शेयर बाजार की आज हुई मिलीजुली शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक फिसला

ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले रूख के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सोमवार को मामूली गिरावट के साथ खुले. निफ्टी पर सन फार्मा, SBI लाइफ इंश्योरेंस, अपोलो हॉस्पिटल्स, पावर ग्रिड कॉर्प, टाइटन कंपनी के शेयर फायदे में रहे, जबकि इंफोसिस, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा मोटर्स के शेयर नुकसान […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 14 जुलाई 2025, 08:57 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
शेयर बाजार की आज हुई मिलीजुली शुरुआत, सेंसेक्स 340 अंक फिसला
Photo: UB India News Archive

ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले रूख के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सोमवार को मामूली गिरावट के साथ खुले. निफ्टी पर सन फार्मा, SBI लाइफ इंश्योरेंस, अपोलो हॉस्पिटल्स, पावर ग्रिड कॉर्प, टाइटन कंपनी के शेयर फायदे में रहे, जबकि इंफोसिस, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा मोटर्स के शेयर नुकसान में रहे. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 201.02 अंक यानी कि 0.24 परसेंट की गिरावट के साथ 82,311.99 के लेवल पर कारोबार कर रहा है. जबकि निफ्टी 42.15 अंक यानी कि 0.19 परसेंट टूटकर 25,102.25,102.80 के लेवल पर है.

शुक्रवार को बाजार में गिरावट

इस दिन सेंसेक्स 689.81 अंक या 0.83 परसेंट की गिरावट के साथ 82,500.47 पर और निफ्टी 205.40 अंक या 0.81 परसेंट की गिरावट के साथ 25,149.85 पर बंद हुआ. BSE मिडकैप इंडेक्स में भी 0.5 परसेंट की गिरावट आई, जबकि BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.7 परसेंट  की गिरावट आई, जिससे दो दिनों की बढ़त टूट गई. जहां तक रही आज की बात, तो 14 जुलाई सोमवार को वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 50 के गिरावट के साथ खुलने की उम्मीद है. आज सुबह Gift निफ्टी में भी गिरावट दिख रही है, जो बाजार में सुस्ती के संकेत दे रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 25,173.50 के आसपास कारोबार कर रहा, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से 48.4 अंक कम है.

बाजार में दिख सकता है इन चीजों का असर

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी पर कई चीजों का असर दिख सकता है, जिनमें जून 2025 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय यूनियन और मेक्सिको पर 30 परसेंट टैरिफ लगाने का फैसला, चीन के जून के व्यापार आंकड़े, HCLTech के पहली तिमाही के नतीजे, संस्थागत निवेश के रुझान, प्राथमिक बाजार की गतिविधियां और कमजोर वैश्विक संकेत शामिल हैं.

BSE, NSE के शेयर होल्डर्स को भारी नुकसान

अमेरिका की ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट (Jane Street) पर सेबी (SEBI) की कड़ी कार्रवाई के बाद महज एक महीने के अंदर बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) के शेयरधारकों को 1.4 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ा है. इसके अलावा सेबी द्वारा डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (F&O) में पाई जाने वाली गड़बड़ियों की सफाई, घटता हुआ ट्रेडिंग वॉल्यूम और विश्लेषकों की निगेटिव रिपोर्ट्स भी प्रमुख कारण रहे हैं. इन दोनों एक्सचेंज के शेयरों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है.
SEBI ने 3 जुलाई को जेन स्ट्रीट पर भारत में ट्रेडिंग पर रोक लगाई और 4,840 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी. आरोप है कि इस फर्म ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से निफ्टी बैंक इंडेक्स (Nifty Bank Index) में हेरफेर किया. इसके बाद मार्केट में भारी घबराहट देखी गई और डेरिवेटिव्स का टर्नओवर तेजी से गिरा. कई ब्रोकरेज हाउस ने एक्सचेंज के शेयरों को डाउनग्रेड करना शुरू कर दिया, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आगे और सख्त नियम आ सकते हैं.

BSE और NSE के शेयरों में बड़ी गिरावट
इकॉनमिस्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसई के शेयर 10 जून को 3,030 रुपये के हाई पर थे, लेकिन अब गिरकर अब 2,376 रुपये पर आ गए हैं. इसके मार्केट कैप में 26,600 करोड़ रुपये की कमी आई है. वहीं, एनएसई के शेयर हालांकि अभी तक लिस्ट नहीं हुए हैं, लेकिन प्राइमरी मार्केट में 21 जून को 2,590 रुपये थे, जो अब 2,125 रुपये पर पहुंच गए हैं. ऐसा होने से इसे 1.15 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल लॉस हुआ है. ये आंकड़े WWIPL द्वारा दिए गए हैं, जो अनलिस्टेड शेयरों की जानकारी देता है.

