फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को संसदीय समिती का जा सकता है समन……

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग के बयानों ने उनकी कंपनी मेटा को मुश्किल में डाल दिया है। संसद की एक समिति ने मेटा को तलब करने का मन बनाया है जो सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक की पैरेंट कंपनी है। मामला 2024 के लोकसभा चुनाव पर जकरबर्ग की टिप्पणी से जुड़ा है। बीजेपी सांसद और सूचना […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 14 जनवरी 2025, 10:38 AM 4 मिनट read
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फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को संसदीय समिती का जा सकता है समन……
Photo: UB India News Archive

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग के बयानों ने उनकी कंपनी मेटा को मुश्किल में डाल दिया है। संसद की एक समिति ने मेटा को तलब करने का मन बनाया है जो सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक की पैरेंट कंपनी है। मामला 2024 के लोकसभा चुनाव पर जकरबर्ग की टिप्पणी से जुड़ा है। बीजेपी सांसद और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा को अफवाह फैलाने के आरोप में बुलाया जाएगा।

जकरबर्ग का झूठ जानिए

40 वर्षीय जकरबर्ग ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि दुनियाभर में 2024 के चुनावों में सत्ताधारी पार्टियों को हार का सामना करना पड़ा, जिसमें भारत भी शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जकरबर्ग के इस दावे का खंडन किया। उन्होंने कहा कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। दुबे ने कहा कि मेटा को संसद और जनता से माफी मांगनी होगी।

पॉडकास्ट में जकरबर्ग ने दी थी गलत सूचना

जकरबर्ग ने 10 जनवरी को एक पॉडकास्ट में कहा कि कोविड महामारी के कारण दुनियाभर में सत्ताधारी सरकारों के प्रति विश्वास कम हुआ है। उन्होंने इस संबंध में भारत का उदाहरण गलत तरीके से दिया। जकरबर्ग ने कहा, ‘2024 दुनियाभर में एक बहुत बड़ा चुनावी वर्ष था और कई देशों में चुनाव हुए थे। सत्ताधारी पार्टियां मूल रूप से हरेक चुनाव हार गईं। यह एक तरह की वैश्विक घटना है, चाहे वह महंगाई के कारण हो या कोविड से निपटने के लिए आर्थिक नीतियों के कारण या सिर्फ सरकारों ने कोविड से कैसे निपटा, इसके कारण। ऐसा लगता है कि इसका वैश्विक प्रभाव पड़ा है।’

अश्विनी वैष्णव ने जकबर्ग को दिखाया आईना

इसके तुरंत बाद, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जकरबर्ग की टिप्पणी का फैक्ट चेक किया और कहा कि भारत के लोगों ने पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में अपना विश्वास फिर से जताया है। मोदी 3.0 सरकार में रेलवे, सूचना और प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों को संभालने वाले वैष्णव ने अपनी एक एक्स पोस्ट में कहा, ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत ने 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ 2024 के चुनाव संपन्न कराए। भारत के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए में अपना विश्वास फिर से जताया। जकरबर्ग का यह दावा कि 2024 के चुनावों में भारत सहित अधिकांश सत्ताधारी सरकारें कोविड के बाद हार गईं, तथ्यात्मक रूप से गलत है।’

कोविड पर जकरबर्ग का एजेंडा ध्वस्त

उन्होंने आगे कहा, ‘कोविड के दौरान 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त भोजन, 2.2 अरब मुफ्त टीके और दुनियाभर के देशों को सहायता से लेकर भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाने तक, प्रधानमंत्री मोदी की निर्णायक तीसरी बार की जीत सुशासन और जनता के विश्वास का प्रमाण है। मेटा और खुद जकरबर्ग से गलत सूचना दिया जाना निराशाजनक है। आइए तथ्यों और विश्वसनीयता को बनाए रखें।’

तीसरी बार सत्ता में लौटी बीजेपी

2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करने वाली बीजेपी को 2024 के आम चुनाव में कुछ झटके लगे और वह बहुमत के निशान से नीचे रही। हालांकि, गठबंधन दल के साथियों के साथ बीजेपी ने सत्ता कायम रखी। कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट विपक्ष ने बढ़त बनाई, लेकिन बाजी पलटने के लिए आवश्यक संख्या से काफी कम रही। मोदी 3.0 के साथ, प्रधानमंत्री मोदी जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार शीर्ष पद पाने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। दुबे ने एक एक्स पोस्ट में कहा, ‘एक लोकतांत्रिक देश के बारे में गलत सूचना उसकी (मेटा की) छवि खराब करती है। उसे इस गलती के लिए संसद और यहां के लोगों से माफी मांगनी होगी।’

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