मालेगांव ब्लास्ट में 17 साल बाद फैसला, प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी 7 बरी…….

17 साल के इंतजार के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत गुरुवार को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले कहा कि बाइक साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के होने के कोई सबूत नहीं मिले. आरोपियों […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 31 जुलाई 2025, 07:24 AM 8 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
मालेगांव ब्लास्ट में 17 साल बाद फैसला, प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी 7 बरी…….
Photo: UB India News Archive

17 साल के इंतजार के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत गुरुवार को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले कहा कि बाइक साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के होने के कोई सबूत नहीं मिले. आरोपियों पर यूएपीए नहीं लगाया जा सकता. जज ने केस का इतिहास सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि ब्लास्ट स्थल पर मिली बाइक में RDX लगाया गया था.  कोर्ट ने कहा कि कुछ मेडिकल सर्टिफिकेट में हेराफेरी की गई है.

यह कांग्रेस के गाल पर करारा तमाचा है. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को हाथ जोड़कर हिंदू समाज से माफी मांगनी चाहिए. उनकी स्टोरी फेल हो गई. हिंदुओं को आरोपी बनाने के चक्कर में असली गुनहगारों को बचा लिया गया. दोहरा पाप किया गया. कांग्रेस के पापों का घड़ा भर चुका है. कांग्रेस की धमाकों की सरकार थी.
कोर्ट ने क्या कुछ कहा

आरोप था कि RDX लाया गया और उसका इस्तेमाल किया गया, लेकिन न तो पुरोहित के घर में RDX के भंडारण का कोई सबूत मिला और न ही यह साबित हुआ कि उन्होंने बम को असेंबल किया. जज ने यह भी कहा कि घटनास्थल से कोई खाली खोल (empty shells) बरामद नहीं हुए, जबकि फायरिंग की बात कही गई थी. न ही कोई फिंगरप्रिंट या DNA सैंपल लिया गया. मोटरसाइकिल का चेसिस नंबर मिटा दिया गया था और इंजन नंबर को लेकर भी संदेह बना रहा.

कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बम मोटरसाइकिल में था. कर्नल पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला कि उन्होंने बम बनाया या उसे सप्लाई किया. यह भी साबित नहीं हुआ कि बम किसने लगाया. घटना के बाद विशेषज्ञों ने सबूत इकट्ठा नहीं किए, जिससे सबूतों में गड़बड़ी हुई.

कोर्ट ने यह भी कहा कि धमाके के बाद पंचनामा ठीक से नहीं किया गया, घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए और बाइक का चेसिस नंबर कभी रिकवर नहीं हुआ. साथ ही, वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम से थी, यह भी सिद्ध नहीं हो पाया. अदालत ने साफ कर दिया कि सातों आरोपी निर्दोष हैं. केवल संदेह के आधार पर किसी को सजा नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है.

साध्वी प्रज्ञा पर क्या बोला कोर्ट

साध्वी प्रज्ञा के वाहन की मालिकाना हक या कब्जे को लेकर कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फरीदाबाद, भोपाल आदि में हुई कथित षडयंत्रकारी बैठकों का कोई प्रमाण नहीं मिला. न ही कोई साजिश या बैठकें साबित हो सकीं. अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई और अंतिम दलीलें पूरी करने के बाद 19 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने कहा था कि अप्रैल में सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन मामले में एक लाख से अधिक पन्नों के सबूत और दस्तावेज होने के कारण, फैसला सुनाने से पहले सभी रिकॉर्ड की जांच के लिए अतिरिक्त समय चाहिए.

अब तक क्या क्या साबित नहीं हुआ?

1. RDX और बम का सबूत साबित नहीं हो पाया.
2. बाइक साध्वी पज्ञा की थी ये भी साबित नहीं हुआ.
3. ब्लास्ट से पहले बैठक हुई ये भी साबित नहीं हो पाया.
4. RDX कर्नल पुरोहित लाए, ये साबित नहीं हुआ,
5. बाइक पर चेचिस नंबर कभी रिकवर नहीं हुआ,
6. स्पॉट पंचनामा से कुछ भी सामने नहीं आया..
7. यूएपीए लागू नहीं होता – ये मामला बनता ही नहीं,

19 अप्रैल को सुरक्षित हुआ था फैसला

दरअसल, इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई और अंतिम दलीलें पूरी करने के बाद 19 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा गया था. इस मामले में सात लोग, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा था. इन सभी लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे. सभी आरोपी वर्तमान में जमानत पर रिहा हैं.

