आरिफ मोहम्मद खान बने बिहार के नये राज्यपाल

बिहार के नए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif mohammad khan) बनाए गए हैं. केंद्र सरकार ने बिहार समेत पांच राज्यों के राज्यपालों को बदला है. बिहार के राज्यपाल (Bihar new governor) राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को केरल का राज्यपाल बनाया गया है जबकि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को बिहार का राज्यपाल बनाया गया. राष्ट्रपति […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 25 दिसंबर 2024, 06:46 AM 7 मिनट read
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आरिफ मोहम्मद खान बने बिहार के नये राज्यपाल
Photo: UB India News Archive

बिहार के नए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif mohammad khan) बनाए गए हैं. केंद्र सरकार ने बिहार समेत पांच राज्यों के राज्यपालों को बदला है. बिहार के राज्यपाल (Bihar new governor) राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को केरल का राज्यपाल बनाया गया है जबकि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को बिहार का राज्यपाल बनाया गया. राष्ट्रपति ने पांच नए राज्यपालों की नियुक्ति की है. बिहार के नए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान कभी केंद्र सरकार में नीतीश कुमार के साथ कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं.

नीतीश कुमार के साथ कैबिनेट में रहे मंत्री
बिहार के नए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान कभी वीपी सिंह की सरकार में बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ कैबिनेट के सदस्य रहे. यानी दोनों एकसाथ सरकार में मंत्री थे. वीपी सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस से जो सीनियर नेता बाहर निकले, उनमें एक प्रमुख नाम आरिफ मोहम्मद खान का भी था. आरिफ मोहम्मद खान की राजनीति में एंट्री अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष बनने से हुई थी. 1977 में वो बुलंदशहर के सियाना विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने और यूपी सरकार में मंत्री बने थे.

केसी त्यागी ने आरिफ मोहम्मद खान के बारे में बताया…
1978 में जनता पार्टी से नाराज होकर उन्होंने पार्टी का दामन छोड़ दिया था. इससे पहले 1974 में चौधरी चरण सिंह के लोकदल में युथ बिग्रेड के अध्यक्ष भी आरिफ मोहम्मद खान बनाए गए थे. उनके हमउम्र पूर्व सांसद जदयू नेता केसी त्यागी बताते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान तब युवा लोकदल के अध्यक्ष और महामंत्री बने थे. जब लोकदल का गठन हुआ था तो बिहार से कर्पूरी ठाकुर, यूपी से राजनारायण और पीलू मोदी ने चौधरी चरण सिंह का साथ दिया था. आरिफ मोहम्मद खान तक पीलू मोदी की स्वतंत्र पार्टी के सदस्य थे.

राजीव गांधी की कोर टीम में रहे आरिफ मोहम्मद खान
केसी त्यागी बताते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान 1980 में कानपुर से सांसद बने. राजीव गांधी की कोर टीम के भी वो सदस्य थे. लेकिन शाहबानो केस में उनके विचार कांग्रेस से अलग थे. केसी त्यागी बताते हैं कि शाहबानो केस में आरिफ मोहम्मद खान अगुवा की भूमिका में ही थे. 1989 में आरिफ मोहम्मद खान बुलंदशहर से जबकि केसी त्यागी गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे.

अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले खान को बिहार का राज्यपाल बनाने के पीछे भाजपा की सधी हुई रणनीति है। जानकार मानते हैं कि इससे भाजपा की प्रोग्रेसिव राजनीति को फायदा होगा। मुस्लिम तबके में अग्रेसिव वोटिंग को कंट्रोल किया जा सकता है। खान कांग्रेस, बसपा से होते हुए 2004 में भाजपा में शामिल हुए थे।

शाहबानो केस में राजीव गांधी का विरोध कर इस्तीफा तक दिया

शाहबानो केस में आरिफ मोहम्मद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था। लेकिन, राजीव गांधी ने कानून लाकर फैसले को पलट दिया था। इसका संसद में आरिफ मोहम्मद ने जमकर विरोध किया था और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। शाहबानो मध्यप्रदेश के इंदौर की एक मुस्लिम महिला थीं। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के मामले में उनके पति को हर्जाना देने का आदेश दिया था, लेकिन राजीव गांधी ने संसद के ज़रिए इस फैसले को पलट दिया था।

राजीव गांधी पर आरोप लगा कि शाहबानो मामले में उन्होंने मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेक दिए थे। एक इंटरव्यू में आरिफ मोहम्मद खान ने बताया था- सरकार से इस्तीफा देकर मैं अपने घर नहीं गया, किसी दोस्त के यहां चला गया ताकि कोई मुझे संपर्क नहीं कर सके। अगले दिन मैं संसद गया तो कांग्रेस के कुछ नेता मुझे समझाने आए। सबसे आखिर में नरसिम्हा राव आए और कहा कि तुम इतना अच्छा बोलते हो, लेकिन जिद्दी बहुत हो।’

