यमन में टली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी, कल होनी थी सजा

यमन से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पता चला है कि यमन के स्थानीय अधिकारियों ने निमिषा प्रिया को मिलने वाली फांसी की सजा को स्थगित कर दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले यमन में निमिषा प्रिया को बुधवार 16 जुलाई, […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 15 जुलाई 2025, 08:32 AM 7 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
यमन में टली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी, कल होनी थी सजा
Photo: UB India News Archive

यमन से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पता चला है कि यमन के स्थानीय अधिकारियों ने निमिषा प्रिया को मिलने वाली फांसी की सजा को स्थगित कर दिया है। आपको बता दें कि इससे पहले यमन में निमिषा प्रिया को बुधवार 16 जुलाई, 2025 को फांसी की सजा देने का फैसला किया गया था।

सूत्रों के मुताबिक निमिषा मामले में ग्रांड मुफ्ती अबूबकर पीड़ित अब्दो महदी के परिवार से बात कर रहे हैं. पहले दिन की बातचीत सकारात्मक रही, जिसके कारण आगे भी बातचीत की गुंजाइश बची है. इसे देखते हुए यह फांसी टालने का फैसला किया गया है.

यमन के न्याय विभाग ने इससे पहले जेल ऑथोरिटी से 16 जुलाई को निमिषा प्रिया के सजा ए मौत पर अमल लाने के लिए कहा था. निमिषा पर अपने बिजनेस पार्टनर अब्दो महदी की हत्या का आरोप है.

निमिषा को फांसी से बचाने के लिए आगे आने वाले मुस्लिम धर्मगुरु कौन हैं?

भारत के ग्रांड मुफ्ति कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार आगे आए हैं और निमिषा को बचाने के लिए अपनी कोशिशें तेज की. ग्रांड मुफ्ती के अनुरोध पर यमन में निमिषा को माफी देने पर विचार-विमर्श चल रहा है. जिसका नेतृत्व यमन के प्रसिद्ध सूफी विद्वान शेख हबीब उमर कर रहे हैं. शेख हबीब के प्रतिनिधि हबीब अब्दुर्रहमान अली मशहूर ने उत्तरी यमन में सोमवार को यमनी सरकार के प्रतिनिधि, आपराधिक न्यायालय के सर्वोच्च न्यायाधीश, तलाल के भाई और आदिवासी नेताओं से मुलाकात की है. जिसके बाद हर कोई जनना चाह रहा है कि ग्रांड मुफ्ति कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार कौन हैं?

कौन हैं भारत के ग्रांड मुफ्ती अबूबकर?

शेख अबूबकर अहमद, जिन्हें कंठपुरम एपी अबूबकर मुसलियार के नाम से भी जाना जाता है, भारत के दसवें ग्रांड मुफ्ती हैं, जो भारत में सुन्नी मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख लोगों में से एक हैं. अबूबकर अहमद का जन्म केरल के कोझिकोड में 22 मार्च, 1931 को हुआ था. उन्हें 24 फरवरी, 2019 को अखिल भारतीय तंज़ीम उलेमाए इस्लाम की ओर से नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित गरीब नवाज़ शांति सम्मेलन में ग्रांड मुफ्ती चुना गया. उन्होंने ये पद जुलाई 2018 में 9वें ग्रांड मुफ्ती, मुहम्मद अख्तर रजा खान कादरी के निधन के बाद ग्रहण है. वह इस पद के लिए दक्षिण भारत से आने वाले पहले मौलवी हैं.

क्या काम करते हैं भारत के ग्रांड मुफ्ती?

भारत के ग्रांड मुफ्ती देश ही नहीं बल्कि दुनिया में एक खास अहमियत रखते हैं. उनकी भूमिका फतवे (इस्लामी कानूनी राय) जारी करने और धार्मिक एवं सामाजिक मामलों पर मार्गदर्शन प्रदान करने से संबंधित है. शेख अबू बक्र शांति के मुखर समर्थक रहे हैं, उन्होंने 2014 में ISIS के खिलाफ शुरुआती फतवे जारी किए थे और भारत के विविध समाज में सेक्यूलर भावना को बढ़ावा देते रहे हैं.

दुनिया भर में बनाई है पहचान

अबूबकर अहमद ने अरबी, उर्दू और मलयालम में 60 से ज़्यादा किताबें लिखी हैं और 12 हजार से ज़्यादा प्राथमिक विद्यालयों, 11 हजार माध्यमिक विद्यालयों और 638 कॉलेजों सहित कई शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों का संचालन किया है.

