वन नेशन-वन इलेक्‍शन को राज्‍यसभा से पास कराना हुआ आसान !

देश में कुछ महीनों के अंतराल पर कोई न कोई चुनाव होता रहता है. इसे देखते हुए गठबंधन बनने और बिगड़ने का खेल भी जारी रहता है. बीजेपी को हाल में ही इस दिशा में बड़ी सफलता हाथ लगी है. भाजपा दक्षिण भारत के बड़े राज्‍यों में से एक तमिलनाडु में अपने बूते पर पहली […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 13 अप्रैल 2025, 07:06 AM 4 मिनट read
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वन नेशन-वन इलेक्‍शन को राज्‍यसभा से पास कराना हुआ आसान !
Photo: UB India News Archive

देश में कुछ महीनों के अंतराल पर कोई न कोई चुनाव होता रहता है. इसे देखते हुए गठबंधन बनने और बिगड़ने का खेल भी जारी रहता है. बीजेपी को हाल में ही इस दिशा में बड़ी सफलता हाथ लगी है. भाजपा दक्षिण भारत के बड़े राज्‍यों में से एक तमिलनाडु में अपने बूते पर पहली बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है. तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में चुनावी गोटी बिछाने का काम अभी से ही शुरू हो गया है. भाजपा ने प्रदेश में ऐसा कदम उठाया है, जिससे एक तीर से दो निशाने साधने वाली कहावत चरितार्थ होती है. दरअसल, बीजेपी ने AIADMK के साथ चुनावी गठजोड़ किया है. इसके लिए शुक्रवार 11 अप्रैल 2025 को अमित शाह खुद तमिलनाडु पहुंचे थे. AIADMK अब एनडीए का हिस्‍सा है और इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले समय में पार्टी सरकार में भी भागीदार बन जाए. AIADMK के बीजेपी की अगुआई वाले गठबंधन में शामिल होने का एक और बड़ा प्रभाव हुआ है. एनडीए राज्‍यसभा में और मजबूत हो गया है. ऐसे में भविष्‍य में महत्‍वाकांक्षी ‘वन नेशन, वन इलेक्‍शन’ बिल को संसद से पास कराना आसान हो जाएगा.

बीजेपी ने AIADMK के साथ तमिलनाडु विधानसभा का नाम लेकर भले ही गठबंधन किया हो, लेकिन इसका असर राज्‍यसभा पर तत्‍काल पड़ने वाला है. अन्‍नाद्रमुक के गठबंधन में शामिल होने से सत्‍तारूढ़ एनडीए को और मजबूती मिलेगी. लोकसभा में एनडीए पहले से ही काफी स्‍ट्रांग है. अन्‍नाद्रमुक के भाजपा के पाले में आने के बाद अब राज्‍यसभा का गणित भी बदल जाएगा. गौरतलब है कि पार्लियामेंट के अपर हाउस में अन्‍नाद्रमुक के चार सदस्‍य हैं. इस बात की पूरी संभावना है कि ‘वन नेशन-वन इलेक्‍शन’ से जुड़े विधेयक को संसद के अगले सत्र में पेश किया जाए. ऐसे में अन्‍नाद्रमुक के एनडीए में शामिल होने से राज्‍यसभा में भी इस विधेयक की राह पहले के मुकाबले बहुत आसान हो जाएगी. केंद्र सरकार ने कुछ दिनों पहले ही वक्‍फ बिल को संसद से पास करवाया है. अब वन नेशन-वन इलेक्‍शन की बारी है.

राज्‍यसभा का गणित
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं, जिनमें से 9 सीटें खाली हैं. इसका मतलब है कि प्रभावी संख्या केवल 236 है, ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 119 है. भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार अब इसे आसानी से पार कर सकती है. चार मौजूदा AIADMK सांसदों (सीवी षणमुगम, एम थंबीदुरई, एन चंद्रशेखरन और आर धर्मर) को जोड़ने के साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास राज्‍यसभा में 123 सांसद हो जाएंगे. यह संख्या 124 हो सकती है, क्योंकि पीएमके के अंबुमणि रामदास का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है. तमिलनाडु विधानसभा की मौजूदा स्थिति के आधार पर AIADMK को यह सीट भी मिल सकती है, जिससे राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या पांच हो जाएगी. इस बीच, भाजपा सात अन्य सांसदों (छह मनोनीत और एक निर्दलीय) के समर्थन पर भी भरोसा कर सकती है. ऐसे में यदि देखा जाए तो पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए की प्रभावी संख्या 131 है.

वन नेशन-वन इलेक्‍शन की राह कितनी असान
आंध्र प्रदेश में राज्‍यसभा की एक सीट खाली है, जो पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पास थी. अब यह मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी के पास जाएगी. टीडीपी एनडीए एक महत्वपूर्ण सहयोगी है और इसलिए सदन में गठबंधन के पक्ष में है. इसी तरह, मनोनीत सांसदों के लिए चार सीटें खाली हैं और इस बात की पूरी संभावना है कि इन सीटों के लिए उम्मीदवार भाजपा के पक्ष में होंगे. जम्मू और कश्मीर से चार सीटें खाली हैं. इन सीटों के लिए चुनाव में देरी हुई है, लेकिन जब चुनाव होंगे तो भाजपा को 90 सीटों वाले सदन में 29 विधायकों के साथ कम से कम एक सीट मिलने की उम्मीद है. भाजपा को दो सीटें भी मिल सकती हैं. इसका मतलब यह है कि भाजपा 245 सदस्यीय सदन में 141 सीटों पर भरोसा कर सकती है. साल 2014 के बाद पहली बार पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को राज्‍यसभा में स्पष्ट बहुमत मिल सकता है.

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