बिहार के मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर 120 आधार…………..

बिहार में हाल ही में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है. जहां राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है, वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला है. किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है. यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 10 जुलाई 2025, 05:31 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
बिहार के मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर 120 आधार…………..
Photo: UB India News Archive

बिहार में हाल ही में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है. जहां राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है, वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला है. किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है. यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी है. इसी तरह कटिहार (44%) में 123%, अररिया (43%) में 123%, और पूर्णिया (38%) में 121% आधार सैचुरेशन दर्ज किया गया है. यानी, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड! यह सवाल उठता है कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए बनाए गए हैं और क्यों? इस मुद्दे ने न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी चर्चा को तेज कर दिया है, जहां ममता बनर्जी की सरकार पहले से ही आधार कार्ड डिएक्टिवेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र से उलझी हुई है. क्या यह विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा है?

आधार सैचुरेशन का रहस्य
बिहार के सीमांचल क्षेत्र-किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया में मुस्लिम आबादी 38 फीसदी से 68 फीसदी तक है. इन जिलों में आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई सवाल खड़े करता है. सामान्य तौर पर आधार कार्ड एक व्यक्ति-एक कार्ड की नीति पर आधारित है. लेकिन जब आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड मौजूद हैं, तो यह संकेत देता है कि या तो डुप्लिकेट आधार कार्ड बनाए गए हैं या फिर गैर-नागरिकों को भी आधार कार्ड जारी किए गए हैं.

सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है. ये जिले पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे हैं और बांग्लादेश भी ज्यादा दूर नहीं है. इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इन जिलों में आधार कार्ड की अधिकता का कारण बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं, जिन्हें स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों के समर्थन से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं. हालांकि, यह दावा विवादास्पद है और इसके लिए ठोस सबूतों की कमी है. फिर भी, ये आंकड़े निश्चित रूप से चिंता का विषय हैं.

विपक्ष खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जोर दिया है, लेकिन इसे नागरिकता का सबूत मानने के खिलाफ भी आवाज उठाई है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही गई. दूसरी ओर कुछ लोग तर्क देते हैं कि विपक्ष आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अवैध आप्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके. यह आरोप विशेष रूप से बीजेपी और उसके समर्थकों द्वारा लगाया जा रहा है जो कहते हैं कि सीमांचल में अधिक आधार सैचुरेशन चुनावी खेल का हिस्सा है.

पश्चिम बंगाल की स्थिति

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड डिएक्टिवेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधार डिएक्टिवेशन को SC, ST और OBC समुदायों के खिलाफ साजिश करार दिया था. ममता ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार वैकल्पिक आधार कार्ड जारी करेगी, जिसे केंद्र ने गैर-कानूनी बताया. बिहार के सीमांचल के आंकड़ों ने पश्चिम बंगाल में भी सवाल उठाए हैं, जहां उत्तर दिनाजपुर और मालदा जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है और अवैध आप्रवासन का मुद्दा गर्माया हुआ है. ममता की सरकार पर आरोप है कि वह अवैध आप्रवासियों को संरक्षण दे रही है, जिससे आधार सैचुरेशन की समस्या और जटिल हो रही है.चुनाव आयोग की भूमिका और चुनौतियां

चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए SIR शुरू किया है, जिसमें आधार को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा. सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं, जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ गया है. यह स्थिति गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों खासकर मुस्लिम आबादी को सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकती है. लेकिन साथ ही, यह सवाल भी उठता है कि क्या अतिरिक्त आधार कार्डों का इस्तेमाल गैर-कानूनी मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया गया है.
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