NDA में आएंगे शरद पवार? परिसीमन पर मोदी सरकार के साथ ………

संसद के आगामी मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन बिल लाए जाने की संभावना है। इस बीच, ये चर्चा जोरों पर है कि शरद पवार की पार्टी NCP-SP बिल को समर्थन देने वाली है। इन अटकलों पर NCP-SP की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर पार्टी रुख साफ किया है। […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 15 जुलाई 2026, 07:20 AM 6 मिनट read
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NDA में आएंगे शरद पवार? परिसीमन पर मोदी सरकार के साथ ………
Photo: UB India News Archive
संसद के आगामी मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन बिल लाए जाने की संभावना है। इस बीच, ये चर्चा जोरों पर है कि शरद पवार की पार्टी NCP-SP बिल को समर्थन देने वाली है। इन अटकलों पर NCP-SP की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेस कर पार्टी रुख साफ किया है।
शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) संसद के मॉनसून सत्र में आने वाले संविधान संशोधन बिल का समर्थन करेगी। बुधवार को मुंबई में शरद पवार की बेटी और एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) चुनाव क्षेत्रों के पुनर्गठन से जुड़े संविधान संशोधन बिल का समर्थन करेगी, अगर इसमें लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव हो। सुप्रिया सुले ने 50 प्रतिशत की शर्त का उल्लेख करके अब गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी है। ऐसा माना जा रहा है सरकार अब 50 फीसदी पर ही आगे बढ़ेगी।

सर्वदलीय बैठक में हुई थी चर्चा

सुप्रिया सुले ने पत्रकारों को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई सर्वदलीय बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। सुले ने साफ किया कि इस चर्चा में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और डीएमके ने भी सकारात्मक रुख अपनाया था। उन्होंने कहा कि अगर सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में यह बिल पेश किया जाता है, तो पार्टी इसका समर्थन करेगी।

महाराष्ट्र की राजनीति में अभी ऑपरेशन टाइगर का शोर शांत भी नहीं हुआ था कि एक एक नया अपडेट आ गया. हर दिन कोई नई अटकल, कोई नई बैठक और कोई नया राजनीतिक संकेत सामने आ रहा है. ऐसे माहौल में मंगलवार देर रात हुई कुछ मुलाकातों ने सियासी पारा और चढ़ा दिया. एक तरफ शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल पहले सिल्वर ओक पहुंचे और उसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले. दूसरी ओर सत्ता में शामिल एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी फडणवीस से अलग बैठक की. इन मुलाकातों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या महाराष्ट्र में कोई बड़ा राजनीतिक समीकरण तैयार हो रहा है? क्या शरद पवार का गुट विपक्ष छोड़कर एनडीए की ओर बढ़ रहा है या फिर यह सिर्फ राजनीतिक नब्ज टटोलने की कवायद है? फिलहाल किसी ने भी बैठक के एजेंडे पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे आने वाले बड़े फैसले की प्रस्तावना माना जा रहा है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शरद पवार की अगली रणनीति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि जुलाई 2023 में अजीत पवार के अलग होने के बाद पहली बार उनकी पार्टी सबसे बड़े राजनीतिक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है. पार्टी के भीतर पहले कांग्रेस में विलय की चर्चा चली, फिर एनडीए के साथ जाने की अटकलें तेज हुईं और अब देर रात हुई बैठकों ने इन चर्चाओं को नई हवा दे दी है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी के कई विधायक मानते हैं कि लंबे समय तक विपक्ष में रहने से विकास कार्यों के लिए फंड और प्रशासनिक मंजूरी हासिल करना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सत्ता के साथ जाने का विकल्प खुलकर सामने आने लगा है. हालांकि अंतिम फैसला अब भी शरद पवार के हाथ में माना जा रहा है.

देर रात हुई बैठकों ने बढ़ाई सियासी हलचल

  • जानकारी के अनुसार एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले मुंबई स्थित सिल्वर ओक में शरद पवार से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की. इसी दौरान एनडीए सरकार में शामिल एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री से अलग मुलाकात की. इन बैठकों पर न तो नेताओं ने कोई टिप्पणी की और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय ने एजेंडा सार्वजनिक किया.
  • इन बैठकों का समय बेहद अहम माना जा रहा है. इससे पहले खबरें सामने आई थीं कि शरद पवार गुट के 10 में से कम से कम आधे विधायक भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं. उनका तर्क है कि विपक्ष में रहने से विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी मंजूरियां मिलने में कठिनाई आ रही है.
  • जयंत पाटिल ने भी हाल के दिनों में विधायकों के साथ बातचीत में यह संकेत दिया था कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग एनडीए के विकल्प पर विचार कर रहा है. हालांकि शरद पवार ने अब तक सार्वजनिक तौर पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और न ही किसी संभावित गठबंधन पर कोई आधिकारिक बयान दिया है.

NDA को भी क्यों है NCP (SP) की जरूरत?

भले ही एनसीपी (एसपी) के पास विधानसभा में केवल 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद हैं, लेकिन संसद में संख्या संतुलन के लिहाज से यह ताकत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. खासकर परिसीमन (Delimitation) जैसे अहम विधेयकों से पहले एनडीए छोटे दलों का समर्थन मजबूत करना चाहता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि दोनों पक्ष संवाद के रास्ते खुले रखना चाहते हैं.

सुनेत्रा पवार की नेतृत्व शैली पर भी उठ रहे सवाल

इधर सत्तारूढ़ एनसीपी भी पूरी तरह सहज नहीं दिख रही है. पूर्व राष्ट्रीय महासचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने को कानूनी नोटिस भेजकर चुनौती दी है. नोटिस में संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘यह नोटिस पूरी तरह निराधार है. पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट है और कोर कमेटी इसका कानूनी जवाब तय करेगी.’

आखिर फैसला किसके हाथ में है?

राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद अंतिम निर्णय अभी भी शरद पवार के पास ही माना जा रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में कभी कांग्रेस में विलय तो कभी एनडीए में शामिल होने की अटकलें सामने आईं, लेकिन किसी पर मुहर नहीं लगी. अब देर रात हुई बैठकों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में पर्दे के पीछे बातचीत तेज हो चुकी है. आने वाले दिनों में शरद पवार का एक फैसला राज्य की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है.
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