उन्हें सामजित काम के लिए 2021 में UAE के गोल्डन वीजा, 2023 में मलेशिया के तोकोह माल हिजरा पुरस्कार और 2008 में सऊदी अरब के इस्लामिक हेरिटेज पुरस्कार जैसे पुरस्कार से नवाजा गया है. वह दुनिया के 500 इंफ्यूलेंसर मुस्लिम की सूची में भी रह चुके हैं. साथ ही उन्होंने कई वैश्विक सम्मेलनों में भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें पोप फ्रांसिस जैसी हस्तियों के साथ बैठकें और शेख जायद अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं. जिससे उनके कद का अंदाजा लगाया जा सकता है.

यमन में मौत की सज़ा किन अपराधों पर दी जाती है?

यमन में सज़ा-ए-मौत सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं है. वहां का दंड संहिता कई तरह के अपराधों पर मृत्युदंड की सज़ा देती है, जिनमें कई ऐसे भी हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के खिलाफ माने जाते हैं. इनमें शामिल हैं:

  • किसी मुसलमान की हत्या
  • आगजनी या बम धमाके
  • सार्वजनिक संचार या परिवहन को नुकसान
  • धर्मत्याग (apostasy)
  • लूटपाट या डकैती
  • व्यभिचार (adultery)
  • समलैंगिकता
  • वेश्यावृत्ति
  • देशद्रोह

यमन में सजा एक मौत के फरमान को सुबह और दोपहर के बीच के समय में अमल में लाया जाता है. ताकि स्पष्ट रूप से गवाह मौजूद रहे. शुक्रवार को छोड़कर बाकी दिनों में इसे अमल में लाया जाता है.

गोली से दिल पर वार, यमन की क्रूर सजा

यमन की दंड संहिता में सजा-ए-मौत के चार तरीके दर्ज हैं. गोली मारना, फांसी देना, सिर कलम करना और पत्थर से मारना. हालांकि इनमें से सबसे ज्यादा इस्तेमाल गोली मारने का होता है. इस प्रक्रिया में कैदी को जमीन पर उल्टा लिटाया जाता है, उसके हाथ बांध दिए जाते हैं, और एक डॉक्टर दिल का स्थान तय करता है. एक अकेला एक्जीक्यूशनर ऑटोमैटिक राइफल से दिल पर लगातार पांच गोलियां दागता है. इस प्रक्रिया में कैदी को आखिरी इच्छा पूछने या किसी विशेष भोजन की अनुमति तक नहीं मिलती. 2014 के बाद यमन के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी हिस्से हौथी विद्रोहियों के कब्जे में हैं. इन इलाकों में मौत की सजा और ज्यादा तेजी से दी जा रही है.

वहीं फांसी कम मामलों में दी जाती है, लेकिन कानूनन संभव है. हालांकि यमन में सालों से फांसी की प्रक्रिया नहीं हुई है. सिर कलम करने जैसी क्रूर सजाएं ऐतिहासिक रूप से कुछ मामलों में दी जाती है, खासकर से Hudud अपराधों में. वहीं पत्थर मारकर मारना (रेजिंग/stoning) बहुत दुर्लभ है.

 

क्या बच्चों को भी दी जाती है फांसी?

हां, और यही सबसे गंभीर बात है. 1994 में यमन के दंड संहिता में बदलाव कर यह प्रावधान जोड़ा गया था कि 18 साल से कम उम्र वालों को मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी, लेकिन देश में जन्म प्रमाणपत्र की प्रणाली बेहद कमजोर है. इसी कारण कई बार नाबालिगों को भी मृत्युदंड दे दिया जाता है, जैसा कि 2007 में आदिल अल-मआमारी के केस में हुआ. 2007 में आदिल अल-मआमारी नाम के युवक को फांसी दे दी गई, जबकि उसका दावा था कि अपराध करते वक्त वो सिर्फ 16 साल का था. न उसके पास वकील था, न ही उम्र का सही प्रमाण और पुलिस ने जबरदस्ती कबूलनामा करवाया था. इस घटना के बाद भी कम से कम 18 नाबालिग कैदी आज यमन की डेथ रो (मृत्युदंड सूची) में हैं.

दुनिया की नजरें और आलोचना

मानवाधिकार समूह लंबे समय से यमन की मौत की सज़ा की प्रणाली की आलोचना करते आ रहे हैं. 2023 में यमन में 13 से ज्यादा आधिकारिक फांसी दी गईं, लेकिन असल संख्या इससे कहीं ज्यादा मानी जाती है. पब्लिक एक्ज़ीक्यूशन, क्रॉस पर शव टांगना और स्टोनिंग जैसे पुराने तरीकों का इस्तेमाल अब भी कभी-कभी होता है. 2021 में बच्चों के साथ रेप के दोषियों को गोली मारने के बाद शवों को सार्वजनिक रूप से क्रॉस पर लटका दिया गया था.

 

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