कैश कांड से हिल गया सुप्रीम कोर्ट?

दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के आवासीय बंगले में लगी आग ने न केवल हड़कंप मचा दिया, बल्कि कैश कांड से सुप्रीम कोर्ट तक हिल गया. जी हां, हाईकोर्ट के जज के घर पर आग बुझाने के बाद वहां से भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी ने न्यायिक हलकों में सनसनी फैला दी है. इस […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 21 मार्च 2025, 06:40 AM 4 मिनट read
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कैश कांड से हिल गया सुप्रीम कोर्ट?
Photo: UB India News Archive

दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के आवासीय बंगले में लगी आग ने न केवल हड़कंप मचा दिया, बल्कि कैश कांड से सुप्रीम कोर्ट तक हिल गया. जी हां, हाईकोर्ट के जज के घर पर आग बुझाने के बाद वहां से भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी ने न्यायिक हलकों में सनसनी फैला दी है. इस घटना ने सुप्रीम कोर्ट को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया. जज के घर करोड़ों के कैश मिलने की घटना से सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई यानी चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने तुरंत एक्शन लिया और संबंधित जज को दूसरी हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का फैसला किया.

जिस जज के घर कैश के ढेर मिले हैं, उनका नाम है जस्टिस यशवंत वर्मा. जी हां, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट फेजने का फैसला किया है.अब सवाल है कि आखिर यह कैश कांड क्या है. क्यों सुप्रीम कोर्ट को उनके ट्रांसफर लेने का फैसला लेना पड़ा? दरअसल, जब घर में आग लगी तब जस्टिस यशवंत वर्मा शहर में नहीं थे.

आग लगने के बाद उनके परिवार ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी. आग बुझाने के बाद जब पुलिस और दमकलकर्मी घर के अंदर पहुंचे, तो उन्हें एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी मिली.  देखकर ऐसा लगा कि यह बिना हिसाब-किताब की राशि हो सकती है. सूत्र के मुताबिक, दिल्ली स्थित घर में लगी आग के बाद घर में करोड़ों रुपए बिखरे पड़े थे. उस करोड़ों रुपये के बेनामी होने की संभावना है.
इस बरामदगी को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया और बात सीनियर अधिकारियों तक पहुंची. इस मामले में हो सकती है सीबीआई और ईडी की एंट्री हो सकती है.

कैश कांड से कैसे हिला सुप्रीम कोर्ट
जैसे इस बात की खबर सरकार और सीजेआई तक पहुंची बात बहुत आगे बढ़ गई थी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी सीजेआई को इस नकदी के ढेर के बारे में बताया गया. इसके बाद सीजेआई संजीव खन्ना ने इसे बेहद गंभीरता से लिया और तुरंत कॉलेजियम की बैठक बुलाई. कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि जस्टिस यशवंत वर्मा को तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर किया जाए. इसके बाद उन्हें उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया. जस्टिस वर्मा वहीं से अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट आए थे.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का मानना था कि इस गंभीर घटना को सिर्फ ट्रांसफर से नहीं सुलझाया जा सकता. उन्होंने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति वर्मा को इस्तीफा देने के लिए कहा जाए और अगर वे मना करते हैं तो उनके खिलाफ आंतरिक जांच (इन-हाउस इन्क्वायरी) शुरू की जाए. अब देखने वाली बात है कि ट्रांसफर से आगे भी एक्शन होता है या नहीं. अब जानते हैं कि आखिर जस्टिस यशवंत वर्मा कौन हैं और उनका यूपी से क्या कनेक्शन है.

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
दरअसल, जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ है. उन्होंने अपनी कानूनी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की. वकालत की शुरुआत करने के बाद वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे, जहां उन्होंने विभिन्न कानूनी मामलों में अपनी विशेषज्ञता दिखाई. उनकी निष्पक्षता और कानून के प्रति गहरी समझ के कारण उन्हें 13 अक्टूबर, 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया. इससे पहले वे इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे. जस्टिस वर्मा संवैधानिक, आपराधिक और सिविल मामलों में अपने ठोस फैसलों के लिए जाने जाते हैं. मगर हाल ही में उनके आवास पर लगी आग और वहां से नकदी की बरामदगी ने सुर्खियां बटोरीं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने का फैसला लिया.

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