महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं !

शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और पुरुषों में बेरोजगारी की बढ़ती दर, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. जहां एक तरफ महिलाओं ने पारंपरिक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कदम मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों के लिए रोजगार के अवसरों […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 12 मार्च 2025, 06:37 AM 7 मिनट read
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महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं !
Photo: UB India News Archive

शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और पुरुषों में बेरोजगारी की बढ़ती दर, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. जहां एक तरफ महिलाओं ने पारंपरिक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कदम मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी बढ़ती जा रही है.

यह असंतुलन न सिर्फ परिवारों के भीतर आर्थिक संरचना को प्रभावित कर रहा है, बल्कि समाज में नए सामाजिक और मानसिक दबावों को भी जन्म दे रहा है.

ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में बढ़ रही भागेदारी का क्या कारण है और इस असंतुलन का भविष्य में हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह स्थिति समाज में नई समस्याओं को जन्म दे सकती है?

क्या कहता है आंकड़ा

हाल ही में  ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके अनुसार साल 2023-24 में 20 से लेकर 24 साल की उम्र के बीच पुरुषों में बेरोजगारी की दर 10% देखी गई, जबकि महिलाओं में यही दर पुरुषों से कम यानी 7.5% देखा गया है. इसी तरह, 25-29 साल की उम्र में भी पुरुषों की बेरोजगारी दर 7.2% है, जो महिलाओं से ज्यादा है.

बेरोजगारी का ये आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन पुरुषों के लिए यह अवसर घटते जा रहे हैं. ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि पिछले कुछ सालों में शहरी भारत में महिलाओं का रोजगार 10% बढ़ा है.

जबकि साल 2017-18 से लेकर 2023-24 तक, शहरी महिलाओं में रोजगार की दर 28% तक पहुंच गई है. दिलचस्प बात ये है कि इसी साल 40 साल और उससे ऊपर की उम्र वाली शहरी महिलाओं में रोजगार दर सबसे ज्यादा 38.3% दर्ज की गई. जिससे यह संकेत मिलता है कि महिलाएं अब बच्चों के बड़े होने के बाद अपने करियर पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं.

महिलाओं को नहीं है नौकरी की तलाश

इसी रिपोर्ट के अनुसार भले ही देश में महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके  भारत की 89 मिलियन से ज्यादा शहरी महिलाएं अभी भी नौकरी की तलाश में नहीं हैं. यह संख्या जर्मनी, फ्रांस या यूनाइटेड किंगडम की पूरी जनसंख्या से भी ज्यादा है. इसका मतलब है कि अभी भी लाखों महिलाएं कामकाजी जीवन में शामिल नहीं हो पाई हैं.

इस स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पुरुषों को पर्याप्त नौकरी के मौके नहीं मिलेंगे और महिलाएं बेहतर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएंगी, तो आने वाले समय में समाज में असंतुलन बढ़ सकता है. एक ओर जहां महिलाओं के लिए रोजगार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुरुषों की बेरोजगारी बढ़ने से समाज में तनाव और असंतोष का माहौल बन सकता है.

महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार 

इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कंपनियां महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है, जैसे स्कूल और ऑफिस के घंटों को मिलाना और बच्चों के लिए चाइल्डकेयर की सुविधा देना. इसके अलावा ज्यादातर कंपनियां महिलाओं को घर से काम करने का विकल्प दे रही है, जिससे वे अधिक आराम से काम कर पा रही हैं, लेकिन घर से काम करने के दौरान नेटवर्किंग की समस्या भी खड़ी हो रही है, जिससे उनकी करियर ग्रोथ में रुकावट आ सकती है.

इस शोध में यह भी बताया गया है कि अगर हम सिर्फ महिलाओं के रोजगार पर ध्यान देंगे और पुरुषों के रोजगार की चिंता नहीं करेंगे, तो भविष्य में इसे लेकर समाज में समस्याएं आ सकती हैं. इसलिए, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कोई भी समुदाय इससे प्रभावित न हो.

