रेलवे पर निशाना क्यों?

कहते हैं लोकतंत्र की अधिकतर अच्छाइयों के बीच कुछ ऐसे दुर्गुण होते हैं जो लोगों की ‘जहिलियत’ को प्रश्रय देती है. अगर ऐसा ना होता तो क्या ट्रेनों पर लगातार हमले यूं ही हो रहे होते? सवाल मौजू है क्योंकि लगातार ट्रेनों पर हमले हो रहे हैं, ट्रेनों के शीशे तोड़े जा रहे हैं और […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 12 फरवरी 2025, 08:17 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
रेलवे पर निशाना क्यों?
Photo: UB India News Archive

कहते हैं लोकतंत्र की अधिकतर अच्छाइयों के बीच कुछ ऐसे दुर्गुण होते हैं जो लोगों की ‘जहिलियत’ को प्रश्रय देती है. अगर ऐसा ना होता तो क्या ट्रेनों पर लगातार हमले यूं ही हो रहे होते? सवाल मौजू है क्योंकि लगातार ट्रेनों पर हमले हो रहे हैं, ट्रेनों के शीशे तोड़े जा रहे हैं और पटरियां तक उखाड़ ली जा रही हैं. इसी कड़ी में एक घटना बिहार के मधुबनी की सामने आई है. 10 फरवरी को स्वतंत्रता सेनानी ट्रेन में तोड़फोड़ हुई और एसी बोगी के शीशे तोड़ दिए गए. यात्रियों में दहशत फैल गई, पुलिस पहुंची और कार्रवाई में जुट गई. एक आरोपी को पकड़ा भी गया. यह खबर मीडिया की सुर्खियां भी बन गई. पहले तोड़फोड़ की खबर, फिर कार्रवाई हुई वाली खबर…लेकिन यह खबर बड़ा सवाल छोड़ गई कि आखिर लोग अपनी ही ट्रेनों को निशाना क्यों बना रहे हैं?

बिहार के मधुबनी में स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में तोड़फोड़ की जो घटना सामने आई इसमें शुरुआती तौर पर यह तथ्य निकाल कर आए कि यात्री महाकुंभ में स्नान करने के लिए प्रयागराज जाने के लिए तत्पर थे, लेकिन ट्रेन में भारी भीड़ थी और चढ़ने में नाकाम रहने को लेकर गुस्से में यात्रियों ने ट्रेन को निशाना बनाया. कई बोगियों के शीशे तोड़ दिये. जाहिर है रेप प्रशासन की नाकामी और पब्लिक की बेसब्री यहां “घातक’ साबित हुई. लेकिन, इसके पहले की एक और वारदात जिक्र भी जान लीजिये. यह घटना बीते अक्टूबर 2024 में यूपी के वाराणसी में वंदे भारत ट्रेन पर पत्थरबाजी से जुड़ी है. यहां जांच में जो सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था. यूपी एटीएस ने अपने इन्वेस्टिगेशन में पाया कि पत्थरबाजों का मकसद ट्रेन की रफ्तार को कम करना था, ताकि खिड़की के पास बैठे यात्रियों के मोबाइल आसानी से अपराधी छीन सके.

एक्शन होता भी है या नहीं, किसे मालूम?
अब आगे बढ़ते हैं, इसके पहले एक और घटना के पीछे के कारण को समझिये. वर्ष 2023 में बिहार के कटिहार में 21 दिनों के भीतर वंदे भारत ट्रेन पर चार बार पत्थरबाजी की गई थी. घटना में जो खुलासा हुआ वह भी काफी चौंकाने वाला था. बताया गया कि नाबालिग लड़कों ने यह हरकत की थी. हालांकि, यहां उपद्रवी नाबालिग होने की आड़ में साफ बच गए. अब एक और घटना जानिये, जब उत्तर प्रदेश में एक घटना हुई थी. इसमें ट्रेन पर पथराव सिर्फ इसलिए किया गया कि यात्री ट्रेनों के ठहराव की मांग कर रहे थे, क्योंकि वहां वह ट्रेन रुकती नहीं थी. जाहिर तौर पर ये चारों घटनाएं बताती हैं कि लोगों का आसान निशाना चलती ट्रेन होती है. पत्थरबाजी की और फरार हो गए. ऐसे मामलों में तफ्तीश हुई या नहीं, क्या कार्रवाई हुई यह भी बहुत कम ही सामने आ पाता है.