कोर्ट ने दी थी चेतावनी

सभी आरोपियों को फैसले के दिन कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी है कि जो आरोपी उस दिन अनुपस्थित रहेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में सात लोग, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चला. इन सभी लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे.

क्या है मालेगांव ब्लास्ट मामला

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में रमजान के पवित्र महीने में और नवरात्रि से ठीक पहले एक विस्फोट हुआ. इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. एक दशक तक चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 34 अपने बयान से पलट गए. शुरुआत में, इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने की थी. हालांकि, 2011 में एनआईए को जांच सौंप दी गई. 2016 में एनआईए ने अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कई अन्य आरोपियों को बरी करते हुए एक आरोप पत्र दाखिल किया था.  घटना के लगभग 17 साल बाद आए इस फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था

बीजेपी की उम्मीदवारी

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ा दांव खेलते हुए साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से पार्टी का प्रत्याशी बनाया। उनके सामने थे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह। साध्वी की उम्मीदवारी को लेकर कई सवाल खड़े हुए क्योंकि वह मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपित थीं। फिर भी बीजेपी ने उन्हें हिंदुत्व के एक प्रतीक के रूप में पेश किया और चुनाव को वैचारिक लड़ाई का रंग दे दिया।

जीत के बाद विवाद

भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा को भारी बहुमत से जीत मिली। उन्होंने दिग्विजय सिंह को तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराया और संसद पहुंचीं। लेकिन इसी बीच उन्होंने एक ऐसा बयान दे डाला जिसने उनके राजनीतिक जीवन को पटरी से उतार दिया। मई 2019 में देवास में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया। इस बयान से न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, बल्कि बीजेपी को भी काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

साध्वी

पीएम मोदी का नाराज़गी भरा संकेत

साध्वी प्रज्ञा के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मीडिया इंटरव्यू में खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “गांधी जी और गोडसे के संदर्भ में जो बातें कही गई हैं, वे अत्यंत निंदनीय हैं। मैं भले ही उन्होंने माफी मांग ली हो, पर मन से कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।” यह बयान स्पष्ट संकेत था कि साध्वी के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दरवाजा लगभग बंद हो चुका है।

पार्टी में हाशिए पर

चुनाव के बाद साध्वी संसद पहुंचीं जरूर, लेकिन उनका राजनीतिक ग्राफ नीचे जाने लगा। नाथूराम गोडसे को लेकर उनके एक और बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया। जब संसद में एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब डीएमके सांसद ए राजा ने गोडसे का उल्लेख किया, जिसे साध्वी ने “देशभक्त” कहकर समर्थन दे दिया। इस बयान के बाद उन्हें रक्षा सलाहकार समिति से हटा दिया गया और संसद की कार्यवाही से उनका बयान हटाया गया।

संगठन से दूरी

इन विवादों के बाद बीजेपी ने उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रखना शुरू कर दिया। न तो किसी बड़े मंच पर बुलाया गया, न ही किसी प्रमुख कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। भोपाल शहर में उनके पोस्टर तक दिखाई देना बंद हो गए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी उनसे दूरी बना ली। अंततः 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिससे उनके संसदीय करियर का अंत तय हो गया।

मौजूदा स्थिति

अब जब मालेगांव ब्लास्ट केस में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है, तो अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या वे फिर से राजनीति में सक्रिय होंगी। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक कोई औपचारिक संकेत नहीं मिला है। पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाना कठिन है कि उन्हें फिर से कोई बड़ी भूमिका मिलेगी या नहीं।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
राहुल गांधी हमें आपसे…उम्मीद नहीं’………….
खास खबर

राहुल गांधी हमें आपसे…उम्मीद नहीं’………….

बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उस पत्र के लिए आलोचना की है, जो उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को आदिवासी छात्रों की चिंताओं के बारे में लिखा था। बीजेपी ने उनसे कहा कि वे पहले कांग्रेस-शासित तेलंगाना और कर्नाटक में आदिवासी कल्याण विभागों और हॉस्टलों के कामकाज की समीक्षा करें। पहले गलत […]

UB India News25 अग॰
मुंबई के 30 लाख वोटर्स का नाम कटेगा!
प्रदेश

मुंबई के 30 लाख वोटर्स का नाम कटेगा!

