पीएम मोदी ने बजट में हुई घोषणाओं का लाभ उठाने का किया आग्रह, बोले- निवेश और नवाचार के साथ आगे आए उद्योग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उद्योग जगत से निवेश और नवाचार के साथ आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से व्यावहारिक समाधान प्रदान करने और बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग देने की भी अपील की। ‘विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सुधार और वित्त’ विषय पर बजट के बाद आयोजित ‘वेबिनार’ को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 27 फरवरी 2026, 09:02 AM 9 मिनट read
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पीएम मोदी ने बजट में हुई घोषणाओं का लाभ उठाने का किया आग्रह, बोले- निवेश और नवाचार के साथ आगे आए उद्योग
Photo: UB India News Archive

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उद्योग जगत से निवेश और नवाचार के साथ आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से व्यावहारिक समाधान प्रदान करने और बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग देने की भी अपील की। ‘विकसित भारत के लिए टेक्नोलॉजी, सुधार और वित्त’ विषय पर बजट के बाद आयोजित ‘वेबिनार’ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार, उद्योग और ज्ञान क्षेत्र से जुड़े लोग एक साथ आते हैं, तो सुधार परिणामों में परिवर्तित होते हैं और कागज पर की गई घोषणाएं जमीनी स्तर पर उपलब्धियों में तब्दील होती हैं।

सरकार ने इंफ्रा पर दिया जोर

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में इंफ्रा पर जोर दिया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 11 साल पहले दो लाख करोड़ रुपये था, जो केंद्रीय बजट 2026-27 में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये उच्च पूंजीगत व्यय आवंटन प्राइवेट सेक्टर के लिए नए उत्साह के साथ आगे आने का संकेत है। उन्होंने उद्योग से 2026-27 के बजट की सभी घोषणाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।

भारत ने पिछले 1 दशक में दिखाई असाधारण मजबूती

प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारतीय कंपनियों को नए निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार विश्वास बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने असाधारण मजबूती प्रदर्शित की है। ये संयोग से नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास-आधारित सुधारों के कारण संभव हुआ है। सरकार ने प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया है और कारोबार सुगमता को काफी आसान किया है।

पीएम मोदी ने दिया स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ विकसित करने का सुझाव

उन्होंने सुझाव दिया, ”हमें एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ विकसित करना चाहिए जिसमें सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग हो। ये चार्टर 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा।” बजट का मूल्यांकन अक्सर अलग-अलग मानकों पर किए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ”राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है। ये एक नीतिगत खाका है। इसलिए बजट की प्रभावशीलता का आकलन भी ठोस एवं सार्थक मानकों पर किया जाना चाहिए।”

 प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

नमस्कार !

इस साल के पहले Budget Webinar में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। बीते कुछ वर्षों में बजट वेबिनार, इसकी एक मजबूत परंपरा बन गई है। अक्सर बजट का आंकलन अलग-अलग पैरामीटर्स पर किया जाता है, कभी Stock Market की चाल पर बात होती है, कभी Income Tax प्रस्तावों पर चर्चा केंद्रित हो जाती है। सच्चाई ये है कि राष्ट्रीय बजट कोई short-term trading document नहीं होता, वह एक policy roadmap होता है। इसलिए बजट की प्रभावशीलता का आंकलन भी ठोस पैरामीटर्स पर किया जाना चाहिए। ऐसी नीतियां जो infrastructure का विस्तार करें, जो credit के प्रवाह को आसान बनाएं, जो Ease of Doing Business बढ़ाएं, जो governance में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाएं, जो जनता का जीवन आसान बनाएं, उनके लिए नए-नए अवसर बनाएं। बजट में इससे जुड़े निर्णय ही अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती देते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि किसी भी Budget को अलग-थलग, stand alone करके नहीं देखा जाना चाहिए। Nation Building, राष्ट्र निर्माण, यही एक निरंतर प्रक्रिया होती है। हर Budget एक बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक चरण होता है, और हमारे सामने वो बड़ा लक्ष्य है साल 2047, 2047 तक विकसित भारत का निर्माण। हर Reform, हर आवंटन, हर बदलाव को इस लंबी यात्रा के हिस्से के रूप में ही देखा जाना चाहिए। और इसलिए, हर साल बजट के बाद होने वाले ये वेबिनार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मेरी अपेक्षा है कि ये वेबिनार केवल Ideas के आदान-प्रदान तक सीमित न रहें, बल्कि एक प्रभावी brainstorming exercise बनें। आपके अनुभव और व्यावहारिक चुनौतियों पर आधारित सुझाव, आर्थिक रणनीतियों को और बेहतर बनाने और समाधान खोजने में अवश्य मदद करेंगे। जब Industry, Academia, Analysts और Policymakers मिल करके सोचते हैं, तो योजनाओं का implementation और बेहतर होता है, result और सटीक मिलते हैं। इन वेबिनार्स की सीरीज के पीछे यही एक भावना है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अगर आप स्वयं के विषय में सोचे, तो आपके जीवन का बहुत अच्छा, महत्वपूर्ण कालखंड बीत चुका है। अब हम देश की विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण समय में हैं। ये वो समय है, जब हमारी अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है, और साथ ही भारत पिछले एक दशक में, भारत ने असाधारण Resilience दिखाई है,  और ये संयोग से नहीं आई है, हमारी Resilience, Conviction-Driven Reforms की देन है। हमने Processes को सरल किया है, Ease of Doing Business को बेहतर बनाया है, Technology-Led Governance का विस्तार किया है, Institutions को मजबूत किया है, और आज भी ये देश Reform Express पर सवार है। इस Momentum को बनाए रखने के लिए हमें ना केवल पालिसी इंटेंट पर ध्यान देना है, बल्कि डिलीवरी एक्सीलेंस पर भी फोकस करना है। Reforms का मूल्यांकन घोषणा से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव से होना चाहिए। हमें AI, Blockchain और डेटा Analytics का व्यापक उपयोग कर Transparency, Speed और Accountability बढ़ानी ही होगी, और साथ ही Grievance Redressal Systems से Impact की निरंतर Monitoring भी करनी होगी।

