‘एक देश एक चुनाव’ विधेयक लोकसभा में कल होगा पेश, BJP ने लोकसभा सांसदों को जारी किया व्हिप

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में अपने सांसदों को उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी की ओर से यह व्हिप मंगलवार के लिए जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल कल लोकसभा में पेश किया जा सकता है। पार्टी ने कल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 16 दिसंबर 2024, 07:20 AM 5 मिनट read
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‘एक देश एक चुनाव’ विधेयक लोकसभा में कल होगा पेश, BJP ने लोकसभा सांसदों को जारी किया व्हिप
Photo: UB India News Archive

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में अपने सांसदों को उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी की ओर से यह व्हिप मंगलवार के लिए जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल कल लोकसभा में पेश किया जा सकता है। पार्टी ने कल अपने सभी सांसदों को अनिवार्य रूप से सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। पहले यह चर्चा थी कि सरकार आज यानी सोमवार को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का बिल लोकसभा में पेश करेगी, लेकिन किसी कारणों की वजह से टाल दिया गया।

 

लोकसभा में मंगलवार को यानी 17 दिसंबर को एक देश एक चुनाव को लेकर 129वां संविधान संशोधन बिल पेश हो सकता है. विस्तृत चर्चा और सहमति बनाने के लिए बिल को जेपीसी में भेजा जाएगा. कल ही जेपीसी का गठन हो जाएगा जिसमें बीजेपी और कांग्रेस समेत तमाम दलों के सदस्यों के नाम का ऐलान भी होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विधेयक को चर्चा के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा जा सकता है। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024, जिसे एक देश, एक चुनाव विधेयक कहा जा रहा है, उसे केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पेश करेंगे।

जेपीसी को भेजा जाएगा
लोकसभा में विधेयक को पेश करने के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील कर सकते हैं कि विधेयक को विस्तृत चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया जाए। चर्चा के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्षी सांसदों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को इस समिति की अध्यक्षता मिलेगी। संयुक्त समिति में विभिन्न दलों के सांसदों की संख्या को आनुपातिक आधार पर तय किया जाएगा।

90 दिन का रहेगा जेपीसी का कार्यकाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश किए जाने के समय निचले सदन में मौजूद रह सकते हैं। पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का फैसला किया था। लोकसभा अध्यक्ष विधेयक पेश किए जाने वाले दिन ही उसे दिन जेपीसी को भेज सकते हैं। शुरू में, प्रस्तावित समिति (जेपीसी) का कार्यकाल 90 दिनों का होगा, लेकिन बाद में इसे बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए दो विधेयकों को मंजूरी दे दी है।

बिल में क्या प्रस्ताव है?

संसद का शीतकालीन सत्र 25 नवंबर को शुरू हुआ था और यह 20 दिसंबर को समाप्त होगा. पीएम मोदी की कैबिनेट ने वन नेशनल वन इलेक्शन बिल को 12 दिसंबर को मंजूरी दी थी. इस विधेयक में 2034 के बाद एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव है. साथ ही सरकार ने बिल का मसौदा लोकसभा सदस्यों को भेज दिया है.

वन नेशन वन इलेक्शन बिल के जरिए संविधान में दो मुख्य बदलाव किए जाने हैं. इससे 129वां संविधान संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानून में बदलाव होगा. एक देश एक चुनाव से जुड़े जो दो बिल सरकार लाने जा रही है, उनका नाम केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2024 और संविधान (129वां) विधेयक 2024 है.

क्या बदलाव किए जाएंगे?

इस बिल को पेश करके सरकार संविधान के चार अनुच्छेद में बदलाव का प्रस्ताव रखेगी. अनुच्छेद 82ए, 83, 172 और 327 हैं में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा. इस के तहत अनुच्छेद 82ए संविधान संशोधन विधेयक में एक नया आर्टिकल (लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव के लिए एक साथ चुनाव) शामिल करना और आर्टिकल 83 (संसद के सदनों का कार्यकाल), आर्टिकल 172 (राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल) और आर्टिकल 327 (संशोधन का प्रस्ताव) में संशोधन करना शामिल है. संविधान के आर्टिकल 327 में निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन शब्दों को एक साथ चुनाव कराना शब्दों से बदल दिया जाएगा.

पहले भी कराए जाते थे एक साथ चुनाव

देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में इस बिल को लेकर एक समिति बनी थी. देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में इस बिल को लेकर एक समिति बनी थी. देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक समिति बनाई गई थी. समिति ने पूरे देश भर में एक साथ चुनाव कराने के लिए 14 मार्च, 2024 को राष्ट्रपति को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं.

सरकार ने कहा कि साल 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के आम चुनाव एक साथ हुए थे. हालांकि, 1968 और 1969 में कुछ विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के चलते लोकसभा के एक साथ चुनाव कराने की प्रक्रिया बाधित हो गई थी और अलग-अलग चुनाव कराए जाने लगे.

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