भारतीय अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले से मजबूत !……………….

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अपनी ताजा रिपोर्ट में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को रेखांकित करते हुए यह संकेत देना कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले की अपेक्षया मजबूत हुई है, एक जटिल, किंतु आश्वस्तकारी आर्थिक वातावरण की ओर इशारा है। रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम एशिया में तनाव ने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 26 मार्च 2026, 09:05 AM 5 मिनट read
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भारतीय अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले से मजबूत !……………….
Photo: UB India News Archive

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अपनी ताजा रिपोर्ट में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को रेखांकित करते हुए यह संकेत देना कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी झटकों को सहन करने की क्षमता पहले की अपेक्षया मजबूत हुई है, एक जटिल, किंतु आश्वस्तकारी आर्थिक वातावरण की ओर इशारा है। रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम एशिया में तनाव ने वैश्विक ऊर्जा व वित्तीय बाजारों में स्वाभाविक ही अस्थिरता बढ़ा दी है।

कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की आपूर्ति में आई रुकावटों की गंभीरता इससे ही समझी जा सकती है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी वैश्विक तेल बाजार की तारीख में इसे सबसे बड़ा आपूर्ति-व्यवधान बता रही है। जाहिर है कि इन स्थितियों में शेयर बाजार कमजोर हो गए हैं और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर अवमूल्यन का दबाव भी बढ़ता दिख रहा है। भारत कच्चे तेल की अपनी कुल जरूरत का 85 फीसदी से अधिक और प्राकृतिक गैस की जरूरत का 40 फीसदी से अधिक आयात करता है। लिहाजा, इन स्थितियों का हम पर असर होना लाजिमी है।

लेकिन, इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। घरेलू मांग में मजबूती के चलते 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है। केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि शहरी व ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में उच्च खपत, रिकॉर्ड कृषि उत्पादन और मजबूत ऑटोमोबाइल बिक्री को देखते हुए आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के संकेत ही मिल रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कुछ चिंताएं जरूर जताई गई हैं, जो जनवरी की तुलना में फरवरी में बढ़ी तो है ही, ईंधन आपूर्ति में व्यवधान के चलते इसमें और बढ़ोतरी की आशंका भी पैदा हो गई है।

गनीमत है कि सरकारी खर्च पर नियंत्रण और केंद्रीय बैंक के उपायों की वजह से अर्थव्यवस्था फिलहाल पर्याप्त तरल बनी हुई है, लेकिन इस सच से भी आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं कि वित्तीय बाजार वैश्विक झटकों से अछूते नहीं रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो के बहिर्वाह के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है, तो व्यापार घाटे में बढ़ोतरी से देश का चालू खाता घाटा भी कुछ बढ़ा है। अच्छी बात यह है कि इन हालात में भी भारतीय रिजर्व बैंक साफ तौर पर कह रहा है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से बचाव के लिए पर्याप्त है, जो एक हद तक व्यापक आर्थिक स्थिरता का ही प्रमाण है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का संकेत यही है कि खतरे मौजूद हैं, लेकिन देश में उनसे निपटने की क्षमता भी विकसित हुई है। जरूरत इसकी है कि इस क्षमता को और मजबूत बनाया जाए, तभी भविष्य में हम एक अधिक स्थिर व आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाने जा सकेंगे।

भारत की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर क्या अनुमान?

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर ताजा अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निजी खपत, निवेश में सुधार और मजबूत निर्यात इस वृद्धि के प्रमुख आधार होंगे।

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से सरकार की सब्सिडी लागत बढ़ेगी, जिससे राजकोषीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को बढ़ाया

एसएंडपी ने 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 2026-27 के लिए अनुमान में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। एजेंसी का कहना है कि ऊंचे तेल दाम व्यापार घाटा बढ़ा सकते हैं, लेकिन सेवाओं के निर्यात में मजबूत अधिशेष से चालू खाता घाटा नियंत्रित रह सकता है।

महंगाई बढ़ने के अनुमान

महंगाई को लेकर एसएंडपी का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, हालांकि सरकार पूरी तरह से कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालेगी।

मौद्रिक नीति को लेकर क्या?

मौद्रिक नीति को लेकर एजेंसी का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और न्यूट्रल रुख बनाए रखेगा। लेकिन अगर ऊर्जा बाजार में व्यवधान ज्यादा गहरा और लंबा चलता है जैसे कि ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में 185 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है तो केंद्रीय बैंक को सख्ती करनी पड़ सकती है। ऐसे परिदृश्य में साल के दूसरे हिस्से में 25 आधार अंक की दर बढ़ोतरी संभव है।

एसएंडपी के बेसलाइन अनुमान के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में औसतन 92 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। रिपोर्ट यह भी मानकर चलती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान अप्रैल की शुरुआत तक रहेगा और उसके बाद आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होगी।

एसएंडपी ने यह भी कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मांग प्रभावित हो सकती है और सरकारों पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।

 

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