मुर्शिदाबाद हिंसा प्रभावित इलाकों और शरणार्थी शिविरों के दौरे पर निकले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस शुक्रवार सुबह मुर्शिदाबाद और मालदा के लिए रवाना हो गए हैं। यहां अगले 2 दिन राज्यपाल हिंसा प्रभावित इलाकों और शरणार्थी शिविरों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा- मैं जमीनी स्थिति का जायजा लूंगा। वहां जो कुछ भी हुआ चौंकाने वाला है। किसी भी कीमत पर शांति स्थापित […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025, 06:18 AM 6 मिनट read
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मुर्शिदाबाद हिंसा प्रभावित इलाकों और शरणार्थी शिविरों के दौरे पर निकले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल
Photo: UB India News Archive

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस शुक्रवार सुबह मुर्शिदाबाद और मालदा के लिए रवाना हो गए हैं। यहां अगले 2 दिन राज्यपाल हिंसा प्रभावित इलाकों और शरणार्थी शिविरों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा- मैं जमीनी स्थिति का जायजा लूंगा। वहां जो कुछ भी हुआ चौंकाने वाला है। किसी भी कीमत पर शांति स्थापित होनी चाहिए।

इससे पहले गुरुवार को CM ममता बनर्जी ने गुरुवार को राज्यपाल से दौरा स्थगित करने का अनुरोध किया था। ममता ने कहा- मैं गैर-स्थानीय लोगों से अनुरोध करूंगी कि वे अभी मुर्शिदाबाद का दौरा न करें। राज्यपाल से कुछ और दिन प्रतीक्षा करने की अपील करूंगी। स्थिति सामान्य हो रही है। मैंने स्वयं प्रभावित इलाकों का फिलहाल दौरा नहीं करने का निर्णय लिया है।

उधर, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर भी हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए मालदा रवाना हो गई हैं। इससे हिंसा पर बंगाल सरकार ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट पेश की है। इसमें ममता सरकार ने दावा किया कि हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में स्थिति अब नियंत्रण में हैं। जस्टिस सौमेन सेन और राजा बसु चौधरी की बेंच ने हिंसा प्रभावित इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

मुर्शीदाबाद हिंसा में अबतक क्या-क्या हुआ…

17 अप्रैलः ममता सरकार ने हिंसा पर रिपोर्ट पेश की जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की बेंच नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई की केंद्र की ओर से पेश हुए वकील ने संवेदनशीलता को देखते हुए मुर्शिदाबाद में सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की तैनाती बढ़ाने की मांग रखी।

वहीं, ममता सरकार ने एक रिपोर्ट पेश की। इसमें ममता सरकार ने दावा किया कि हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में स्थिति अब नियंत्रण में हैं। कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य सभी पक्षों को चेतावनी दी कि कोई भी भड़काऊ बयानबाजी न करे। कोर्ट ने कहा, “कृपया कोई भी भड़काऊ भाषण न दें। यह निर्देश सिर्फ किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है।”

विरोध प्रदर्शन की इजाजत, लेकिन राज्य को चेतावनी

हालांकि कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रहे। लेकिन अगर राज्य सरकार इसकी अनुमति देती है, तो वह खुद समस्या को आमंत्रण दे रही है।”

हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए बनेगी कमेटी

कोर्ट ने कहा कि हिंसा से प्रभावित लोगों की पहचान और उनके लिए भोजन और रहने की व्यवस्था के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। यह समिति राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग (WBHRC) और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (SLSA) के प्रतिनिधियों से मिलकर बनेगी।

16 अप्रैलः सीएम ममता ने ने इमामों की बैठक की

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इमामों की बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा- मुर्शिदाबाद में हुआ दंगा प्री प्लांड था। इसमें भाजपा, BSF और सेंट्रल एजेंसीज की मिलीभगत थी। बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश में बुलाकर ये दंगे करवाए गए।

15 अप्रैलः हिंसा में बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आया

वक्फ कानून के विरोध के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा में बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आया। न्यूज एजेंसी PTI ने बताया कि मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में बांग्लादेशी कट्टरपंथी शामिल थे, जिन्हें एक राजनीतिक दल के स्थानीय नेताओं की मदद मिली थी। बांग्लादेश के दो कट्टरपंथी संगठन- जमात-उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के सदस्यों ने इसे अंजाम दिया था। 

14 अप्रैलः 24 परगना में पुलिस की गाड़ियां जलाईं

वक्फ कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। बसंती हाईवे पर बैरमपुर में पुलिस ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के कार्यकर्ताओं को लेकर जा रही एक गाड़ी को रोका, जिससे अशांति फैल गई

13 अप्रैलः धुलियान से 500 लोगों का पलायन

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, नॉर्थ 24 परगना, हुगली और मालदा जिलों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। गाड़ियां जलाईं, दुकानों-घरों में तोड़फोड़ कर लूट भी की गई। इधर, मुर्शिदाबाद के धुलियान से करीब 500 लोग पलायन कर गए।  

12 अप्रैलः हिंसक भीड़ ने पिता-बेटे की पीट-पीटकर हत्या की

वक्फ कानून के विरोध में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में लगातार दूसरे दिन हिंसा हुई। अब तक तीन की मौत हो गई है। हिंसक भीड़ ने पिता-बेटे की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इनकी पहचान हरगोविंद दास (पिता) और चंदन दास (बेटे) के रूप में हई। दोनों हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते थे।

11 अप्रैलः मुर्शिदाबाद में विरोध हिंसक हुआ, 3 की मौत

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) देशभर में ‘वक्फ बचाव अभियान’ शुरू किया। इसके चलते देशभर में मुसलमान सड़कों पर उतर आए। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने बसें जलाईं, पथराव किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 3 लोगों की गोली लगने से मौत हुई।  

10 अप्रैलः हिंसा फैलाने के लिए 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया

मुर्शिदाबाद में 8 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से 8 आरोपियों को आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जंगीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP), आनंद रॉय ने बताया कि हिंसा को लेकर पुलिस ने अपने आप संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है।  

9 अप्रैलः ममता बोलीं- बंगाल में वक्फ कानून लागू नहीं होगा

CM ममता बनर्जी ने कहा कि नया वक्फ कानून पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक पश्चिम बंगाल में ममता दीदी है, मुस्लिम समुदाय की संपत्ति की रक्षा करेगी। उन्होंने कहा- कुछ लोग पूछते हैं कि मैं हर धर्म के स्थानों पर क्यों जाती हूं। मैं पूरी जिंदगी जाऊंगी। चाहे कोई गोली मार दे, मुझे एकता से अलग नहीं किया जा सकता।  

8 अप्रैलः मुर्शिदाबाद में हिंसा भड़की

मुर्शिदाबाद में हिंसा भड़क गई। कई वाहनों को प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इसमें पुलिस की गाड़ियां भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों से झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके। पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया।

 

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