रेलवे की संपत्ति सबसे आसान निशाना
अब रेलवे को निशाना बनाने का और मामला जानिये, जब जाट आरक्षण आंदोलन हो रहे थे तो आंदोलन के नाम पर लोगों ने पटरियों को निशाना बना लिया था. राजस्थान से लेकर हरियाणा तक बवाल हुआ था और करोड़ों की राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था. इसी तरह अग्निवीर योजना के विरोध में बिहार के दानापुर, आरा और लखीसराय में स्टेशनों पर आग लगा दी गयी थी. कई जगहों पर पटरियां तक उखाड़ ली गई थी. खास बात यह कि यह सब साजिश का हिस्सा थी, लेकिन शासन तब भी कुछ कर पाने में नाकाम साबित हुआ था और ऐसी घटनाओं पर लगाम लगा पाना तो खैर अब तक संभव नहीं हो पाया है. यहां शासन को सिर्फ कटघरे में खड़ा करना भर नहीं है, बल्कि पब्लिक पर भी सवाल है कि आखिर पब्लिक अपना ही नुकसान क्यों करती है. क्या कारण है जो कि पब्लिक राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाती है.

उपद्रवियों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
संभव है कि कई बार अव्यवस्थाओं से आजिज आकर भी पब्लिक ऐसा कदम उठाती हो, लेकिन हर वक्त ऐसा नहीं होता. कई बार साजिशें भी होती हैं और कई बार कानून की ढिलाई के कारण ऐसे तत्वों का मन बढ़ जाना होता है. ऐसे भी कहा जाता है कि सत्ता ठसक से चलती है और कानून अपनी धमक से…लेकिन, हाल के दिनों में जैसी वारदातें ट्रेनों को लेकर हो रही हैं इससे साफ है कि उपद्रवियों को न तो सत्ता की ठसक से और न ही कानून की हनक से कोई खौफ है. पब्लिक बेसब्र है, सत्ता बेबस है और कानून बेशर्म है. वरना तो लगातार ट्रेनों पर हमले हो रहे हैं और शीशे तोड़े जा रहे हैं, राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन ऐसे उपद्रवियों पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही.

रेलवे अधिनियम में पर्याप्त दंड की व्यवस्था
बता दें कि रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में कानून बने हैं. इन कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है. रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं में आरोपी को पहचानना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इस काम में स्थानीय पुलिस की मदद ली जाती है. दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है. ट्रेन के ऊपर लकड़ी का कोई सामान या पत्थर और अन्य सामान फेंकने, पटरी को नुकसान पहुंचाने वालों को धारा 150 के तहत आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. इसके बावजूद सख्ती नहीं हो पाती है.

ऐसे कानून का मकसद पूरा होने का इंतजार
इतना ही नहीं रेल रोको आंदोलन के नाम पर या फिर रेल परिचालन में किसी तरह की बाधा डालने वालों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का प्रवधान है. धारा 174 के तहत रेलवे ट्रैक पर बैठकर या अवरोधक लगाकर, रेल के हौजपाइप से छेड़छाड़ करके या सिग्नल को नुकसान पहुंचाकर ट्रेन परिचालन बाधित करने वालों को दो वर्ष की जेल की सजा या दो हजार रुपये जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है. रेलवे कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, रेल या उसके किसी भाग में अवैध रूप से प्रवेश करने पर धारा 146 और 147 के तहत छह माह की सजा या एक हजार रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजा हो सकती है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