नरेंद्र मोदी से पहले की सरकारें मुसलमानों से जुड़े किसी भी कानून को छेड़ने से खौफ खाती थीं !

वक्फ संशोधन बिल गुरुवार देर रात को 12 घंटे से ज्यादा लंबी की चर्चा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया। बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में यह बिल 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025, 08:12 AM 9 मिनट read
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नरेंद्र मोदी से पहले की सरकारें मुसलमानों से जुड़े किसी भी कानून को छेड़ने से खौफ खाती थीं !
Photo: UB India News Archive

वक्फ संशोधन बिल गुरुवार देर रात को 12 घंटे से ज्यादा लंबी की चर्चा के बाद राज्यसभा से भी पास हो गया। बिल के पक्ष में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में यह बिल 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ संशोधन बिल के पास होने को एक बड़ा सुधार बताया। उन्होंने शुक्रवार सुबह X पर लिखा कि यह कानून ट्रांसपेरेंसी बढ़ाएगा और गरीब-पसमांदा मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा करेगा।

पीएम मोदी ने कहा-

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वक्फ संपत्तियों में सालों से गड़बड़ी हो रही थी, जिससे खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं और गरीबों को नुकसान हुआ। यह नया कानून इस समस्या को दूर करेगा।

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इससे पहले बिल पर चर्चा के दौरान बीजू जनता दल (BJD) ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी नहीं किया था। पार्टी ने कहा था- सांसद अपनी अंतरात्मा की सुनें और वक्फ बिल पर फैसला लें।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने चर्चा के दौरान कहा- वक्फ ने एक बार ताजमहल पर भी दावा कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी।

इधर, विपक्ष वक्फ संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बाद अब कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने यह जानकारी देते हुए x पर लिखा- संविधान की रक्षा के लिए हर मंच पर आवाज उठाते रहेंगे।

वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद आज पहला जुमा है। यूपी के कई शहरों में तनाव के मद्देनजर फ्लैग मार्च निकाला गया। दिल्ली, मुंबई सहित देश के दूसरे शहरों में भी पुलिस हाई अलर्ट पर हैं।

 लोकसभा ने आधी रात के बाद वक्फ संशोधन बिल को बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष में 288 वोट और विरोध में 232 वोट पड़े। राज्यसभा में गुरुवार को इस बिल पर वोटिंग होगी। लोकसभा में 12 घंटे की मैराथन बहस हुई। लोक सभा में बिल को लेकर जो आशंकाएं जाहिर की गई थी, सरकार की नीयत पर जो शक जताया गया था, उन सारी बातों पर सरकार की तरफ से ठोस जवाब दिये गये। सबसे बड़ा इल्जाम ये था कि वक्फ बिल पास हुआ तो सरकार मुसलमानों की जायदाद पर कब्जा कर लेगी। कानून बदला तो मस्जिदों, ईदगाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाएगा। पिछले दिनों मुझे बहुत सारे मुस्लिम भाईयों-बहनों से बात करने का मौका मिला। उन्हें तो मस्जिदों में दी गई तकरीरों में मौलानाओं की बातों से यही समझाया गया कि सरकार की नीयत मुसलमानों की प्रॉपर्टी हथियाने की है, इसीलिए वक्फ का कानून बदला जा रहा है। ज्यादातर लोगों के पास कानून को पढ़ने समझने की फुर्सत नहीं है, इसीलिए वो मौलानाओं और मौलवियों की बातों पर यकीन कर लेते हैं, लेकिन बुधवार को अमित शाह ने जिस तरह से समझाया कि मुसलमानों की प्रॉपर्टी पर कब्जा करने का न कोई इरादा है, न कोई प्रावधान। अमित शाह ने मिसाल देकर समझाया कि वक्फ ने किस किस जगह सरकारी प्रॉपर्टी पर कब्जा किया हुआ है और ये भी बताया कि वक्फ की महंगी प्रॉपर्टी को किस तरह औने पौने दामों पर होटलों को और प्राइवेट लोगों को बेचा जाता है। फिर ये भी बताया कि वक्फ के पास हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति है, पर उनसे होने वाली सालाना कमाई सिर्फ 126 करोड़ रुपये है। जो इन सारी बातों को सुनेगा, उसे समझ आ जाएगा कि सरकार को वक्फ के कानून में बदलाव क्यों करना पड़ा और ये कानून बदलने से ,मस्जिदों ईदगाहों और कब्रिस्तानों को कोई खतरा नहीं है। वो मुसलमानों के हैं और उन्हीं के रहेंगे।

‘आपने उड़ता तीर क्यों पकड़ लिया?

