वक्फ एक्ट पर आज सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रही सरकार………….

देश की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार 21 मई को एक बार फिर केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए वक्फ एक्ट पर सुनवाई शुरु हो गई है। वक्फ संशोधन कानून 2025 की संवैधानिकता की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 21 मई 2025, 08:09 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
वक्फ एक्ट पर आज सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रख रही सरकार………….
Photo: UB India News Archive

देश की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार 21 मई को एक बार फिर केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए वक्फ एक्ट पर सुनवाई शुरु हो गई है। वक्फ संशोधन कानून 2025 की संवैधानिकता की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। आज की सुनवाई में केंद्र सरकार अपना पक्ष रख रही है। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि, ये ऐसा मामला नहीं, जहां मंत्रालय ने एक बिल बनाया और बिना सोचे समझे वोटिंग कर दी। हम एक बहुत पुरानी समस्या खत्म करने का काम कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत 1923 में हुई थी।

जनरल मेहता ने कहा- कुछ याचिकाकर्ता पूरे मुस्लिम समुदाय की ओर से नहीं बोल सकते। आपके पास जो याचिकाएं आई, वे ऐसे लोगों ने दायर की हैं जो सीधे इस कानून से प्रभावित नहीं हैं। किसी ने ये नहीं कहा कि, संसद को ये कानून बनाने का अधिकार नहीं था। जेपीसी की 96 बैठकें हुईं और हमें 97 लाख लोगों से सुझाव मिले, जिस पर बहुत सोच-समझकर काम किया गया है।

केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि संसद ने सोच-विचार कर कानून बनाया और कानून बनाए जाने से पहले लाखों लोगों के सुझाव लिए गए. एसजी मेहता ने कहा कि कुछ लोग खुद को पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि नहीं बता सकते और वक्फ कानून में 1923 से ही कमी चली आ रही थी, जिसे दुरुस्त किया गया है.

मंगलवार को भी इस मामले में सुनवाई हुई थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने दलील दीं. आज एसजी तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कहा कि 1923 से 1995 के कानून तक व्यवस्था थी कि सिर्फ मुस्लिम ही वक्फ कर सकता था, लेकिन साल 2013 में चुनाव से पहले कानून बना दिया गया कि कोई भी वक्फ कर सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे सुधारा है और वक्फ करने के लिए कम से कम 5 साल से इस्लाम धर्म का पालन करने की शर्त रखी गई है.

एसजी तुषार मेहता ने कहा, ‘अगर कोई किसी जगह का इस्तेमाल कर रहा है, उसके पास उस जगह के कागज नहीं हैं और उसका दावा है कि यह अनरजिस्टर्ड वक्फ बाय यूजर है. सरकार के रिकॉर्ड में संपत्ति सरकारी है तो क्या इसकी जांच नहीं होगी? याचिकाकर्ताओं ने कल सुनवाई में संपत्ति के रजिस्ट्रेशन पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि 100-200 साल पुराने वक्फ के कागजात कहां से आएंगे,

एसजी तुषार मेहता की दलील पर मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई ने कहा कि लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार खुद ही अपने दावे की जांच करेगी. तुषार मेहता ने कहा, ‘भू-राजस्व रिकॉर्ड की जांच रेवेन्यू अधिकारी करेंगे. वह कोई अंतिम स्वामित्व नहीं तय कर देंगे. प्रभावित पक्ष के पास कोर्ट जाने का रास्ता है.’

एसजी मेहता ने कहा कि लोगों को कलेक्टर की जांच से दिक्कत थी, तो दूसरा अधिकारी तय किया गया. वह सिर्फ रेवेन्यू रिकॉर्ड की जांच कर संशोधन करेगा. सीजेआई ने एसजी से पूछा कि यानी सिर्फ कागजों में एंट्री होगी. तुषार मेहता ने सीजेआई गवई के सवाल पर कहा, ‘जी हां, अगर सरकार को स्वामित्व चाहिए होगा तो वह भी सिविल केस दाखिल करेगी.’

याचिकाकर्ताओं को इस पर भी आपत्ति थी कि कोई भी वक्फ संपत्ति पर आपत्ति जता सकता है और फिर वह संपत्ति सरकार की है या नहीं, ये भी सरकार का अधिकारी ही तय करेगा. उन्होंने कहा कि संपत्ति पर विवाद शुरू होते ही वह सरकार के पास चली जाएगी यानी वक्फ नहीं रहेगी और अगर बोर्ड कोर्ट जाता है तो जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता वह संपत्ति सरकार की ही रहेगी.

कल की सुनवाई में क्या हुआ?

कल कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं की तमाम दलीलें सुनी और याचिकाकर्ताओं के वकील से तमाम सवाल भी हुए, लेकिन कोर्ट इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी कि, याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत दी जाए या नहीं। बता दें कि, वक्फ कानून की सुनवाई को लेकर देशभर के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी चर्चाओं का बाजार खासा गर्म है।

आपको बता दें कि, एक दिन पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि, हर कानून के पक्ष में संवैधानिकता की धारणा होती है, इसलिए राहत के लिए बहुत ठोस और स्पष्ट कारण पेश करने होते हैं। कोर्ट ने कहा कि, अदालत तबतक हस्तक्षेप नहीं करती, जबतक मामला स्पष्ट ना हो। जिसपर याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कानून को मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन और वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाला बताया। साथ ही कोर्ट से इसपर अंतरिम रोक लगाने की मांग की।