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के SIR यानी विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान के तहत एक अहम आंकड़ा सामने आया है. सूबे में करीब 1.8 करोड़ और अकेले मुंबई में 30 लाख मतदाताओं का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. इनके फॉर्म ‘अनकलेक्टेड’ कैटेगरी में हैं. अगर समय रहते इनका पता नहीं चलता है, तो […]

UB India News15 अग॰
NDA में आएंगे शरद पवार? परिसीमन पर मोदी सरकार के साथ ………
खास खबर

NDA में आएंगे शरद पवार? परिसीमन पर मोदी सरकार के साथ ………

संसद के आगामी मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन बिल लाए जाने की संभावना है। इस बीच, ये चर्चा जोरों पर है कि शरद पवार की पार्टी NCP-SP बिल को समर्थन देने वाली है। इन अटकलों पर NCP-SP की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर पार्टी रुख साफ किया है। […]

UB India News15 जुल॰
मुंबई की जानलेवा बारिश ,बरसात ने बरपाया कहर ,हादसों में आठ की मौत……………………
खास खबर

मुंबई की जानलेवा बारिश ,बरसात ने बरपाया कहर ,हादसों में आठ की मौत……………………

मुंबई में जारी भीषण बारिश कहर बरपा रही है। मुंबई में रविवार को हुई भारी बारिश के बीच मानखुर्द इलाके में एक चॉल का हिस्सा ढह जाने से छह लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। वहीं, पेड़ गिरने की एक अन्य घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई। इतना […]

UB India News6 जुल॰
क्या है पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस …………..
खास खबर

क्या है पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस …………..

प्यार, भरोसा, सगाई, जन्मदिन की तैयारी और कुछ ही महीनों बाद होने वाली शाही शादी. बाहर से देखने पर यह कहानी किसी सपनों जैसी जिंदगी की लगती है. लेकिन पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने इस कहानी के पीछे छिपे एक ऐसे अंधेरे को सामने ला दिया, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है. […]

UB India News24 जून
बेशर्मी से बिक गई तुम्हारी वफादारी………………..
खास खबर

बेशर्मी से बिक गई तुम्हारी वफादारी………………..

महाराष्ट्र विधानसभा का तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार 22 जून 2026 से शुरू होने जा रहा है. 10 जुलाई तक चलने वाला यह सत्र राजनीतिक उठापटक और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच काफी हंगामेदार रहने की संभावना है. एक ओर कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर अनियमित मानसून […]

UB India News22 जून
महाराष्ट्र की राजनीति में टूट, गठबंधन और दल-बदल का है लंबा इतिहास ……………..
खास खबर

महाराष्ट्र की राजनीति में टूट, गठबंधन और दल-बदल का है लंबा इतिहास ……………..

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, वह कोई नई बात नहीं है। राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो पार्टियों में टूट, गठबंधनों का बदलना, पार्टी के चुनाव चिह्नों पर विरोधी दावे, रातों-रात बनने वाली सरकारें और एक साझा प्रतिद्वंद्वी को सत्ता से दूर रखने के लिए विरोधियों […]

UB India News20 जून
अलग हुए तो छोड़ेंगे नहीं…………….
खास खबर

अलग हुए तो छोड़ेंगे नहीं…………….

महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर हलचल चरम पर पहुंच गई है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी से बगावत पर उतारू सांसदों को संजय राउत ने खुली चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि जो सांसद पार्टी छोड़ेंगे, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा. दरअसल शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद दिल्ली पहुंच […]

UB India News17 जून
MVA में महासंग्राम!
खास खबर

MVA में महासंग्राम!

महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक ना हो तो काहे का महाराष्ट्र. यहां की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर अचानक बढ़ गया है. महाविकास अघाड़ी जिसे भाजपा के खिलाफ मजबूत विपक्षी मोर्चा माना जाता था अब अपने ही अंदर खींचतान से जूझता नजर आ रहा है. राजनीति में गठबंधन बनाना जितना आसान दिखता है […]

UB India News30 अप्रैल