बजट उम्मीद- आम बजट में मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद ,डबल पेनल्टी खत्म करने जैसे प्रस्तावों पर नजर

आम बजट में मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प देने पर विचार हो सकता है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग रिटर्न के बजाय एक रिटर्न की सुविधा मिले, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 25 जनवरी 2026, 06:26 AM 4 मिनट read
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बजट उम्मीद- आम बजट में मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद ,डबल पेनल्टी खत्म करने जैसे प्रस्तावों पर नजर
Photo: UB India News Archive

आम बजट में मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। पति-पत्नी को संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प देने पर विचार हो सकता है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया है कि शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग रिटर्न के बजाय एक रिटर्न की सुविधा मिले, जिसमें टैक्स स्लैब और छूट संयुक्त रूप से लागू हों।

हालांकि यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग है तो अलग-अलग रिटर्न फाइल करने का विकल्प भी होगा। संयुक्त रिटर्न फाइल करने पर वे तब विचार कर सकते हैं जब उन्हें इसका फायदा मिल रहा हो। सुझाव के पीछे तर्क यह है कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जहां आय का मुख्य स्रोत केवल एक व्यक्ति है। मौजूदा व्यक्तिगत टैक्स स्लैब के चलते इन परिवारों को सीमित छूट का ही फायदा मिल पाता है।

अमेरिका जैसे देशों में यह व्यवस्था पहले से लागू

संयुक्त टैक्स सिस्टम लागू होने से पति-पत्नी की आय जोड़कर टैक्स गणना हो सकेगी, जिससे टैक्स स्लैब और छूट बढ़ सकती है। अमेरिका जैसे देशों में यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसके साथ ही बजट में आयकर कानून के तहत कुछ मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव आ सकता है।

सुझाव है कि टैक्स पेयर्स चार्टर की भावना के अनुरूप टैक्स-पेयर को ईमानदार माना जाए और आपराधिक कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में हो, जहां आय छिपाने, गलत रिपोर्टिंग या जानबूझकर नाजायज फायदा लेने के स्पष्ट सबूत हों। जन विश्वास एक्ट के तहत पहले ही कुछ मामलों में आपराधिक धाराएं हटाई जा चुकी हैं।

ओल्ड टैक्स रिजीम खत्म करने की टाइमलाइन आ सकती है

ओल्ड टैक्स रिजीम तुरंत खत्म होने की संभावना कम है, लेकिन सरकार लॉन्ग टर्म फेज आउट को लेकर संकेत दे सकती है। बजट में सनसेट क्लॉज जैसी व्यवस्था का इशारा मिल सकता है। इसके साथ ही न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने पर जोर रह सकता है।

एक गलती पर दो-दो जुर्माना लगाने की व्यवस्था खत्म करने का संकेत भी है। फिलहाल गलत रिपोर्टिंग या गलत एंट्री पर अलग-अलग धाराओं में 200 प्रतिशत तक टैक्स पेनल्टी लग जाती है।

सुझाव है कि पेनल्टी को गलती की गंभीरता के अनुसार तर्कसंगत बनाया जाए। आगे ऐसे मामलों में राहत मिल सकती है, जहां टैक्स कटा लेकिन समय पर जमा नहीं हो पाया या दस्तावेज उपलब्ध कराने में चूक हुई हो।

जीएसटी की तरह इनकम टैक्स में भी ई-लेजर सिस्टम

इनकम टैक्स सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए ई-लेजर सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव भी संभव है। इसमें टैक्स पेयर्स के एडवांस टैक्स, टीडीएस और टीसीएस क्रेडिट का रिकॉर्ड रहेगा, जिसे मौजूदा या अगले साल के टैक्स से समायोजित किया जा सकेगा। इससे रिफंड आसान होने और विभाग व टैक्स पेयर्स में इंटरफेस कम होने की उम्मीद।

LPG के मर्जर-डिमर्जर पर टैक्स राहत संभव

कारोबार को आसान बनाने की दिशा में सरकार लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LPG) के पुनर्गठन पर टैक्स न लगाने पर भी विचार कर सकती है।

कंपनियों की तरह LPG के मर्जर या डिमर्जर को टैक्स न्यूट्रल बनाने से स्टार्टअप्स और छोटे कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।

हर जिले में छात्रा हॉस्टल, पीएम पोषण में नाश्ता भी

हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव आ सकता है। शिक्षा मंत्रालय ने इसे केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में वित्त मंत्रालय को सुझाया है।

पीएम पोषण योजना में लंच के साथ ब्रेकफास्ट जोड़ने पर भी विचार संभव। विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह खाली पेट स्कूल आने से सीखने की क्षमता प्रभावित होती है।

ये खबर भी पढ़ें…

नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा: असेसमेंट ईयर की जगह टैक्स ईयर आएगा, ITR फाइलिंग आसान होगी; जानिए टैक्सपेयर्स पर क्या असर पड़ेगा

केंद्र सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलकर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लाया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें सबसे बड़ा बदलाव ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ का इस्तेमाल होगा।

इससे आम टैक्सपेयर को ITR फाइल करने में कम कन्फ्यूजन होगा, क्योंकि इनकम कमाने वाला साल और टैक्स रिपोर्ट करने वाला साल एक ही होगा। यह बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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