आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्मार्ट खेती, पर क्या छोटे किसान उठा पाएंगे फायदा?

भारत में खेती के लिए पानी की कमी एक बड़ी समस्या है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस समस्या का समाधान करने में मदद कर रहा है. AI का इस्तेमाल करके किसान पानी का सही इस्तेमाल कर पा रहे हैं और फसल की पैदावार बढ़ा पा रहे हैं. माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन सत्य नडेला ने हाल ही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 28 फरवरी 2025, 08:50 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्मार्ट खेती, पर क्या छोटे किसान उठा पाएंगे फायदा?
Photo: UB India News Archive

भारत में खेती के लिए पानी की कमी एक बड़ी समस्या है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस समस्या का समाधान करने में मदद कर रहा है. AI का इस्तेमाल करके किसान पानी का सही इस्तेमाल कर पा रहे हैं और फसल की पैदावार बढ़ा पा रहे हैं.

माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन सत्य नडेला ने हाल ही में बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) खेती में क्रांति ला रहा है. महाराष्ट्र के बारामती में प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स (PFV) के जरिए AI का इस्तेमाल करके किसानों ने अपनी फसल की पैदावार 40% तक बढ़ा दी है. खाद का सही इस्तेमाल करके किसानों ने 25% तक खाद की बचत की है. पानी का सही इस्तेमाल करके 50% से ज्यादा पानी की बचत हुई है. फसल कटने के बाद होने वाली बर्बादी में 12% से ज्यादा की कमी आई है.

यह प्रोजेक्ट 2023 से पुणे में चल रहा है. इसमें माइक्रोसॉफ्ट ने खेती के लिए खास तकनीक बनाई है और अब वो सबके लिए फ्री में उपलब्ध है. मतलब, कोई भी चाहे तो इन तकनीकों का इस्तेमाल करके खेती को और बेहतर बना सकता है.

सत्य नडेला ने कहा, “बारामती को-ऑप के एक छोटे किसान ने इस तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी जमीन की पैदावार बढ़ाई है. उन्होंने केमिकल का इस्तेमाल कम किया, पानी का सही इस्तेमाल किया और अंत में उनकी फसल बहुत अच्छी हुई.”

AI ने यह कैसे किया?
AI ने अलग-अलग जगहों से जानकारी इकट्ठा की, जैसे कि ड्रोन, सैटेलाइट और मिट्टी से. फिर इस जानकारी का इस्तेमाल करके AI ने किसान को बताया कि उसे क्या करना चाहिए. यह सब किसान की अपनी भाषा में हुआ, जिससे उसे समझने में आसानी हुई.

प्रोजेक्ट फार्म वाइब्स में कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो खेती को और बेहतर बना रही हैं.

  • Azure Data Manager for Agriculture (ADMA): यह तकनीक सैटेलाइट, मौसम विभाग और जमीन पर लगे सेंसर से जानकारी इकट्ठा करके खेत की पूरी स्थिति का पता लगाती है.
  • Farmvibes.AI: यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके मिट्टी की नमी, तापमान, हवा में नमी, pH और दूसरी जरूरी चीजों पर नजर रखता है.
  • Agripilot.ai: यह Azure Maps और Azure OpenAI का इस्तेमाल करके किसानों को खेती के बारे में सही जानकारी देता है, जिससे वे अच्छी फसल उगा सकें और पर्यावरण का भी ध्यान रख सकें.

AI से सिंचाई कैसे हो रही है स्मार्ट?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिट्टी की नमी और मौसम की जानकारी का विश्लेषण करके बताता है कि फसल को कब और कितना पानी देना चाहिए. इससे पानी की बर्बादी कम होती है. इस योजना के तहत AI से जुड़े ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पानी का सही इस्तेमाल होता है और फसल को जरूरी पोषण मिलता है.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने IoT-आधारित सिंचाई सिस्टम विकसित किए हैं जो खेत की वास्तविक स्थिति के अनुसार पानी की आपूर्ति को स्वचालित करते हैं, इससे पानी की बर्बादी कम होती है.