पुरुषों में क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी

आजकल शहरी इलाकों में महिलाओं का रोजगार बढ़ रहा है, लेकिन पुरुषों के लिए बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बन चुकी है. खासकर, जो पारंपरिक काम जैसे निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और कम कौशल वाला काम करते है. इसका मतलब है कि पहले जो काम पुरुषों के लिए आम थे, अब उनमें नौकरी के मौके कम हो गए हैं.

इसके अलावा, नई तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने पुरुषों के लिए और भी मुश्किलें पैदा की हैं. पहले जो लोग मैन्युअल (हाथ से काम करने वाले) या कम कौशल वाले काम करते थे, उनके लिए अब इन कामों की जगह मशीनों और रोबोट्स ने ले ली है. अब ये लोग अपनी नौकरी छूट जाने के खतरे से जूझ रहे हैं.

शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर हो रही है क्योंकि यहां रोजगार के मौके कम हो गए हैं और युवा पुरुषों को नौकरी ढूंढने में कठिनाई हो रही है. इसे एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जा सकता है, जिसका समाधान समय रहते करना जरूरी है.

असंतुलन का क्या होगा समाज पर असर?

अगर यह असंतुलन जारी रहता है तो इसका समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. पहले तो, यह पारिवारिक संरचनाओं को प्रभावित करेगा. पारंपरिक समाज में पुरुषों को कमाने वाले के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब महिलाएं भी कमाने वाली बन रही हैं. इससे परिवारों के भीतर भूमिकाओं में बदलाव आएगा और कई पुरुष इस बदलाव को स्वीकार करने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं.

इसके अलावा, बेरोजगारी की बढ़ती दर से पुरुषों के बीच निराशा और मानसिक दबाव बढ़ सकता है. बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण अपराधों में वृद्धि हो सकती है और समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है.

महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर

महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर सीधा और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है. कुछ पुरुषों को यह बदलाव चुनौतीपूर्ण लग रहा है, क्योंकि पहले वे ही परिवार के मुख्य कमाने वाले होते थे. अब जब महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, तो पारंपरिक भूमिका और पहचान बदल रही है. इस बदलाव के साथ-साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है. वे अब पुरुषों के मुकाबले अपने करियर और जीवन में अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हो रही हैं. इससे समाज में पुरुषों की मानसिकता पर असर पड़ रहा है और कई पुरुष इस बदलाव को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं.

पुरुषों को रोजगार में बढ़ावा देने की जरूरत 

इस असंतुलन को सही दिशा में सुधारने के लिए हमें पुरुषों के रोजगार के अवसरों को बढ़ाना होगा. इसके लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है.

  • स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स: पुरुषों को तकनीकी और अन्य उच्च कौशल सिखाने के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स की जरूरत है. इससे वे नई और उच्च क्षमता वाली नौकरियों के लिए तैयार हो सकेंगे.
  • नई नौकरियों का सृजन: खासकर शहरी इलाकों में नई नौकरियों के अवसर उत्पन्न करने के लिए सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना होगा. इससे न केवल महिलाओं के लिए, बल्कि पुरुषों के लिए भी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे.
  • समान वेतन नीति: महिलाओं के बढ़ते रोजगार से पुरुषों को असुरक्षित महसूस हो सकता है, खासकर यदि उन्हें समान अवसर नहीं मिल रहे हैं. समान वेतन नीति को लागू करने से यह असंतुलन दूर हो सकता है और समाज में समानता की भावना को बढ़ावा मिलेगा.
  • पारिवारिक भूमिका में बदलाव: समाज को यह समझने की आवश्यकता है कि पारंपरिक भूमिकाओं को बदलने का समय आ चुका है. पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से परिवार और करियर दोनों में भागीदार होना चाहिए. इससे पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य बनेगा और दोनों को अपने-अपने क्षेत्र में सम्मान मिलेगा.
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