थरूर की बगावत कहीं महंगी न पड़ जाए?……….

कांग्रेस से बढ़ती नाराजगी के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता पीयूष गोयल के साथ एक फोटो पोस्ट की है. ये तस्वीर भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर चर्चा के बाद की है. इस सेल्फी में वह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ नजर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 25 फरवरी 2025, 06:31 AM 10 मिनट read
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थरूर की बगावत कहीं महंगी न पड़ जाए?……….
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस से बढ़ती नाराजगी के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता पीयूष गोयल के साथ एक फोटो पोस्ट की है. ये तस्वीर भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर चर्चा के बाद की है. इस सेल्फी में वह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ नजर आ रहे हैं. उनकी इस तस्वीर के बाद कांग्रेस में उनके भविष्य को लेकर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है. तस्वीर में शशि शरूर, पीयूष गोयल  रेनॉल्ड्स के साथ मुस्कराते नजर आ रहे हैं.

कांग्रेस सांसद ने अपनी तस्वीर को एक्स पर पोस्ट कर कैप्शन में लिखा, ” वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में बिजनेस एंड ट्रेड के लिए ब्रिटेन के व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ बातचीत करके अच्छा लगा. लंबे समय से रुकी हुई FTA वार्ता फिर से शुरू हो गई है, जो बहुत स्वागत योग्य है.”

शशि थरूर ने एक्स पर ये पोस्ट केरल सरकार की नीतियों की तारीफ करने के बाद उनके और कांग्रेस पार्टी के संबंधों में आई खटास के बाद लिखी है. इसके बाद एक बार फिर से पार्टी में उनके फ्यूचर को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

कांग्रेस से शशि थरूर की नाराजगी

बता दें कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कांग्रेस पार्टी से नाराजगी देखने को मिल रही है. इसे लेकर वह हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिले थे और नाराजगी भी जताई थी. पार्टी में हाशिए पर धकेले जाने को लेकर वह नाराज हैं. उन्होंने कांग्रेस के सामने ये भी साफ कर दिया था कि पार्टी को ये न लगे कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

शरूर ने की केरल सरकार के कामकाज की तारीफ 

बता दें कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट केरल में मुख्य विपक्षी दल है. केरल सरकार की तारीफ के लिए पार्टी के स्थानीय मुखपत्र, वीक्षणम डेली ने कांग्रेस सांसद की आलोचना की है. दरअसल शशि थरूर ने राज्य के विकास के कुछ पहलुओं के बारे में पॉजिटिव बातें कही थीं. हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि उन्होंने सीपीएम की तारीफ नहीं की थी, बल्कि सिर्फ स्टार्टअप क्षेत्र में केरल की तरक्की को बताने की कोशिश की थी.

सांसद शशि थरूर क्यों नाराज, पांच प्वाइंट में समझें, ये बगावत कांग्रेस को महंगी न पड़ जाए?

मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले सांसद शशि थरूर इन दिनों अपनी ही पार्टी में बेचैन नजर आ रहे हैं, जिसके चलते बगावती तेवर भी दिखाने शुरू कर दिए हैं. शशि थरूर ने पीएम मोदी के अमेरिका दौरे और केरल के सीएम पिनाराई विजयन की तारीफ कर पार्टी के अंदर विवाद खड़ा कर दिया है. थरूर पर पार्टी लाइन से हटकर बयान देने का आरोप लगा तो जवाब में थरूर ने कहा कि वो कांग्रेस के साथ हैं, लेकिन पार्टी को मेरी जरूरत नहीं है तो मेरे पास भी विकल्प मौजूद है. ऐसे में सवाल उठता है कि शशि थरूर क्यों नाराज है और उनकी बगावत कांग्रेस के लिए कहीं महंगी न पड़ जाए?

