किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की कितनी योजनाएं, कितनी कारगर?

किसान भारत की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी आमदनी हमेशा चिंता का विषय रही है. सरकार किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं चला रही है ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके और खेती आसान हो. लेकिन क्या ये योजनाएं सच में किसानों की जिंदगी बदल रही हैं? लोकसभा में सरकार से सवाल पूछा गया कि भारत […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 17 मार्च 2025, 12:22 PM 8 मिनट read
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की कितनी योजनाएं, कितनी कारगर?
Photo: UB India News Archive

किसान भारत की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी आमदनी हमेशा चिंता का विषय रही है. सरकार किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं चला रही है ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके और खेती आसान हो. लेकिन क्या ये योजनाएं सच में किसानों की जिंदगी बदल रही हैं?

लोकसभा में सरकार से सवाल पूछा गया कि भारत में किसानों की कमाई बढ़ाने और खेती-बाड़ी को तरक्की देने के लिए सरकार कौन-कौन सी बड़ी योजनाएं और प्रोग्राम चला रही है? क्या सरकार ने छोटे और गरीब किसानों के लिए कोई खास मदद की है? इन योजनाओं से किसानों की जिंदगी में क्या अच्छा बदलाव आया है? क्या इन योजनाओं से किसानों की समाज और पैसे की हालत में कुछ बढ़िया बदलाव हुआ है?

बजट में कितनी बढ़ोतरी?
इन सवालों के जवाब में कृषि मंत्रालय ने कहा, खेती-बाड़ी राज्य का मामला है, लेकिन भारत सरकार अपनी नीतियों, बजट और योजनाओं के जरिए राज्यों की मदद करती है. भारत सरकार की योजनाएं किसानों की भलाई के लिए हैं ताकि पैदावार बढ़े, किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिले और उनकी कमाई भी बढ़े.

सरकार ने कृषि और किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के बजट में जबरदस्त बढ़ोतरी की है. 2013-14 में ये बजट 21,933 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 122,528 करोड़ रुपये हो गया है.

DA&FW ने छोटे और गरीब किसानों समेत सभी किसानों की कमाई बढ़ाने और खेती-बाड़ी को तरक्की देने के लिए कई बड़ी योजनाएं और प्रोग्राम शुरू किए हैं. इनमें शामिल हैं: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम).

किसानों की तरक्की के लिए कितनी योजनाएं
लोकसभा में सरकार ने किसानों की मदद के लिए कुल 28 मुख्य योजनाओं के बारे में बताया है.

  1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान): किसानों को सीधे पैसे की मदद
  2. प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई): किसानों को पेंशन
  3. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई)/ मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस): फसल खराब होने पर बीमा सुरक्षा
  4. संशोधित ब्याज सहायता योजना (MISS): किसानों को कम ब्याज पर लोन
  5. कृषि अवसंरचना कोष (AIF): खेती से जुड़े ढांचे बनाने के लिए फंड
  6. 10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों का गठन और प्रचार (FPOs): किसानों के समूह बनाकर मदद
  7. राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम): शहद उत्पादन को बढ़ावा
  8. नमो ड्रोन दीदी: महिलाओं को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग
  9. प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएनएफ): बिना केमिकल की खेती को बढ़ावा
  10. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा): फसलों का सही दाम दिलाने में मदद
  11. स्टार्ट-अप और ग्रामीण उद्यमों के लिए कृषि कोष (एग्रीश्योर): खेती से जुड़े नए बिजनेस के लिए फंड
  12. प्रति बूंद अधिक फसल (पीडीएमसी): कम पानी में ज़्यादा पैदावार
  13. कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम): खेती में मशीनों का इस्तेमाल
  14. परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई): पुरानी खेती के तरीकों को बढ़ावा
  15. मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता (एसएच एंड एफ): मिट्टी की जांच और सुधार
  16. वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (आरएडी): बारिश पर निर्भर इलाकों में खेती को बढ़ावा
  17. वानिकी कृषि: पेड़ और फसलें एक साथ उगाना
  18. फसल विविधीकरण कार्यक्रम (सीडीपी): अलग-अलग फसलें उगाना
  19. कृषि विस्तार पर उप-मिशन (एसएमएई): किसानों को नई तकनीक सिखाना
  20. बीज और रोपण सामग्री पर उप-मिशन (एसएमएसपी): अच्छे बीज उपलब्ध कराना
  21. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन (एनएफएसएनएम): खाने की सुरक्षा और पोषण
  22. कृषि विपणन के लिए एकीकृत योजना (आईएसएएम): फसलों को बेचने में मदद
  23. बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच): फल-फूलों की खेती को बढ़ावा
  24. खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ)-पाम तेल: पाम तेल उत्पादन को बढ़ावा
  25. खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ)-तिलहन: तेल वाली फसलों को बढ़ावा
  26. पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन: ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा
  27. डिजिटल कृषि मिशन: खेती में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
  28. राष्ट्रीय बांस मिशन: बांस की खेती को बढ़ावा

क्या किसानों की आय दोगुनी हुई?
सरकार ने बताया, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 75,000 किसानों की ऐसी कहानियों का एक संग्रह जारी किया है, जिन्होंने अपनी कमाई को दोगुना से भी ज्यादा कर लिया है. ये किसान कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और दूसरे मंत्रालयों/विभागों की योजनाओं को मिलाकर सही तरीके से इस्तेमाल करके सफल हुए हैं. इन कहानियों में 2016-17 से 2020-21 तक का सफर दिखाया गया है. किसानों की कमाई खेती के हर क्षेत्र में बढ़ी है, चाहे वो फसलें हों, फल-सब्जियां, पशुपालन, मछली पालन या खेती से जुड़े दूसरे काम.

