आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर फैसला सुरक्षित; SG बोले- मुद्दा सुलझाने की जरूरत, सिब्बल ने कहा- बहस जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी होगी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पूरी समस्या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 14 अगस्त 2025, 06:16 AM 6 मिनट read
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आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर फैसला सुरक्षित; SG बोले- मुद्दा सुलझाने की जरूरत, सिब्बल ने कहा- बहस जरूरी
Photo: UB India News Archive

सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़ने के 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि हस्तक्षेप याचिका दायर करने वाले हर व्यक्ति को जिम्मेदारी लेनी होगी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पूरी समस्या स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता के कारण है। नियमों का पालन न करने की वजह से समस्या इतनी बढ़ गई है।

इससे पहले न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बच्चे मर रहे हैं। इस मुद्दे को सुलझाने की जरूरत है, न कि इस पर विवाद करने की। कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता। देश में एक साल में कुत्तों के काटने के 37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। मामले में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि स्थिति ‘बेहद गंभीर’ है और इस मामले पर गहराई से बहस करने की जरूरत है। 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में अधिकारियों को आवारा कुत्तों को उठाने का निर्देश देने वाले आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।
दिल्ली सरकार की दलील
दिल्ली सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रेबीज फैलाने वाले कुत्तों के काटने से बच्चों की मौत हो रही है। आवारा कुत्तों के मुद्दे का समाधान किया जाना चाहिए, न कि इस पर विवाद किया जाना चाहिए। दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि देश में एक वर्ष में कुत्तों के काटने के 37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज होते हैं। मेहता ने कहा, ‘कोई भी पशु-द्वेषी नहीं है। कोई भी उनसे नफरत नहीं करता है।’

सिब्बल ने की फैसले पर रोक की मांग
कुत्तों की देखभाल करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर है। इस मामले पर गहराई से बहस करने की जरूरत है। सिब्बल ने 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित कुछ निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की, जिनमें दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को जल्द से जल्द उठाना शुरू करने और उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने के निर्देश शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट का 11 अगस्त वाला आदेश पढ़िए
इससे पहले जस्टिस जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की दो सदस्यीय पीठ ने 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे जल्द से जल्द सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को उठाना शुरू करें और उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करें। पीठ ने अधिकारियों को तत्काल आश्रय स्थल बनाने और आठ सप्ताह के भीतर इस तरह के बुनियादी ढांचे के निर्माण के बारे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में ही रखा जाएगा और उन्हें सड़कों, कॉलोनियों या सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से खासकर बच्चों में रेबीज होने के मामले में 28 जुलाई को शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कई निर्देश जारी किए थे।

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का कहर

दिल्ली और NCR में डॉग लवर्स और स्ट्रे डॉग्स को कंट्रोल करने वालों के बीच एक दीवार खड़ी हो गई है। डॉग लवर्स इस बात को लेकर परेशान हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्ट्रे डॉग्स पर जुल्म किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 8 हफ्ते में 5 हजार डॉग्स को पकड़ने का आदेश दिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बेजुबानों के साथ बुरा सलूक किया जाएगा। उन्हें बेरहमी से पकड़ कर बंद कर दिया जाएगा, कहीं दूर मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा। इसीलिए Court के इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। स्ट्रे डॉग्स से परेशान लोग बताते हैं कि कैसे कुत्तों ने बच्चों को नोच-नोच कर मार डाला, कैसे एक प्लेयर रेबीज का शिकार होकर हॉस्पिटल में तड़प रही है।

ऐसी घटनाओं के वीडियो दिखाकर वो कहते हैं कि स्ट्रे डॉग्स से बचाव होना चाहिए। इंसान की जिंदगी बहुत कीमती है, लेकिन डॉग लवर्स का तर्क है कि एक-दो स्ट्रे डॉग्स के कारण सारे कुत्तों पर अत्याचार कैसे किया जा सकता है? उनका कहना है कि शेल्टर्स का सुझाव बिलकुल बेकार है। दिल्ली और NCR के 10 लाख स्ट्रे डॉग्स को शेल्टर देने के लिए 400 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। इतना पैसा कहां से आएगा ? इतने स्ट्रे डॉग्स को सिर्फ खाना देने पर सालाना 1400 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। ये कौन देगा? कहां से आएगा?

इस वक्त MCD स्ट्रीट डॉग्स पर सिर्फ 16 करोड़ रुपये खर्च करती है। ये चिंता वाजिब है क्योंकि सवाल ये है कि फिर करें तो क्या करें? एक तरफ इंसानों की चिंता है, दूसरी तरफ बेज़ुबान जानवरों की जिंदगी। गलियों से, सड़कों से कुत्तों को हटाना समस्या का हल नहीं हो सकता क्योंकि इस समय न तो शेल्टर्स हैं, न फंड हैं, न कोई प्लान। तो फिर क्या किया जाए? इंडिया टीवी ने लोगों से सुझाव मांगे हैं।

मेरा कहना है कि जो बेजुबान जानवर अपना दर्द समझा नहीं सकते, उनकी बात समझने की कोशिश करनी चाहिए. जो अपने लिए लड़ नहीं सकते, उनके लिए लड़ना चाहिए. हम stray dogs को न तो सड़कों पर छोड़ सकते हैं, न उन्हें मरने के लिए छोड़ सकते हैं। न तो हम ये चाहते हैं कि कोई एक बच्चा भी डॉग बाइट का शिकार हो, न ही हम चाहते हैं कि एक भी स्ट्रे डॉग पर किसी तरह का कोई जुल्म हो। तो उन्हें कहां रखें? उनकी देखभाल कैसे करें? अगर आपके पास कोई हल है तो हमें बताएं।

याद रखिए कि जिन 10 लाख स्ट्रे डॉग्स की बात की जा रही है, उनमें बड़ी संख्या में स्वस्थ और वैक्सीनेटेड डॉग्स भी हैं। उन्हें उठाकर कहीं बंद करने की क्या जरूरत? दूसरी बात ये माननी पड़ेगी कि स्ट्रे डॉग्स के Sterilization का प्लान पूरी तरह से फेल हो गया, इसीलिए ये समस्या इतनी बड़ी बनी। जो एजेंसीज ठीक से Sterilization नहीं कर पाई, वो शेल्टर में डॉग्स की देखभाल कैसे करेगी? ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जिनके जवाब मिलना जरूरी है।

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