केरल के तिरुवनंतपुरम से लगातार चार बार के लोकसभा सांसद शशि थरूर ने हाल ही में केरल की वामपंथी विजयन सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की तारीफ की थी. इतना ही नहीं उन्होंने केरल में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए थे. शशि थरूर के बयान से कांग्रेस कश्मकश में पड़ गई थी. इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई के मुखपत्र ने शशि थरूर को नसीहत देते हुए लेख छापा था. मुखपत्र वीक्षणम डेली के द्वारा लिखा गया था कि थरूर को स्थानीय निकाय चुनाव से पहले पार्टी की उम्मीद को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए. हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को धोखा न दें. ऐसे में साफ है कि शशि थरूर और कांग्रेस के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा.

थरूर को सियासत में मनमोहन सिंह लाए थे

शशि थरूर 16 सालों से सियासत में हैं. वो डिप्लोमैट रहे और 2009 से कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सांसद हैं. थरूर को राजनीति में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह लेकर आए थे. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश राज्य मंत्री और मानव संसाधन राज्य मंत्री का दायित्व संभाला था. मनमोहन सिंह सरकार में शशि थरूर की अपनी सियासी अहमियत होती थी.

कांग्रेस से चार बार लगातार तिरुवनंतपुरम सीट से चुने जा रहे हैं, लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद से पार्टी में सियासी हाशिए पर हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह रही कि शशि थरूर एक समय गुलाम नबी आजाद के अगुवाई वाली कांग्रेस जी-23 का हिस्सा रहे हैं. कांग्रेस के जी-23 में रहते हुए थरूर ने कई बार गांधी परिवार के हाथों में पार्टी लीडरशिप रहने का सवाल उठाया था.

2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ तो खरगे के खिलाफ थरूर ने ताल ठोक दी थी. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव हारने के बाद शशि थरूर ने खरगे टीम में काम करने की इच्छा जताई थी, लेकिन गांधी परिवार का विश्वास नहीं जीत सके. इसके चलते पार्टी में खुद को साइडलाइन मानते हैं. कांग्रेस से शशि थरूर यूं ही नाराज नहीं हैं बल्कि उसके पीछे कारण भी है. थरूर की कांग्रेस से नाराजगी को इन पांच प्वाइंट में समझ सकते हैं…

