बिहार में बदलाव की आंच पर कांग्रेस !

कांग्रेस जिस सक्रियता के साथ राजनीत के नए दाव पेंच के साथ हरियाणा, महाराष्ट्र या फिर झारखंड विधान सभा चुनाव लड़ी है ठीक उसी तर्ज पर आगामी बिहार विधान सभा चुनाव लड़ने मन बना चुकी है। बदलाव के इस नए मूड में कांग्रेस अपनी पूरी ताकत का इजहार करने में असमर्थ होगी, यानि उसे सही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 17 फरवरी 2025, 07:14 AM 4 मिनट read
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बिहार में बदलाव की आंच पर कांग्रेस !
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस जिस सक्रियता के साथ राजनीत के नए दाव पेंच के साथ हरियाणा, महाराष्ट्र या फिर झारखंड विधान सभा चुनाव लड़ी है ठीक उसी तर्ज पर आगामी बिहार विधान सभा चुनाव लड़ने मन बना चुकी है। बदलाव के इस नए मूड में कांग्रेस अपनी पूरी ताकत का इजहार करने में असमर्थ होगी, यानि उसे सही भागीदारी उसके कद के अनुसार सीटें नहीं मिली तो कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इसे स्वीकारने के मूड में नहीं है। अपने इस बदलाव का संकेत कांग्रेस ने बिहार की सरजमीं पर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इस बदलाव के कई संकेत भी हैं। जानते हैं कांग्रेस की चीते वाली दांव जहां दबे पांव अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है।

दलित की पुश्तैनी जमीन और कांग्रेस

कांग्रेस अब खुद में बदलाव लाते हुए दलित मतों की विरासत पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर चुकी है। यही वजह है कि आगामी विधान सभा चुनाव के कुछ माह पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे बिहार आ रहे हैं। वे अपने इस दौरा के क्रम में 22 फरवरी को बक्सर आ रहे हैं।
वह भी जय बापू जय भीम जय संविधान कार्यक्रम में आ रहे हैं। इस कार्यक्रम की विशेषता इस बात से समझ सकते हैं कि बक्सर से दलित मंत्र फूंकने वाले कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे तीन दिन पहले यानि 20 फरवरी को ही पटना आ जाएंगे।
यानी तीन दिन पहले पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मिलकर बिहार की सही स्थिति का ज्ञान लेंगे और साथ-साथ जय बापू जय भीम जय संविधान कार्यक्रम की सफलता का पूरा प्रयास भी करेंगे। ताकि इस कार्यक्रम का वृहद स्वरूप दिखाकर दलितों के बीच एक महत्वपूर्ण संदेश भेज सकें।
इसके पहले राहुल गांधी दूसरी बार जब बिहार आए तो वह मौका था एसकेएम हॉल में आयोजित स्व. जगलाल चौधरी की जयंती समारोह। राहुल गांधी के इस भूले बिसरे कदम के साथ कांग्रेस में उत्साह का भी संचार हो गया। कहा यह गया कि कांग्रेस में कद्दावर दलित नेताओं के अभाव में राहुल गांधी ने दलित मतों को समेटने की तैयारी खुद कर ली है।
संविधान, बाबा साहब अंबेडकर की चर्चा के साथ दलित नेता जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में आने की खबर का भी एक पॉजिटिव असर भी हुआ। कुछ ने कहा देर आए पर सही राह आए।

बदलाव के संकेत हैं कृष्ण अल्लावरू

बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी बने कृष्ण अल्लावरु महज एक बदलाव के संकेत भर नहीं हैं। बल्कि यह एक नए प्रभार में नई नीतियों के भी संकेत हैं। ऐसा इसलिए भी नए प्रभारी को पुराने दवाब का कोई प्रभाव नहीं। उनकी ओर से कांग्रेस भी नए पथ पर ले जाने की तैयारी भी कर सकती है। माना यह जा रहा है कि कृष्ण अल्लावरू का गोल हर हाल में 70 विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ना हो सकता है।

टास्क क्या होगा अल्लावरू का?

एक सच्चाई तो यह है कि बिहार में महागठबंधन का जो स्वरूप है वह इंडिया गठबंधन से कितना इतर होगा। ऐसा इसलिए कि राजद के युवराज तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव के बाद यह खुद कहा था कि इंडिया गठबंधन लोकसभा तक ही सीमित था। अब ऐसे में कांग्रेस क्या राजद के बिना बिहार में पुश्तैनी जमीन तलाशने का जोखिम उठाएगी?

या फिर जिन 70 विधान सभा चुनाव पर कांग्रेस आलाकमान चुनाव पर लड़ने की इच्छा रख रही है उसे प्राप्त कर सकेगी? अब यह देखना होगा कि कर्णाटक से आने वाले कृष्ण अल्लावरू क्या कांग्रेस को लालू प्रसाद यादव की छत्र-छाया से निकाल पातें हैं या फिर पुरानी राजद के पीछलग्गू बन कर पुराने लीक पर चलेगी?

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