संविधान में संसद से ऊपर कोई संस्था नहीं……….

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर न्यायापलिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्रों को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मंगलवार को कहा कि संविधान की मूल भावना के ‘अंतिम स्वामी’ चुने हुए जनप्रतिनिधि होते हैं और संसद से ऊपर कोई भी नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 22 अप्रैल 2025, 10:10 AM 3 मिनट read
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संविधान में संसद से ऊपर कोई संस्था नहीं……….
Photo: UB India News Archive

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर न्यायापलिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्रों को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मंगलवार को कहा कि संविधान की मूल भावना के ‘अंतिम स्वामी’ चुने हुए जनप्रतिनिधि होते हैं और संसद से ऊपर कोई भी नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई भी संवैधानिक पदाधिकारी जब कुछ कहता है, तो वह बात देश के सर्वोच्च हित को ध्यान में रखकर कही जाती है.

उपराष्ट्रपति ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर आलोचना करने वालों पर निशाना साधा. सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने हाल में कहा था कि राज्यपाल अगर कोई विधेयक राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को उस पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धनखड़ ने कहा था कि न्यायपालिका ‘सुपर संसद’ नहीं बन सकती और वह कार्यपालिका (सरकार) के काम में दखल नहीं दे सकती.

‘संसद सबसे सर्वोच्च’
दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के तहत किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति की बात हमेशा राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होती है. धनखड़ ने यह भी कहा कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि संवैधानिक पद सिर्फ औपचारिक या दिखावटी होते हैं, लेकिन यह गलत सोच है. उन्होंने कहा कि संविधान में संसद से ऊपर किसी भी संस्था की कल्पना नहीं की गई है. संसद सबसे सर्वोच्च है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे यह बात समझ में आती है कि कुछ लोगों ने हाल में यह विचार व्यक्त किया है कि संवैधानिक पद औपचारिक और सजावटी हो सकते हैं. इस देश में हर किसी की भूमिका- चाहे वह संवैधानिक पदाधिकारी हो या नागरिक – के बारे में गलत समझ से कोई भी दूर नहीं हो सकता.’ उन्होंने यह भी कहा कि संविधान में संसद से ऊपर किसी भी प्राधिकारी की कल्पना नहीं की गई है. उन्होंने जोर देकर कहा, ‘संसद सर्वोच्च है.’

खुद को ‘सुपर संसद’ न समझें

सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले पर चिंता जताते हुए जिसमें राष्ट्रपति को तय समय में फैसला लेने का निर्देश दिया गया है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में ऐसा लोकतंत्र नहीं होना चाहिए जिसमें जज कानून बनाएं, सरकार का काम करें और खुद को ‘सुपर संसद’ समझें.

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, ‘हाल में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है… हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी कल्पना नहीं की थी. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा गया है और अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह (विधेयक) कानून बन जाएगा.’

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला असंवैधानिक है जिसमें राष्ट्रपति को समय सीमा में फैसला लेने के लिए कहा गया है और अगर फैसला नहीं हुआ तो विधेयक खुद-ब-खुद कानून बन जाएगा.

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