उनके धोखों की फेहरिस्त इतनी लंबी हो चुकी है कि इस प्रेसवार्ता में उसे समेटना मुमकिन नहीं …..

बाबा साहेब अंबेडकर को लेकर देश का सियासी पारा हाई है. दिल्ली हो या बिहार… हर जगह अंबेडकर के मुद्दे पर रार है. अंबेडकर के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष में खींचतान है. कभी भाजपा विपक्ष पर हमलावर है तो कभी विपक्ष सत्ता पक्ष पर अंबेडकर के अपमान का आरोप लगा रहा है. अंबेडकर के नाम पर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 25 दिसंबर 2024, 05:53 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
उनके धोखों की फेहरिस्त इतनी लंबी हो चुकी है कि इस प्रेसवार्ता में उसे समेटना मुमकिन नहीं …..
Photo: UB India News Archive

बाबा साहेब अंबेडकर को लेकर देश का सियासी पारा हाई है. दिल्ली हो या बिहार… हर जगह अंबेडकर के मुद्दे पर रार है. अंबेडकर के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष में खींचतान है. कभी भाजपा विपक्ष पर हमलावर है तो कभी विपक्ष सत्ता पक्ष पर अंबेडकर के अपमान का आरोप लगा रहा है. अंबेडकर के नाम पर सियासी संग्राम के फ्रेम में अब नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल आ गए हैं. अरदिंव केजरीवाल ने बीते दिनों नीतीश कुमार को चिट्ठी लिखी थी. इसके जवाब में जदयू ने केजरीवाल को दगाबाज और धोखेबाज का तमगा मिल गया. जदयू ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजरीवाल को खूब सुनाया.

सबसे पहले जानते हैं कि आखिर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने केजरीवाल को क्या-क्या कहा है. जदयू नेता संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू ने अरविंद केजरीवाल पर खूब हमले किए और बिहारियों और पूर्वांचल के लोगों से धोखेबाजी और दगाबाजी करने का आरोप लगाया. ललन सिंह ने कहा, ‘अंबेडकर पर नीतीश कुमार को केजरीवाल ने पत्र लिखा है. केजरीवाल से नीतीश कुमार को नैतिकता सीखने की जरूरत है? अंबेडकर को कितना जानते हैं केजरीवाल? अन्ना हजारे को तो पहचाना नहीं, अंबेडकर जी को कितना जानेंगे? वहीं, संजय झा ने कहा, आज तक किसी एक दलित को केजरीवाल ने राज्यसभा में भेजा? केजरीवाल के सोशल मीडिया के नवरत्न में एक भी पिछड़ा और दलित नहीं है.’

अरविंद केजरीवाल पर बरसी जदयू
संजय कुमार झा ने कहा, ‘मैं ही नहीं, अब तो पूरी दिल्ली मानती है कि राजनीति को बदलने के नाम पर अरविंद केजरीवाल ने लोगों के साथ केवल धोखा किया है. दिल्ली के हालात बदतर हैं. इनकी राजनीति चमक रही है. उनके धोखों की फेहरिस्त इतनी लंबी हो चुकी है कि इस प्रेसवार्ता में उसे समेटना मुमकिन नहीं है. दिल्ली में बिहार और पूर्वांचल के लाखों साथी रहते हैं. दिल्ली को बनाने में, बढ़ाने में और चलाने में हमारे बिहार और पूर्वांचल के साथियों का योगदान अहम है. केजरीवाल जी ने हमारे बिहार और पूर्वांचल के साथियों को खूब ठगा है. आज दिल्ली में कोई अगर सबसे बदतर जिंदगी जी रहा है, तो वह हमारे बिहार और पूर्वांचल के साथी हैं. केजरीवाल जी बिहार और पूर्वांचल के लोगों से नफरत करते हैं.’

केजरीवाल को जदयू ने क्यों घेरा
अब सवाल है कि आखिर नीतीश की जदयू ने अरविंद केजरीवाल को लपेटा क्यों है. इसकी वजह है कि नीतीश कुमार को लिखा गया अरविंद केजरीवाल का वह खत. जी हां, पिछले सप्ताह अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार को एक चिट्ठी लिखी थी. यह चिट्ठी अंबेडकर विवाद पर था. अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि गृहमंत्री अमित शाह के अंबेडकर वाले बयान पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ बोलें. केजरीवाल चाहते थे कि विपक्ष के नेताओं की तरह वह भी अपनी राय रखें. कुल मिलाकर अरविंद केजरीवाल अंबेडकर मसले पर नीतीश को धर्मसंकट में डालना चाहते थे. तभी केजरीवाल ने अपने खत में लिखा था कि बाबा साहेब को चाहने वाले अब बीजेपी का समर्थन नहीं कर सकते. उसी खत का जवाब जदयू ने पीसी करके दिया.

यहां यह जानना दिलचस्प है कि नीतीश कुमार वह शख्स हैं, जिन्होंने कोटा में कोटा बनाकर दलित और महादलित को अलग कैटेगरी में बांटा था. वह दलितों के हिमायती माने जाते हैं. उन्होंने दलितों में भी सबसे गरीब तबके को ऊपर उठाने के लिए महादलित का तमगा दिया. साथ ही महादलितों के लिए कई योजनाएं बनाईं और उन्हें अलग से सुविधाएं भी दीं. अरविंद केजरीवाल भी इस बात को अच्छे से जानते हैं. यही वजह है कि उन्होंने अमित शाह के बयान के बहाने गुगली फेंकी थी. मगर नीतीश कुमार सियासत के बड़े माहिर खिलाड़ी हैं. उन्होंने केजरीवाल की गुगली को पहचान लिया. उन्होंने कुछ बोला तो नहीं, मगर उनकी पार्टी ने केजरीवाल को अच्छे से सुना दिया. गौरतलब है कि बिहार और दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं.

कहां से शुरू हुआ अंबेडकर के नाम पर संग्राम
दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी समय में अंबेडकर का मुद्दा गरमाया था. केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं पर जमकर हमला बोलते हुए अंबेडकर का जिक्र किया था. उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेकर कहा था कि अभी एक फैशन हो गया है, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर…, इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिलता. अमित शाह के इसी बयान के बाद से देश की सियासत गरमा गई. कांग्रेस ने तो माफी और इस्तीफे की मांग कर दी. बसपा ने भी देशव्यापी प्रदर्शन किया. वहीं अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से विचार करने को कहा.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