AI और खेती: क्या है चुनौतियां?
एआई से खेती में क्रांति आ रही है, यह बात तो सच है. लेकिन इसके रास्ते में कुछ चुनौतियां भी हैं. असल में गांवों में बहुत से किसानों को इंटरनेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं आता. इसलिए AI तकनीक का इस्तेमाल करना उनके लिए मुश्किल है. AI तकनीक, जैसे ड्रोन, सेंसर और ऑटोमेटिक सिंचाई सिस्टम काफी महंगे होते  हैं. छोटे किसानों के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल है.

गांवों में अभी भी इंटरनेट की सुविधा सब जगह नहीं है. इससे AI तकनीक का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है. भारत में लगभग 25,000 गांवों में अभी भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट नहीं है. AI को सही से काम करने के लिए बहुत सारे डेटा की जरूरत होती है, जैसे कि मौसम का डेटा, मिट्टी का डेटा, और फसल का डेटा. लेकिन यह डेटा हमेशा उपलब्ध नहीं होता या फिर सही नहीं होता. ज्यादातर AI तकनीक भारत के अलग-अलग इलाकों के हिसाब से नहीं बनी है. हर इलाके का मौसम और मिट्टी अलग होती है, इसलिए AI तकनीक को भी उसी हिसाब से बनाना होगा.

छोटे किसानों के सामने चुनौतियों का अंबार
भारत में छोटे किसानों को खेती के साथ-साथ कई दूसरी समस्याओं से भी जूझना पड़ता है. इन समस्याओं की वजह से उनकी आमदनी कम होती है और जीवनयापन मुश्किल हो जाता है. बारिश का कम होना, अचानक बाढ़ आना या फिर ज्यादा गर्मी पड़ना, इन सबका असर फसल पर पड़ता है और किसानों को नुकसान होता है.

फसलों में कीट लगना और बीमारियां फैलना भी किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है. इससे उनकी फसल खराब हो जाती है. कई बार मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी की कमी या फिर कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से फसल की पैदावार कम हो जाती है. कई किसानों को खेती के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है और वो मजबूरन स्थानीय साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेते हैं. इससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है.

कई बार फसल कटने के बाद उसकी ढुलाई और भंडारण में दिक्कत आती है, जिससे फसल खराब हो जाती है. कई बार तो 40% तक फसल बर्बाद हो जाती है. किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए सही दाम नहीं मिलते. कई बार किसानों की फसल बाज़ार के मानकों पर खरी नहीं उतरती, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने में दिक्कत होती है. अगर इन समस्याओं का समाधान किया जाए, तो किसानों की आमदनी बढ़ सकती है और उनकी जिंदगी बेहतर हो सकती है.

AI4AI पहल: तेलंगाना में ‘सागू बागू’ से किसानों की आमदनी बढी?
AI के इस्तेमाल से खेती को बेहतर बनाने के लिए विश्व आर्थिक मंच ने ‘AI4AI’ नाम का एक प्रोग्राम शुरू किया है. इस प्रोग्राम के तहत तेलंगाना में ‘सागू बागू’ नाम का एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जिसके नतीजे बेहद शानदार रहे हैं.

यह प्रोजेक्ट तेलंगाना सरकार बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और डिजिटल ग्रीन ने मिलकर शुरू किया है. इसमें AI का इस्तेमाल करके किसानों को मिर्च की खेती के बारे में जरूरी जानकारी और मदद दी जाती है. इस प्रोजेक्ट में शामिल किसानों की मिर्च की पैदावार प्रति एकड़ 21% बढ़ गई. किसानों ने कीटनाशकों का इस्तेमाल 9% कम कर दिया है. खाद का इस्तेमाल भी 5% कम हुआ है. मिर्च की क्वालिटी बेहतर होने से किसानों को 8% ज्यादा दाम मिले हैं. इन सब फायदों की वजह से किसानों की आमदनी प्रति एकड़ 66,000 रुपये से ज्यादा बढ़ गई है, यानी उनकी कमाई लगभग दोगुनी हो गई है.

यह एक उदाहरण है जो दिखाता है कि AI किसानों की जिंदगी कैसे बेहतर बना सकता है और भारत की खेती को कैसे आगे बढ़ा सकता है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