केंद्र सरकार ने कही ये बात

वहीं, दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि, यह कानून एक धर्मनिरपेक्ष अवधारणा है और संवैधानिकता की धारणा को देखते हुए रोक नहीं लगाई जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कानून का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं से वक्फ के पंजीकृत करने की कानूनी अनिवार्यता और पंजीकृत न करवाने की कानूनी परिणाम के बारे में सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा- पहले से ही कानून में वक्फ को रजिस्टर्ड करने की बात है और जो वक्फ पहले से रजिस्टर है, उनपर असर नहीं पड़ेगा।

‘नया कानून धार्मिक संपत्तियों के अधिकारों का उल्लंघन’

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि, सरकार की ओर से लाया जा रहा नया कानून वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए लाया गया है। ये धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने संशोधित कानून के वक्त बाय यूजर को खत्म करने के साथ केंद्रीय वक्फ परिषद में और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर मुसलमानों को शामिल करने और वक्फ कराने वाले के 5 साल के प्रैक्टिस होने के प्रावधान को गलत ठहराया।

इन मुद्दों पर राहत की मांग

याचिकाकर्ता पक्ष जिन तीन मुद्दों पर राहत या रोक की मांग कर रहा है, उनमें पहला वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाय डीड है। इसका मतलब वक्त घोषित संपत्तियों को गैर अधिसूचित करने से संबंधित है। वहीं, दूसरा मुद्दा राज्य सरकार वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद संरचना से संबंधित है, जबकि याचिका में तीसरा मुद्दा वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों को शामिल करने के विरोध में है। आपको बता दें कि, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस ए.जी मसीह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

Categories: कानून
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
क्या हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा है?
खास खबर

क्या हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा है?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है. हाई कोर्ट ने यह फैसला एक मुस्लिम लड़की की याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. अदालत ने कहा कि वह यह साबित करने के लिए सबूत […]

UB India News25 अग॰
पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..
अध्यात्म

पटना हाईकोर्ट का महावीरी झंडा मेला पर सख्त फैसला..

पटना हाईकोर्ट ने धार्मिक जुलूस को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आस्था और कानून-व्यवस्था के बीच की सीमा को साफ करता है. कोर्ट ने कहा कि धर्म मानने और धार्मिक गतिविधियां करने का अधिकार संविधान देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी जुलूस या धार्मिक आयोजन को बिना शर्त अनुमति […]

UB India News22 अग॰
अगर आरोप इतने गंभीर थे, तो सीबीआई ने अब तक स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की…
खास खबर

अगर आरोप इतने गंभीर थे, तो सीबीआई ने अब तक स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की…

आय से अधिक संपत्ति मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है. राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने याचिका की कॉपी शिकायतकर्ता को सौंपने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा है कि वह 20 अगस्त को […]

UB India News17 अग॰
एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….
कानून

एक व्यापक ‘डिजिटल एथिक्स कोड’ और ‘डिजिटल पेशेवर आचरण संहिता’ बनाने की मांग……………….

वकीलों द्वारा सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल, पेशेवर नैतिकता, विज्ञापन, क्लाइंट बनाने की कोशिश और कानूनी पेशे के व्यावसायीकरण से जुड़े अहम सवाल खड़े करता है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से प्रमोशनल रील्स, पैसे कमाने वाले कानूनी कंटेंट, इन्फ्लुएंसर के साथ मिलकर काम करने, पेड विज्ञापनों और क्लाइंट बनाने के लिए […]

UB India News17 अग॰
जस्टिस वर्मा घर में मिले नोटों पर नहीं दे पाए जवाब………………
खास खबर

जस्टिस वर्मा घर में मिले नोटों पर नहीं दे पाए जवाब………………

लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया है। उनके सरकारी आवास से बिना हिसाब-किताब वाला कैश मिलने के आरोपों के बाद उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट में कई ऐसी बातें बताईं, जिनसे उन्हें दोषी ठहराया गया। […]

UB India News12 अग॰
जज वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बनेंगे
पटना

जज वी. कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बनेंगे

पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है. 6 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में यह फैसला लिया […]

UB India News10 अग॰
दो दशक से लंबित प्रोन्नति और वेतन विसंगति पर न्यायिक कर्मचारियों का आक्रोश, गर्दनीबाग में जुटे राज्यभर के कर्मचारी…..
पटना

दो दशक से लंबित प्रोन्नति और वेतन विसंगति पर न्यायिक कर्मचारियों का आक्रोश, गर्दनीबाग में जुटे राज्यभर के कर्मचारी…..

बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक कर्मचारियों की वर्षों से लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर रविवार को पटना के गर्दनीबाग में बिहार व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ के बैनर तले महत्वपूर्ण सभा आयोजित की गई। सभा में राज्यभर से जुड़े न्यायिक कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और करीब दो दशकों से लंबित प्रोन्नति, वेतन विसंगति, […]

UB India News9 अग॰
बापू सभागार में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर पूर्वी जोन का सम्मेलन……….
पटना

बापू सभागार में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर पूर्वी जोन का सम्मेलन……….

पटना के बापू सभागार में शनिवार को मानव तस्करी (Human Trafficking) को लेकर पूर्वी जोन का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में बिहार के साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा […]

UB India News8 अग॰
कल जेन अल्फा, बीटा आ जाएगी…………..
खास खबर

कल जेन अल्फा, बीटा आ जाएगी…………..

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को किसी राजनीतिक फैसले के आधार पर वापस लिया गया, तो यह भविष्य के आंदोलनों के लिए खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, कल जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा भी आएगी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट […]

UB India News5 अग॰