कल के हथियारों से आज का युद्ध नहीं…………….

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने साफ शब्दों में कहा है कि आज के जटिल युद्ध में ‘कल के हथियारों’ से जीत संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. दिल्ली में ‘UAV और काउंटर-UAS (C-UAS) सिस्टम’ […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 16 जुलाई 2025, 06:16 AM 4 मिनट read
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कल के हथियारों से आज का युद्ध नहीं…………….
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने साफ शब्दों में कहा है कि आज के जटिल युद्ध में ‘कल के हथियारों’ से जीत संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा.

दिल्ली में ‘UAV और काउंटर-UAS (C-UAS) सिस्टम’ पर आयोजित प्रदर्शनी में बोलते हुए सीडीएस चौहान ने जोर दिया कि भारत अब महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने कहा, ‘जो टेक्नोलॉजी हमारे मिशन के लिए अहम है, उस पर विदेशी निर्भरता हमारी तैयारी को कमजोर करती है.
भारत के सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हमलों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ हथियार रहित ड्रोन (अन-आर्म्ड ड्रोन) का इस्तेमाल किया था। हालांकि, इनमें से कोई भी पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा सका था।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने साफ शब्दों में कहा है कि आज के जटिल युद्ध में ‘कल के हथियारों’ से जीत संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा.
दिल्ली में ‘UAV और काउंटर-UAS (C-UAS) सिस्टम’ पर आयोजित प्रदर्शनी में बोलते हुए सीडीएस चौहान ने जोर दिया कि भारत अब महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने कहा, ‘जो टेक्नोलॉजी हमारे मिशन के लिए अहम है, उस पर विदेशी निर्भरता हमारी तैयारी को कमजोर करती है.’

सीडीएस चौहान ने ड्रोन युद्ध के बढ़ते महत्व पर भी रोशनी डाली और कहा, ‘ड्रोन तकनीक का विकास भले ही क्रमिक हो, लेकिन इसका इस्तेमाल बिल्कुल क्रांतिकारी रहा है. जैसे-जैसे इसके उपयोग और असर का एहसास हुआ, सेना ने इसे युद्ध में प्रभावी रूप से अपनाया.’

पाकिस्तान के सारे ड्रोन नाकाम
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए बताया कि 10 मई को पाकिस्तान ने भारत पर कई अनआर्म्ड ड्रोन और ‘लॉइटर म्यूनिशन’ इस्तेमाल किए थे, लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक तरीकों से सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया. उन्होंने बताया कि इन प्रयासों से भारत की सैन्य और नागरिक संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं हुआ और कुछ ड्रोन्स को लगभग सही-सलामत हालत में बरामद भी किया गया.

सीडीएस ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साफ कर दिया है कि भारत को अपनी भूगोल और जरूरतों के अनुसार विकसित स्वदेशी काउंटर-यूएएस सिस्टम की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, “हमें खुद में निवेश करना होगा, अपनी रक्षा जरूरतों के लिए तैयार होना होगा.”

स्वदेशी तकनीक की जरूरत
अपने भाषण में उन्होंने पुराने युद्धों पर भी बात की और बताया कि कैसे हथियार और युद्ध प्रणाली समय के साथ अधिक हल्की, प्रभावशाली, किफायती और बहुपर्यायी हो गई हैं. सीडीएस ने कहा, ‘कभी भारी-भरकम राइफल्स होती थीं, जो अब हल्की, लंबी दूरी तक मार करने वाली और रात में भी कारगर हैं. टैंक और एयरक्राफ्ट अब हल्के, तेज़ और ज़्यादा सुरक्षित हो गए हैं. उसी तरह, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी हमें खुद को अपग्रेड करना होगा.’
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का युद्ध ‘कल की तकनीक’ से नहीं लड़ा जा सकता. उन्होंने दो टूक कहा, ‘हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता को स्वदेशी बनाना ही होगा.’

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