दिल्‍ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को झटका , बंट गई सुप्रीम कोर्ट की पीठ

एआईएमआईएम उम्मीदवार और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने ताहिर हुसैन की दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के लिए अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर अलग-अलग आदेश दिया। न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने ताहिर को अंतरिम जमानत देने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 22 जनवरी 2025, 10:51 AM 4 मिनट read
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दिल्‍ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को झटका , बंट गई सुप्रीम कोर्ट की पीठ
Photo: UB India News Archive

एआईएमआईएम उम्मीदवार और दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने ताहिर हुसैन की दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के लिए अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर अलग-अलग आदेश दिया। न्यायमूर्ति पंकज मिथल ने ताहिर को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने उन्हें दिल्ली चुनाव के लिए प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दे दी।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ
जस्टिस पंकज मित्तल ने अपने आदेश में कहा कि ‘ताहिर हुसैन की दंगे में अहम भूमिका थी। उसने दंगे के दौरान कमांड सेंटर की तरह काम किया। उसके घर से हथियार बरामद किए गए।’ वहीं जस्टिस अमानुल्लाह ने अपने आदेश में कहा कि ‘ताहिर हुसैन बीते पांच साल से जेल में बंद है और समाज और मतदाताओं से कटा हुआ है। ऐसे में अब चुनाव में जितने भी दिन बचे हैं, उसे प्रचार की मंजूरी दी जानी चाहिए।’ जस्टिस अमानुल्लाह ने ये भी कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को नामांकन के लिए कस्टडी पैरोल दी थी। उच्च न्यायालय को इस मामले को सुलझाना चाहिए। ताहिर हुसैन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ‘आरोपी चुनाव प्रचार के दौरान गवाहों को प्रभावित कर सकता है।’ उन्होंने कहा कि ताहिर हुसैन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आरोपी है और उस मामले में उसे जमानत नहीं मिल सकती। ऐसे में वह जेल से बाहर नहीं आ पाएगा।

असददुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के लिए ताहिर हुसैन को अपना प्रत्‍याशी बनाया है. ऐसे में चुनाव प्रचार में हिस्‍सा लेने के लिए दिल्‍ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन ने अंतरिम जमानत मांगी थी. बुधवार को उनकी याचिका पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्‍लाह और जस्टिस पंकज मिठल की पीठ ने सुनवाई की. ताहिर हुसैन को अंतरिम जमानत देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों ने अलग-अलग फैसला दिया. मतबल यह कि ताहिर की जमानत याचिका पर फैसला 1-1 का रहा. ऐसे में अब इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्‍ना के पास भेज दिया गया है. सीजेआई इस मामले में तीन जजों की पीठ गठित करेंगे जो इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगी.

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछे ये सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि जब दिल्ली दंगों के 9 केस में उसे जमानत मिल चुकी है तो चुनाव लड़ने के लिए एक केस में अंतरिम जमानत क्यों नहीं दी जा सकती? दिल्ली पुलिस के वकील ने इसका जवाब देने के लिए कोर्ट से समय मांगा।

ताहिर के वकील ने दिया ये तर्क

कोर्ट में ताहिर के वकील ने कहा कि तीन साल की हिरासत के बाद आरोप तय किए गए गए। इस मामले के बाकी आरोपियों को नियमित जमानत मिल गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस की चार्जशीट दिखाती है कि आप मौके पर मौजूद थे। चार्जशीट में गवाहों के बयान दर्ज  है जिसके मुताबिक आप भीड़ को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए उकसा रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि आप ज़मानत पर बहस के बजाए अंतरिम ज़मानत पर क्यों अड़े है। क्या ज़िन्दगी के एकमात्र चीज जो अहमियत रखती है, वो चुनाव लड़ना ही है। जस्टिस पंकज मिथल ने कहा कि हम आपको चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम ज़मानत देने को इच्छुक नहीं हैं।

दंगे में कई लोगों की हुई थी मौत

बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को हिंसा भड़क उठी थी जिसमें 53 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे। हुसैन फरवरी 2020 में हुए दंगों के एक मामले में आरोपी हैं जो खुफिया ब्यूरो (आईबी) कर्मचारी अंकित शर्मा की मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 फरवरी, 2020 को शिकायतकर्ता रविंदर कुमार ने दयालपुर पुलिस स्टेशन को सूचित किया कि उनका बेटा अंकित शर्मा 25 फरवरी, 2020 से लापता है। दंगा प्रभावित क्षेत्र के खजूरी खास नाले से शर्मा का शव बरामद किया गया और उनके शरीर पर चोटों के 51 निशान थे।

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