पीएम मोदी ने क्यों की संघ की तारीफ………….

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ की। उन्होंने आरएसएस को दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के लिए बहुत काम किया है। यह तारीफ ऐसे समय में आई है जब ऐसी चर्चाएं थीं […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 16 अगस्त 2025, 07:59 AM 5 मिनट read
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पीएम मोदी ने क्यों की संघ की तारीफ………….
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ की। उन्होंने आरएसएस को दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के लिए बहुत काम किया है। यह तारीफ ऐसे समय में आई है जब ऐसी चर्चाएं थीं कि आरएसएस और बीजेपी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। पीएम मोदी ने आरएसएस के लिए अपना सम्मान खुलकर दिखाया है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह लाल किले से आरएसएस की तारीफ की, उसे लेकर सियासी घमासान भी तेज होने लगा है। कांग्रेस पार्टी समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इस पर सवाल खड़े किए हैं।

मोदी ने की संघ की तारीफ तो मच गया घमासान
कांग्रेस ने कहा कि यह बहुत परेशान करने वाला है। यह संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी की कुर्सी मोहन भागवत की कृपा पर टिकी है। लाल किले से आरएसएस की तारीफ करके उन्होंने भागवत को खुश करने की कोशिश की है। उधर AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर रिएक्ट किया।

कांग्रेस और ओवैसी ने उठाए सवाल
ओवैसी ने एक्स पोस्ट में कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी को आरएसएस की तारीफ करनी थी, तो नागपुर जाकर करते। लाल किले से इसकी तारीफ करके उन्होंने गलत परंपरा शुरू की है। वहीं पीएम मोदी ने जिस तरह से संघ की तारीफ की है उसे लेकर आरएसएस और बीजेपी के नेताओं में उत्साह है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता राम माधव ने पूरे मामले पर अहम टिप्पणी की है।

आरएसएस ने पूरे मामले पर क्या कहा
राम माधव ने कहा कि आरएसएस और बीजेपी एक वैचारिक परिवार के तहत जुड़े दो संगठन हैं। बीजेपी राजनीतिक कार्य करती है और आरएसएस समाज में समुदाय के बीच काम करता है। इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि क्या बीजेपी-आरएसएस में हाल के दौरान कुछ मतभेद हो गए हैं। इस पर राम माधव ने दो टूक कहा कि दोनों के बीच कोई मनमुटाव नहीं है। जब कुछ नहीं होता तो इस तरह की चर्चाएं छेड़ दी जाती हैं।

पीएम मोदी ने क्यों की संघ की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन में आरएसएस की तारीफ करके सभी को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस ने देश के निर्माण में बड़ा योगदान दिया है। यह बेहद गर्व भरा पल है और सुनहरा अध्याय है। मोदी खुद भी आरएसएस के सदस्य रहे हैं। ऐसे में उनकी तारीफ से आरएसएस से जुड़े लोग बहुत खुश हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस साल अपनी स्थापना का 100वां साल मना रहा है।

मैं गर्व से एक ऐसी संस्था का जिक्र करना चाहता हूं…

ऐसे में पीएम मोदी ने कहा कि कई लोगों और संस्थाओं ने देश को बनाने में मदद की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज, मैं गर्व से एक ऐसी संस्था का जिक्र करना चाहता हूं। सौ साल पहले, आरएसएस की स्थापना हुई थी। राष्ट्र के लिए ये 100 साल की सेवा एक गर्व और सुनहरा अध्याय है। चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ, मां भारती की सेवा करने के उद्देश्य से, स्वयंसेवकों ने एक सदी से मातृभूमि के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भी प्रशंसा

प्रधानमंत्री ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भी प्रशंसा की। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जन संघ की स्थापना की थी। भारतीय जन संघ को पहले बीजेपी के नाम से जाना जाता था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने का विरोध करने के कारण जेल में डाल दिया गया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई। पीएम मोदी ने कहा कि आर्टिकल 370 की दीवार को हटाना और ‘एक राष्ट्र, एक संविधान’ के मंत्र को साकार करना, उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है। आर्टिकल 370 ऐसा अनुच्छेद था जो जम्मू और कश्मीर को विशेष अधिकार देता था। अब इसे हटा दिया गया है।

लाल किले से पहली बार प्रधानमंत्री ने की संघ की तारीफ

हालांकि आरएसएस को 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था, लेकिन यह शायद पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने खुले तौर पर संघ की तारीफ की है। आरएसएस पर कई बार प्रतिबंध लगाया गया, कई विवाद हुए और प्रभावशाली राजनीतिक और शैक्षणिक लोगों ने इसका विरोध किया। फिर भी, आरएसएस देश के सबसे प्रभावशाली संगठनों में से एक बना हुआ है। यह नेहरूवादी और ‘उदार’ विचारधारा वाली राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता के लिए एक चुनौती है।

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