लैंड फॉर जॉब से संबंधित सीबीआई से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि एक पूर्व सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है. गृह मंत्रालय ने पूर्व सरकारी अधिकारी आर के महाजन के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. राऊज एवेन्यु कोर्ट के विशेष सत्र न्यायाधीश विशाल गोगने ने सीबीआई द्वारा दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने को लेकर 7 फरवरी की तारीख तय की है. 7 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई होगी.
इससे पहले सीबीआई को 30 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है. कोर्ट से 7 अक्टूबर को सभी 9 आरोपियों को एक-एक लाख रुपए की निजी मुचलके पर जमानत मिल गई थी. कोर्ट ने सभी को पासपोर्ट सरेंडर करने को कहा था. सीबीआई द्वारा दायर अंतिम चार्जशीट में 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है. सीबीआई के मुताबिक 38 कैंडिडेट्स है इसके अलावे कुछ अधिकारी शामिल है. सीबीआई ने 6 मार्च को इस मामले में तीसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया था. जिसमे भोला यादव को आरोपी बनाया गया है.
सीबीआई द्वारा दाखिल पूरक आरोप पत्र में कहा गया है कि भोला यादव लालू प्रसाद यादव के सचिव रह चुके है और वही सभी काम देखते थे. भोला यादव ही अधिकारियों को निर्देश देते थे. इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित उनके परिवार के पांच सदस्य आरोपी है. इसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव शामिल है. वही ईडी के मामले में कोर्ट ने 7 मार्च को राबड़ी देवी, मीसा भारती, हीमा यादव और हृदयानंद चौधरी को नियमित जमानत दी थी.
कोर्ट ने 18 सितंबर को ईडी की ओर से दाखिल पहली पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. ईडी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पूर्व केंद्रीय रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव को आरोपी बनाया गया है. ईडी का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने रेलमंत्री रहते हुए नौकरी के बदले लोगों से जमीन ली थी. राजद प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते बगैर किसी विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में नौकरियां दी. नौकरी देने के बदले उनसे या उनके परिवार के सदस्यों से लालू प्रसाद यादव ने उनकी जमीनें अपने परिवार के नाम लिखवा ली. इस मामले में सीबीआई और ईडी दोनों जांच कर रही है.
7 अक्टूबर को हुई सुनवाई में लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार समेत सभी 9 आरोपियों को जमानत मिल गई थी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी को 1-1 लाख के निजी मुचलके पर बेल दी थी। कोर्ट ने सभी को पासपोर्ट सरेंडर करने के निर्देश दिए थे।
जनवरी 2024 में लालू-तेजस्वी से हुई थी पूछताछ
लैंड फॉर जॉब्स मामले में 20 जनवरी 2024 को ED की दिल्ली और पटना टीम के अधिकारियों ने लालू और तेजस्वी से 10 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। ED सूत्रों के मुताबिक लालू प्रसाद से 50 से ज्यादा सवाल किए गए थे।
उन्होंने ज्यादातर जवाब हां या ना में ही दिए थे। पूछताछ के दौरान कई बार लालू झल्ला भी गए थे। वहीं, तेजस्वी से 30 जनवरी को लगभग 10-11 घंटे तक पूछताछ चली थी।
7 पॉइंट में जानिए लैंड फॉर जॉब डील का पूरा खेल
डील 1: CBI ने शुरुआती जांच में पाया कि 6 फरवरी 2008 को पटना के किशुन देव राय ने अपनी जमीन काफी कम कीमत पर राबड़ी देवी के नाम कर दी। यानी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख रुपए में राबड़ी देवी को बेच दी। साथ ही इसी साल परिवार के 3 मेंबर्स राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिल गई।
डील 2: फरवरी 2008 में पटना के महुआबाग के संजय राय ने भी सिर्फ 3.75 लाख रुपए में 3,375 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी को बेच दी। CBI ने अपनी जांच में पाया कि संजय राय के अलावा परिवार के 2 अन्य मेंबर्स को रेलवे में नौकरी मिल गई।
डील 3: पटना की रहने वाली किरण देवी ने नवंबर 2007 में सिर्फ 3.70 लाख रुपए में अपनी 80,905 वर्ग फीट जमीन लालू यादव की बेटी मीसा भारती को बेच दी। इसके बाद 2008 में सेंट्रल रेलवे मुंबई में किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को नौकरी मिल गई।
डील 4: फरवरी 2007 में पटना निवासी हजारी राय ने अपनी 9,527 स्क्वायर फीट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपए में बेच दी। बाद में हजारी राय के 2 भतीजे दिलचंद कुमार और प्रेम चंद कुमार को वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ-ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिल गई।
CBI ने पाया कि एके इंफोसिस्टम्स के सभी अधिकार और संपत्ति साल 2014 में लालू प्रसाद यादव की बेटी और पत्नी को दे दिए गए थे। राबड़ी देवी ने 2014 में कंपनी के ज्यादातर शेयर खरीद लिए और बाद में कंपनी की डायरेक्टर बन गईं।
डील 5: पटना निवासी लाल बाबू राय ने मई 2015 में मात्र 13 लाख रुपए में अपनी 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम कर दी। CBI ने जांच की तो पता चला कि लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिली थी।
डील 6: बृज नंदन राय ने मार्च 2008 में अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन गोपालगंज निवासी हृदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपए में बेच दी। हृदयानंद चौधरी को साल 2005 में ईस्ट-सेंट्रल रेलवे हाजीपुर में नौकरी मिल गई। 2014 में हृदयानंद चौधरी ने गिफ्ट डीड के जरिए इस जमीन को लालू प्रसाद यादव की बेटी हेमा को ट्रांसफर कर दिया।
CBI ने जांच की तो पाया कि हृदयानंद चौधरी और लालू प्रसाद यादव दूर के भी रिश्तेदार नहीं हैं। साथ ही जिस जमीन को गिफ्ट के रूप में दिया गया, उस वक्त सर्कल रेट के अनुसार उसका मूल्य 62 लाख रुपए था।
डील 7: विशुन देव राय ने मार्च 2008 में अपनी 3,375 वर्ग फीट की जमीन सीवान निवासी ललन चौधरी को दे दी। ललन के पोते पिंटू कुमार की साल 2008 में वेस्टर्न रेलवे मुंबई में नौकरी लग गई। इसके बाद ललन चौधरी ने फरवरी 2014 में इस जमीन को हेमा यादव को दे दिया।








