योगदान शायद उतना अधिक न हो, लेकिन ऐसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं। उदाहरण के लिए, रत्न व आभूषण और चमड़ा उद्योग बहुत ज्यादा रोजगार देने वाले निर्यात सेक्टर हैं।

नीति आयोग ने हाल ही में निर्यात तैयारी सूचकांक (एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स-ईपीआई) की रूपरेखा जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु निर्यात तैयारी सूचकांक में शीर्ष राज्य हैं। ईपीआई निर्यात नीति, व्यावसायिक माहौल, आधारभूत संरचना की गुणवत्ता और निर्यात के नतीजों के आधार पर निर्यात की तैयारी का मूल्यांकन करने के लिए अलग-अलग आंकड़ों का इस्तेमाल करता है। हालांकि, ईपीआई का पहला संस्करण अगस्त, 2020 में प्रकाशित हुआ था, लेकिन ताजा संस्करण इन अनिश्चित समय में राज्यों द्वारा नीतियां बनाने और निर्यात बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) है। चूंकि, राज्य ही विकास और निर्यात के वाहक हैं, इसलिए उम्मीद है कि सोच-समझकर अपनाया गया तरीका आगे अनिश्चितता के झटके को कम करेगा।

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