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नरसिम्हा राव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मुसलमानों का सामाजिक सुधार करने के लिए नहीं है और न ही तुम हो, इसलिए तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। अगर कोई गटर में पड़े रहना चाहता है तो रहने दो। -आरिफ मोहम्मद खान, एक इंटरव्यू में

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क्यों आरिफ को पसंद करती है बीजेपी, जानिए

“मैं आरिफ मोहम्मद खान को सभी की तरफ से बधाई देना चाहता हूं, जो मुसलमान होकर भी तीन तलाक के खिलाफ बोलते रहे। एक अकेला बंदा राजीव गांधी सरकार के फैसले के खिलाफ खड़ा रहा। आज भी वो तीन तलाक पर मुखर होकर बोलते रहते हैं।”‘

18 अगस्त 2019 को अमित शाह ने दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में यह बयान दिया और इसके कुछ सप्ताह के अंदर सितंबर 2019 में खान को केरल का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया।

क़ुरान एंड कंटेम्पोरेरी चैलेंजेज नामक किताब लिख चुके आरिफ के बयानों के ज़रिए भाजपा ने कई मौकों पर यह जताने की कोशिश की कि तीन तलाक का कानून मुस्लिमों के खिलाफ नहीं बल्कि मुस्लिमों के हित में है। उनको बीजेपी में पसंद करने के पीछे उनका कांग्रेस पर कड़ा प्रहार और मजहबी कट्टरता पर तर्कों से हमला करने की स्टाइल है।

भाजपा को लगता है कि खान एक प्रगतिशील चेहरा हैं। उनके बयान पार्टी की राजनीति के फ़ेवर में जाते हैं। उन्हें साथ जोड़कर मुस्लिम विरोधी छवि को खत्म किया जा सकता है। आरिफ को बिहार भेजकर बीजेपी संदेश देना चाहती है कि वह राष्ट्रवादी और प्रगतिशील मुस्लिम चेहरों को आगे बढ़ाने की पक्षधर है। साथ ही इससे सीएम नीतीश कुमार को भी साधा जा सकता है।

खान ने कहा था- मिथिला बिना अयोध्या पूरा नहीं

इसी साल फरवरी में दरभंगा आए खान को मखाने की माला, पाग और मधुबनी पेंटिंग से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा था- पूरे राष्ट्र में उत्सव और खुशी का माहौल है। अयोध्या में राम प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की कल्पना मिथिला के बगैर नहीं की जा सकती है। भारत की पहचान ही ज्ञान है। एक तरह से देखें तो मिथिला और भारत की पहचान ही ज्ञान है।

CM योगी के बंटोगे तो कटोगे बयान का किया था समर्थन

एक महीना पहले भोपाल में आरिफ मोहम्मद खान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बंटोगे तो कटोगे’ बयान का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, ‘एकता का भाव सभी में होना ही चाहिए। इसमें कोई खास बात नहीं हैं। यह गलत भी नहीं है।’

मदरसा दारुल उलूम देवबंद द्वारा मुसलमानों के लिए अंगदान को अवैध बताने वाले फतवे से जुड़े सवाल पर ने कहा, ‘मुझे न इन पर विश्वास है, न ही कुछ कहना है।’

सुप्रीम कोर्ट तक गई केरल सरकार

तत्कालीन राज्यपाल खान के खिलाफ केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। विजयन सरकार ने गवर्नर पर आरोप लगाया था कि वे उनके कई बिलों को मंजूरी नहीं दे रहे, जबकि इन बिलों को विधानसभा पास कर चुकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2023 को गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान के ऑफिस को नोटिस दिया था।

केरल में मुख्यमंत्री से भिड़े थे

केरल में राज्यपाल रहने के दौरान आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आपस में भिड़ते रहे हैं। एक बार गवर्नर खान ने आरोप लगाया कि राज्य में स्मगलिंग करने वालों को CM ऑफिस से संरक्षण मिल रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा था- मुझ पर मुख्यमंत्री आरोप लगा रहे हैं कि मैं विश्वविद्यालय के पदों पर RSS के लोगों की भर्ती करना चाहता हूं। अगर एक भी ऐसा उदाहरण मिलता है तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।

विरोध के कारण बढ़ी थी सुरक्षा

केरल में इस साल जनवरी में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को विरोध का सामना करना पड़ा था। वे अपनी कार में सवार होकर सड़क मार्ग से निकले थे। लेकिन, बड़ी संख्या में छात्र उनकी कार के सामने आ गए थे। काला झंडा दिखाया था। इसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। राज्यपाल के साथ केरल राजभवन की भी सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

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