इस रिपोर्ट के अनुसार, किसानों की कमाई अच्छी खासी बढ़ी है. लद्दाख में 125.44% से लेकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 271.69% तक की बढ़ोतरी देखी गई. उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में किसानों की आय में 200% से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. ज्यादातर राज्यों में किसानों की आय 150 से 200% के बीच बढ़ी है.

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की कितनी योजनाएं, कितनी कारगर?

जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, झारखंड, सिक्किम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल जैसे 14 राज्यों में 2016-17 और 2020-21 के दौरान किसानों की कुल आय में बागवानी का सबसे बड़ा योगदान रहा. हिमाचल प्रदेश, केरल और गोवा ऐसे 3 राज्य हैं जहां कुल आय में बागवानी का योगदान 60% से ज्यादा रहा.

किसानों की कमाई के अलग-अलग स्रोत
हालांकि 2016-17 से 2020-21 के बीच फसलों से होने वाली आय में थोड़ी कमी आई है, लेकिन पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और तेलंगाना जैसे 11 राज्यों में फसलें आज भी कमाई का मुख्य स्रोत हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा इस श्रेणी में सबसे आगे हैं.

असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड में 2016-17 और 2020-21 के दौरान पशुपालन किसानों की कुल आय का मुख्य स्रोत बना रहा. ओडिशा और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मछली पालन किसानों की आय का मुख्य स्रोत रहा. पश्चिम बंगाल में खेती और गैर-खेती दोनों ही किसानों की कुल आय और अतिरिक्त आय का मुख्य स्रोत बने रहे.

जिन किसानों ने योजनाओं से अतिरिक्त कमाई की, उनमें 17 राज्यों में बागवानी सबसे आगे रही. इनमें सिक्किम, मेघालय और मिजोरम जैसे 3 पूर्वोत्तर राज्य भी शामिल हैं. हिमाचल प्रदेश में बागवानी से अतिरिक्त कमाई का हिस्सा 67.72% था, जो सबसे ज्यादा है. इसके बाद लद्दाख, दिल्ली, केरल, कर्नाटक, गोवा और गुजरात का नंबर आता है.

कहां कितने किसानों ने फसल और पशुपालन से अतिरिक्त कमाई की
पंजाब (30.13%), उत्तर प्रदेश (36.92%), हरियाणा (39.35%), बिहार (40.39%), राजस्थान (42.06%), मध्य प्रदेश (48.46%) और छत्तीसगढ़ (49.01%) में अतिरिक्त कमाई का मुख्य स्रोत फसलें रहीं. वहीं असम (27.17%), उत्तराखंड (29.97%), अरुणाचल प्रदेश (36.55%), नागालैंड (42.37%), त्रिपुरा (44.49%) और मणिपुर (49.01%) में पशुपालन से किसानों की अतिरिक्त कमाई बढ़ी.

केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र) की मदद से सभी तरह की जमीन वाले किसानों को फायदा हुआ है. लेकिन, जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें ज्यादा फायदा हुआ है. लद्दाख (390.6%), झारखंड (366.59%), आंध्र प्रदेश (342.97%) और गोवा (303.02%) में भूमिहीनों की आय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है.

छोटे या बड़े… किन किसानों ने मारी बाजी!
हरियाणा में छोटे किसानों की कमाई में 298.10% तक का जबरदस्त उछाल आया. उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और असम में भी छोटे किसानों की कमाई 200% से ज्यादा बढ़ी. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, उत्तराखंड, असम और हिमाचल प्रदेश में मझोले किसानों की कमाई में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मझोले किसानों की आय में सबसे ज्यादा 273.86% की बढ़ोतरी हुई.

पुडुचेरी (405.26%) और पश्चिम बंगाल (377.39%) में बड़े किसानों की आय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई. अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर और झारखंड में भी बड़े किसानों की कमाई में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई.

गांवों में खेती करने वाले परिवारों की औसत कमाई कितनी?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) ने 2019 में एक सर्वे किया था, जिसमें गांवों में खेती करने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति का पता लगाया गया. यह सर्वे 2018-19 के कृषि वर्ष (जुलाई 2018 से जून 2019) के लिए किया गया था. सर्वे के अनुसार, गांवों में खेती करने वाले एक परिवार की महीने की औसत कमाई 10,218 रुपये है.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) के घरेलू उपभोग व्यय सर्वे (2023-24) के अनुसार, भारत में लोगों का औसत मासिक प्रति व्यक्ति खर्च (MPCE) बढ़ा है. गांव में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 4122 रुपये है, जो 2011-12 की तुलना में काफी ज्यादा है. शहर में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 6996 रुपये है, जो 2011-12 से बढ़ा है. मतलब लोगों का खर्च बढ़ा है, लेकिन गांव और शहर के खर्च में अभी भी बड़ा फासला है.

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