कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार के झंडू कुमार का दिखा दम……………..

राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो 2026) की पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में बिहार के लाल झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश, प्रदेश और अपने गृह क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल बिहार और नालंदा बल्कि पूरे देश में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 25 जुलाई 2026, 05:44 AM 6 मिनट read
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कॉमनवेल्थ गेम्स में बिहार के झंडू कुमार का दिखा दम……………..
Photo: UB India News Archive

राष्ट्रमंडल खेल (ग्लासगो 2026) की पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में बिहार के लाल झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश, प्रदेश और अपने गृह क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल बिहार और नालंदा बल्कि पूरे देश में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने अपने अद्भुत साहस, कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर यह सफलता हासिल की है। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो तो शारीरिक चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। उनकी यह उपलब्धि दिव्यांग खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

रोमांचक मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर भारत को दिलाया कांस्य पदक
ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स की मेंस हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। बेहद कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131.0 अंक के साथ रजत पदक अपने नाम किया। भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे बिहार के झंडू कुमार ने 130.9 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया और देश की झोली में कांस्य पदक डाला। स्वर्ण और रजत पदक से मामूली अंतर से चूकने के बावजूद उनका यह कांस्य पदक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।

परिवार में जश्न, रातभर जागकर देखते रहे मुकाबला

झंडू कुमार की सफलता से उनके पैतृक गांव में जश्न का माहौल है। ग्रामीण और शुभचिंतक लगातार उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दे रहे हैं। झंडू के पिता रामानंद पासवान ने भावुक होकर बताया कि वे पूरी रात सो नहीं पाए और मोबाइल पर बेटे का मुकाबला देखते रहे। उन्होंने कहा कि बेटे की जीत उनके जीवन का सबसे गर्व का पल है। झंडू के भाई कुंदन कुमार ने बताया कि पूरा परिवार रात नौ बजे से ही मुकाबला देख रहा था। उन्होंने कहा कि तनाव और रोमांच के बीच मोबाइल की बैटरी भी लगभग खत्म होने वाली थी, लेकिन जैसे ही झंडू ने पदक जीता, पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कामना की कि झंडू आगे भी देश के लिए ऐसे ही पदक जीतते रहें। माता कमला देवी ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने बेटे को तिरंगा लहराने और देश का नाम रोशन करने का आशीर्वाद दिया था। आज उनका सपना साकार हो गया।

संघर्षों के बीच सरकारी सहायता नहीं मिलने का दर्द
एक ओर जहां झंडू कुमार की उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है, वहीं उनके परिवार ने सरकारी सहायता नहीं मिलने की पीड़ा भी साझा की। पिता रामानंद पासवान ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए परिवार को किसी प्रकार की सरकारी आर्थिक सहायता या स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आज तक उन्हें इंदिरा आवास योजना या प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बुनियादी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पाया। नगर पंचायत स्तर पर आश्वासन जरूर मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं पहुंची। इसके बावजूद झंडू ने अपने संघर्ष, मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर यह मुकाम हासिल किया।

खेल जगत ने दी बधाई
झंडू कुमार की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल जगत में खुशी की लहर है। नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव एवं कोच कुंदन कुमार पांडे, बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार, नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, हरनौत के खेलप्रेमियों, नालंदा जिले के नागरिकों और बिहार के विभिन्न खेल संगठनों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने विश्वास जताया कि झंडू कुमार भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए स्वर्णिम सफलता हासिल करेंगे और विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद करेंगे।

रात भर जगलीईओ और देखलियो

कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने। मुकाबले से कुछ देर पहले व्हाट्सऐप कॉल पर मां ने बेटे से कहा, ‘बेटा, जब वहां तक पहुंच ही गए हो, तो देश का तिरंगा फहरा कर आना। पहला, दूसरा और तीसरा स्थान में से कोई भी स्थान लेकर आना।’

मेडल जीतने के बाद झंडू ने सबसे पहले मां को फोन किया और कहा, ‘तोहनी के आर्शीवाद से जीत गई लो मइया।’(मां, आप सभी के आशीर्वाद से मैं मेडल जीत गया।)

झंडू के बड़े भाई कुंदन कुमार ने बताया कि चार भाइयों में झंडू सबसे छोटे हैं। एक भाई का निधन हो चुका है। मुकाबले से पहले शुक्रवार रात करीब 8 बजे झंडू ने घर पर फोन किया था। परिवार के सभी लोगों ने उन्हें “विजय भव” कहकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद उन्होंने मां से बात की। मां ने कहा, ‘जब वहां तक पहुंच गए हो, तो झंडा फहरा कर ही आना और पहला, दूसरा, तीसरा स्थान ले आना।’

मां कमला देवी ने  कहा, ‘रात भर जगलीईओ और देखलियो बाबू ने देश का नाम रोशन कईलन।’ (रात भर जागकर उनका मुकाबला देखा। झंडू को देश का नाम रोशन करते देखा।)

उन्होंने बताया, ‘जीतने के बाद झंडू ने कहा- जीत गईलियो मइया। उससे पहले भी आर्शीवाद लेवे खातिर फोन कईले रहलन। तब हम कहनी कि झंडा फहराकर आना।’ नाम को लेकर उन्होंने बताया कि उनका नाम झुन्नू रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे सभी लोग उन्हें झंडू कहने लगे।

सुबह बाजार पहुंचे तो लोगों ने दी बधाई

कुंदन बताते हैं कि सुबह जब वह सब्जी की दुकान जा रहे थे, तब रास्ते में मिलने वाले लोग रोक-रोककर बधाई दे रहे थे। जो लोग पहले उन्हें झंडूवा कहकर बुलाते थे, वही अब कह रहे थे, ‘झंडू जी की जीत पर बधाई।’ लगातार फोन भी आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि झंडू पहले मां-पिता के साथ सब्जी की दुकान पर हाथ बंटाते थे। बाद में उन्होंने जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे पावरलिफ्टिंग में रुचि बढ़ती गई। परिवार ने कभी उन्हें रोका नहीं, बल्कि हर कदम पर पूरा साथ दिया।

पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे

झंडू हरनौत के सबनौह डीह गांव के रहने वाले हैं। चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। वह दिव्यांग हैं। चार साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे कमर के नीचे शरीर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। मां-पिता हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पूरा परिवार किराए के एक कमरे में रहता है। झंडू पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे। इसके बावजूद वह खेल के लिए समय निकालते रहे।

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