साथियों,

पिछले एक दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारा बहुत फोकस रहा है। हमने सोच-समझकर ये फैसला किया कि भारत का विकास हाईवेज, Railways, Ports, डिजिटल नेटवर्क, Power Systems, ऐसे अनेक, ऐसे अनेक, अब जैसे ठोस Assets को तैयार करके ही होगा। ये आने वाले कई दशकों तक Productivity पैदा करते रहेंगे। इससे, और इसी वजह से Public Capital Expenditure लगातार बढ़ाया जा रहा है। 11 साल पहले Public Capex के लिए बजट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान था, मौजूदा बजट में ये बढ़कर लगभग 12 लाख करोड़ रुपए के पार हो गया है। इतने बड़े पैमाने पर सरकारी निवेश होना Private Sector के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है।

साथियों,

अब समय है कि Industry और Financial Institutions भी नई ऊर्जा के साथ आगे आएं।  हमें Infrastructure में ज्यादा भागीदारी चाहिए, Financing Models में ज्यादा Innovation चाहिए, और Emerging Sectors में ज्यादा मजबूत Collaboration चाहिए। इस दिशा में मेरा एक और सुझाव है, हमें Project Sanction Methodology और Appraisal Quality को और मजबूत करना होगा। हमें Cost-Benefit Analysis और Lifecycle Costing को सर्वोपरि रखते हुए Waste और Delays रोकने ही होंगे।

साथियों,

हम Foreign Investment Framework को और सरल कर रहे हैं। हमारा प्रयास सिस्टम को ज्यादा Predictable और Investor-Friendly बनाने का है। हम Long-Term Finance को बेहतर बनाने के लिए, Bond Markets को और ज्यादा सक्रिय बनाने की दिशा में भी कदम उठा रहे हैं। बॉन्ड की खरीद और बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।

साथियों,

हमें Bond Market Reforms को Long-Term Growth के Enablers के रूप में देखना होगा, हमें Predictability सुनिश्चित करनी होगी, Liquidity को गहरा करना होगा, नए Instruments लाने होंगे, और Risks का प्रभावी प्रबंधन करना होगा। तभी हम Sustained Foreign Capital आकर्षित कर पाएंगे। मुझे अपेक्षा है कि आप Global Best Practices से सीख लेकर, Foreign Investment Framework और Bond Markets को मजबूत करने के लिए स्पष्ट और ठोस सुझाव देंगे।

साथियों,

कोई भी Policy Framework तैयार कर सकती है, लेकिन उसकी सफलता आप सब पर निर्भर करती है। उद्योग जगत को Fresh Investment और Innovation के साथ आगे आना होगा। Financial Institutions और Analysts को Practical Solutions, Practical Solutions तैयार करने में मदद करनी होगी, और Market Confidence को मजबूत करना होगा। जब Government, Industry और Knowledge Partners एक साथ आगे बढ़ते हैं, तब Reforms Results में बदलते हैं। तभी Announcements जमीन पर Achievements बन जाते हैं। मेरा सुझाव है कि हम एक स्पष्ट Reform Partnership Charter विकसित करें। यह Government, Industry, Financial Institutions और Academia का साझा संकल्प हो। ये चार्टर, विकसित भारत की यात्रा का बहुत अहम दस्तावेज बनेगा।

साथियों,

मैं सभी Stakeholders, Financial Institutions, Markets, Industry, Professionals और Innovators से कहूंगा, इस बजट ने जो नए अवसर दिए हैं, उनका फायदा उठाएं, बजट द्वारा खोले गए नए अवसरों के साथ गहराई से जुड़ें। आपकी भागीदारी से योजनाओं का Implementation और बेहतर होगा, आपके फीडबैक और सहयोग से बेहतर नतीजे आएंगे। आइए, हम सब मिलकर Reform करें, Grow करें और ऐसा Future बनाएं, जो विकसित भारत का सपना जल्द से जल्द साकार हो।

मुझे पूरा विश्वास है, आज आप सब गहरा मंथन करेंगे, प्रक्रियाओं को सरल करने पर आपका ध्यान केंद्रित होगा और हम ये गलती ना करें,  बजट के पहले भी हम आप सबसे कंसल्टेशन करते हैं, उसका मकसद अलग है, उसका मकसद होता है बजट और अच्छा बने। लेकिन अब बजट बन चुका है, अब बजट की चर्चा के लिए कार्यक्रम नहीं है, अब बजट में जो है उसको जमीन पर जल्दी से जल्दी उतारना, सरल से सरल मार्ग से उतारना और सबका, सभी स्टेकहोल्डर का लाभ हो, उनकी भागीदारी हो, इस बात को ध्यान में रख करके आप चर्चा करेंगे, मंथन करेंगे, तो ये वेबिनार सचमुच में वाइब्रेंट इकोनॉमी का दरवाजा खोल देंगे।

बहुत-बहुत धन्यवाद !

नमस्कार !

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