IIFL Capital ने बीएसई को डाउनग्रेड करते हुए कहा कि जेन स्ट्रीट पर बैन, अन्य कंपनियों पर निगरानी और रिटेल निवेशकों के बढ़ते नुकसान के कारण आने वाले समय में एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है. मोतीलाल ओसवाल ने भी बीएसई को न्यूट्रल रेटिंग दी थी. उसे लग रहा है कि बीएसई अपनी बाजार हिस्सेदारी खो सकता है, खासकर वीकली कांट्रैक्ट्स की एक्सपायरी शिफ्ट के बाद.

निफ्टी के वीकली एक्यपायरी पर तुरंत असर

सेबी की कार्रवाई का असर तुरंत दिखा. जिस दिन निफ्टी के वीकली कांट्रैक्ट्स की पहली एक्सपायरी हुई, उस दिन NSE का कुल टर्नओवर पिछले एक्सपायरी डे के मुकाबले 21 फीसदी गिर गया. इंडेक्स ऑप्शंस का टर्नओवर 601 ट्रिलियन रुपये से घटकर 472.5 ट्रिलियन रुपये पर आ गया. NSE का प्रीमियम टर्नओवर भी मार्च के बाद सबसे कम रहा, जो कि इस साल के औसत से 40 फीसदी कम था. 

बीएसई में भी जुलाई के पहले आठ ट्रेडिंग दिनों में ऑप्शन प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) में 25 फीसदी की गिरावट आई, जो 105 बिलियन रुपये रहा, जबकि जून में यह काफी अधिक था. IIFL ने अपने वॉल्यूम अनुमानों को 6-8 फीसदी तक घटाया है, जिससे FY26-FY28 की EPS (कमाई प्रति शेयर) अनुमान में भी 3-5 फीसदी की कटौती की गई.

2024 vs 2025: खुदरा निवेशकों का नुकसान बढ़ा

सेबी के नए आंकड़ों के अनुसार, FY25 में भारतीय रिटेल निवेशकों को डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में 1.05 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. FY24 में औसतन हर व्यक्ति का नुकसान 86,728 रुपये था, जो FY25 में बढ़कर 1,10,069 रुपये हो गया. यानी 27% की बढ़ोतरी देखी गई है. FY24 में 86.3 लाख रिटेल ट्रेडर थे, जबकि FY25 में यह संख्या 96 लाख तक पहुंच गई.

IIFL ने कहा कि डेरिवेटिव वॉल्यूम का 55-60 फीसदी हिस्सा को-लोकेशन सर्वर से आता है, जिसका इस्तेमाल हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स करते हैं. इन पर भी निगरानी की संभावना है, जिससे वॉल्यूम और गिर सकता है.
SEBI ने नवंबर 2024 में जो कड़े नियम लागू किए थे, उसका असर अब दिखने लगा है. दिसंबर 2024 से मई 2025 तक का डेटा बताता है कि इंडेक्स ऑप्शन टर्नओवर प्रीमियम टर्म में साल-दर-साल 9 फीसदी और नॉशनल टर्म में 29 फीसदी घटा है. निजी ट्रेडर्स का टर्नओवर 11 फीसदी गिरा है और एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या में 20 फीसदी की कमी आई है.
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का अनुमान है कि जेन स्ट्रीट का BSE टर्नओवर में सिर्फ 1 फीसदी योगदान था, यानी सीधे तौर पर इसकी आय पर ज्यादा असर नहीं है. फिर भी, BSE द्वारा अपनी एक्सपायरी शिफ्ट करने से इसके वॉल्यूम में 10-12 फीसदी की गिरावट आने की संभावना जताई गई है. IIFL ने BSE के शेयर का वैल्यूएशन घटाकर ₹2,200 किया है, जिससे 11 फीसदी की संभावित गिरावट का संकेत मिलता है.
IIFL ने कहा कि अभी बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी और इससे एक्सचेंज की कमाई व वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, लंबी अवधि में यह सेक्टर अच्छी कमाई दे सकता है और 15-20 फीसदी तक की अर्निंग अपग्रेड की संभावना है.
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