कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी …………………

यकीनन अल नीनो और कमजोर मानसून की चुनौतियों के बीच अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अधिकांश रिपोर्टें भारत की विकास दर पिछले वर्ष से कम रहने का अनुमान लगा रही हैं, पर 26 […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026, 01:05 AM 3 मिनट read
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कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी …………………
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यकीनन अल नीनो और कमजोर मानसून की चुनौतियों के बीच अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अधिकांश रिपोर्टें भारत की विकास दर पिछले वर्ष से कम रहने का अनुमान लगा रही हैं, पर 26 जून को प्रकाशित गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कम कीमतों और नए आर्थिक उपायों के दम पर भारत 6.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है। चूंकि, भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, अत: सस्ते कच्चे तेल से उसे कई लाभ होंगे। महंगाई नियंत्रित होगी, देश का आयात बिल कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी और रुपया भी मजबूत होगा। साथ ही, सरकारी तेल कंपनियों पर यह भी दबाव होगा कि वह कच्चे तेल की कम होती कीमत का कुछ फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाए।

हाल ही में, जारी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की रिपोर्ट और भारतीय रिजर्व बैंक, दोनों ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं, विश्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में वैश्विक विकास दर घटकर 2.5 प्रतिशत रह जाएगी, जबकि भारत 6.6 प्रतिशत विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा। वैश्विक आर्थिक झटकों के बीच सरकार तेजी से रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्रों के साथ संरचनात्मक सुधारों को गति देते हुए अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रही है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के सामने भी आर्थिक चुनौतियां और बढ़ेंगी, अतएव भारत को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए उपाय भी करने होंगे।

सरकार को ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार के लिए प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना होगा। कच्चे तेल की घटी कीमत, व्यापार समझौतों, नए श्रम कानूनों और बजट प्रावधानों को देश की आर्थिक शक्ति बनाते हुए देश की विकास दर को सात प्रतिशत से अधिक स्तर पर पहुंचाने के प्रयास करने होंगे। हाल ही में, भारत व अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता हुई, जबकि ओमान, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और एफ्टा देशों के साथ हुए समझौते व्यापार व निवेश को गति देंगे।  नए श्रम कानून भारत के घरेलू बाजार को मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं। ये कानून सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम और समय पर मजदूरी का भुगतान, सुरक्षित कार्यस्थल और नारी व युवा शक्ति के लिए लाभकारी अवसरों के रूप में एक मजबूत नींव के रूप में काम करेंगे।

उम्मीद करें कि सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में अर्थव्यवस्था के समक्ष दिखाई दे रही कमजोर मानसून, सूखे की आशंका, महंगाई, मांग में कमी तथा सख्त वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के लिए आगे बढ़ेगी। साथ ही, अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार विनिवेश लक्ष्य, एफडीआई बढ़ाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को प्रोत्साहन और व्यापार समझौतों के प्रभावी क्रियान्वयन पर तेजी से काम करेगी। सरकार सस्ते ईंधन, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण व बुनियादी ढांचे के आधार पर चालू वित्त वर्ष में सात प्रतिशत से अधिक की विकास दर प्राप्त करने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ेगी।

 

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