  1. कांग्रेस में सियासी हाशिए पर थरूर: कांग्रेस के चार बार के सांसद शशि थरूर इन दिनों पार्टी में साइडलाइन चल रहे हैं. न ही थरूर के पास कांग्रेस संगठन में कोई अहम पद है और न ही पार्टी उन्हें कोई रोल दे रही है. पिछले दिनों कांग्रेस नेतृत्व ने अपने संगठन में कई अहम बदलाव किए हैं, जिसमें दो महासचिव नियुक्त किए हैं तो कई राज्यों के प्रभारी बदले हैं. इस बदलाव में भी थरूर को कोई पद नहीं मिला. इसके चलते ही शशि थरूर नाराज माने जा रहे हैं.
  2. कांग्रेस थरूर को बोलने का मोका नहीं देती: शशि थरूर ने 18 फरवरी को राहुल गांधी से मुलाकात की थी. उन्होंने पार्टी में किनारे किए जाने पर राहुल से नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि मुझे संसद में महत्वपूर्ण बहसों में बोलने का मौका नहीं मिलता. पार्टी में मुझे इग्नोर किया जा रहा है और मैं पार्टी में अपनी स्थिति को लेकर असमंजस में हैं, राहुल गांधी मेरी भूमिका स्पष्ट करें. इस तरह से थरूर ने राहुल से साफ-साफ कहा संसद में महत्वपूर्ण बहसों के दौरान उन्हें किनारे किया जा रहा है. यह थरूर को चुभ रहा है, उन्हें लगता है कि पार्टी उन्हें जानबूझकर हाशिये पर धकेल रही है, जिसके चलते वो पार्टी के रवैए से नाराज हैं.
  3. कांग्रेस नहीं दे रही ऊंचा मुकाम: शशि थरूर 2009 से लेकर लगातार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच रहे हैं. मनमोहन सिंह के रहते हुए उन्हें विदेश मंत्री बने, लेकिन विपक्ष में रहते हुए उन्हें किसी तरह का कोई मुकाम नहीं मिला. थरूर काफी जनाकार और अच्छे वक्ता माने जाते हैं. मुद्दो को मजबूत तरीके से उठाने और सरकार को घेरने का जज्बा भी रखते हैं, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया. 2014 से 2019 तक मल्लिकार्जुन खरगे को बनाए रखा तो 2019 से 2024 तक अधीर रंजन चौधरी और अब राहुल गांधी है. ये भी एक बड़ा मुद्दा है, उनकी नाराजगी के पीछे.
  4. केरल में सीएम का चेहरा नहीं बनाना: शशि थरूर केरल से जीतकर आ रहे हैं, जिसके चलते राज्य में अपने लिए सियासी मुकाम तलाश रहे हैं. ऐसे में उन्हें लगता है कि पार्टी संसद की गतिविधियों में उन्हें पीछे धकेल रही है और राज्य के लिए भी उनकी कोई भूमिका तय नहीं कर रही है. राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान थरूर ने अपनी भूमिका को लेकर सवाल किया था. इसके लिए केरल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने चेहरे को पेश कराना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय केसी वेणुगोपाल को अहमियत दे रही है. माना जाता है कि राहुल गांधी ने थरूर को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने की परंपरा नहीं है. थरूर युवा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने को भी तैयार थे, लेकिन राहुल गांधी ने इस ऑफर पर भी आनाकानी कर दी. इस तरह से मायूसी हाथ लगने के बाद शशि थरूर की बेचैनी बढ़ रही है.
  5. ऑल इंडिया प्रफेशनल कांग्रेस से थरूर की छुट्टी: शशि थरूर को ऑल इंडिया प्रफेशनल कांग्रेस के प्रभार पद से भी हटा दिया गया है. कांग्रेस का यह संगठन थरूर का ही तैयार किया हुआ है. राहुल गांधी के साथ मुलाकात में थरूर ने इस बात पर भी नाराजगी जतायी. इस तरह शशि थरूर पार्टी में खुद से सियासी हाशिए पर पाते हैं, जिसके चलते सियासी बेचैन हैं और खुल कर बागी तेवर अपना लिया है.

थरूर की बगावत कहीं महंगी न पड़ जाए?

शशि थरूर ने बागी रुख तो अपना रखा है, लेकिन बगावत करने से इंकार नहीं कर रहे हैं. शशि थरूर की केरल के तिरुवनंतपुरम सीट से जीतकर आए हैं. उनकी हिंदू और मुस्लिम दोनों ही वोटों पर पकड़ मानी जाती है. मोदी लहर में लगातार तीन बार थरूर अपनी सीट जीतने में सफल रहे हैं, लेकिन पार्टी में उन्हें बड़ा मुकाम नहीं मिला है. केरल में अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव है और पिछले 9 साल से लेफ्ट का कब्जा है. राहुल गांधी के केरल से सांसद रहते हुए भी कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापसी नहीं कर सकी. ऐसे में कांग्रेस के लिए अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव काफी अहमियत रखा है.

शशि थरूर ने दावा किया कि अन्य कांग्रेस नेता उनके इस विचार का समर्थन करते हैं कि पार्टी की केरल प्रदेश इकाई में नेता नहीं है. उन्होंने स्वतंत्र संगठनों की ओर से किए गए ओपिनियन पोल का हवाला दिया, जिनमें उन्हें राज्य में नेतृत्व के मामले में दूसरों से आगे दिखाया गया था. तिरुवनंतपुरम से चार बार के लोकसभा सांसद ने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस ने अपनी अपील का विस्तार नहीं किया, तो वह केरल में लगातार तीसरी बार विपक्ष में बैठेगी. ऐसे में शशि थरूर ने जिस तरह तेवर दिखाए हैं, उसके बाद केरल कांग्रेस में भी सियासी खींचतान शुरू हो गई है.

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