बीती रात वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में काफी गहमागहमी देखने को मिली। यहां भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी बिल पर चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह भड़क गए। विपक्षी सांसदों ने सुधांशु त्रिवेदी के बयान को आपत्तिजनक बताया और सभापति से उनकी बातों को कार्यवाही से हटाने की मांग करने लगे। इस दौरान दिग्विजय सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह में भी जमकर तकरार हुई। दरअसल, दिग्विजय जब सुधांशु की बात पर आपत्ति जता रहे थे, तब अमित शाह ने स्थिति को संभालने के लिए सदन को जवाब दे रहे थे। इसी दौरान दिग्विजय ने गुजरात दंगों का मामला उठाया, जिस शाह ने उनकी जमकर क्लास लगाई।

क्या है मामला?
दरअसल, वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमारी सरकार ने मुस्लिम समाज के अंदर सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का काम किया है। जब ताजमहल पर वक्फ ने दावा किया, तब सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि शाहजहां के समय का फरमान लाइए, जिसमें ताजमहल के वक्फ का जिक्र हो। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि जहां-जहां खुदा है, वहां-वहां भगवान है। बाकी आप सभी खुद बुद्धिमान है। उन्होंने अपने भाषण में इशरत जहां, अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी का नाम लेते हुए कहा कि ये लोग आज विपक्षी दलों के साथ हैं। इस पर एनसीपी (शरद गुट) की सांसद फौजिया खान ने आपत्ति जताई। सभपति जगदीप धनखड़ मामले में बीचबचाव कर गहमागहमी को शांत कराया। इसके बाद सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी कहा कि इस सदन में एक सदस्य मौजूद हैं, जिन्होंने कहा था कि 26/11 के हमले आरएसएस ने कराए थे। इसे लेकर कांग्रेस के सदस्य भी आपत्ति जताने लगे। दिग्विजय सिंह अपनी सीट पर खड़े हो गए और बोले क यह बहुत अपमानजनक है, मैं इसकी निंदा करता हूं। इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आपने उड़ता तीर क्यों ले लिया? मैंने तो आपका नाम लिया ही नहीं।

सुधांशु त्रिवेदी, दिग्विजय सिंह और अमित शाह में तीखी नोकझोंक
सुधांशु त्रिवेदी और दिग्विजय सिंह की बात के बीच अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कहा कि सुधांशु ने इंडिया गठबंधन को लेकर कहा है। जिन लोगों का नाम लिया गया, क्या वह विपक्षी दलों से नहीं जुड़े थे। अहमद किस पार्टी से जुड़ा था? तीसरा मुख्तार अंसारी किससे जुड़े थे? ये सभी विपक्षी गठबंधन से जुड़े थे। इस बीच दिग्विजय सिंह ने सुधांशु त्रिवेदी के 26/11 वाले बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुझे लेकर जो कहा गया है, उसकी निंदा करता हूं। इस पर अमित शाह ने सभापति से कहा कि माइक चालू करा दीजिए और दिग्विजय सिंह कह दें कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।

‘ इनको मेरा हौवा ऐसा है कि हर जगह मैं ही दिखाई देता हूं’
अमित शाह की इस बात पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा है। मैं इस बात का खंडन करता हूं। इसके बाद कांग्रेस नेता ने गुजरात दंगों का जिक्र किया। दिग्विजय ने कहा गृह मंत्री बता दें कि गुजरात के दंगों के समय तो वे राज्य वहां के गृह मंत्री थे, बताइए कि उनमें किसकी क्या भूमिका थी। इस पर अमित शाह ने पटलवार किया। उन्होंने कहा कि जब दंगे हुए उसके 18 महीने बाद मैं गृह मंत्री बना था। इनको मेरा हौवा ऐसा है कि हर जगह मैं ही दिखाई देता हूं।

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