GST 2.0: क्या राज्य सरकारें फंसा सकती है पेंच, कमाई पर पड़ सकती है चोट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में दिवाली गिफ्ट में GST में बड़े रिफॉर्म का वादा किया है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने मंत्री समूह के पास जीएसटी की देशभर में केवल दो दरें करने का प्रस्ताव भेजा है, जिसके ऊपर सितंबर में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा होगी. […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 21 अगस्त 2025, 09:59 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
GST 2.0: क्या राज्य सरकारें फंसा सकती है पेंच, कमाई पर पड़ सकती है चोट
Photo: UB India News Archive

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में दिवाली गिफ्ट में GST में बड़े रिफॉर्म का वादा किया है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने मंत्री समूह के पास जीएसटी की देशभर में केवल दो दरें करने का प्रस्ताव भेजा है, जिसके ऊपर सितंबर में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा होगी.

GST 2.0 से सालाना होगा इतना नुकसान

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा. कारोबार जगत लंबे समय से इस पर ज़ोर दे रहा था. शेयर बाज़ार में तेजी देखी गई क्योंकि निवेशकों का मानना है कि रोज़मर्रा की चीज़ों पर टैक्स घटने से लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे और इससे अर्थव्यवस्था को थोड़ी ताक़त मिलेगी. लेकिन इन प्रस्तावों से सरकार की आमदनी पर दबाव पड़ेगा, खासकर राज्यों की आय पर. अनुमान है कि टैक्स कटौती से हर साल करीब 1.8 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होगा. इसमें केंद्र सरकार को जीडीपी का 0.15% और राज्यों को लगभग 0.36% का घाटा उठाना पड़ सकता है.

केंद्र और राज्यों के बीच पहले से है तकरार

जीएसटी 2.0 के लागू होने से केंद्र और राज्यों के बीच आर्थिक तनाव और बढ़ने की आशंका है. कई राज्य पहले से ही शिकायत करते रहे हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें वाजिब मुआवज़ा नहीं मिला. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि उनके राज्य को हर साल करीब 21,000 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है और अब एक नए मुआवज़े की व्यवस्था करनी होगी. दक्षिण भारत के कई राज्य भी लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि उनकी टैक्स कमाई का बड़ा हिस्सा केंद्र ले लेता है. ग्लोबलडेटा की अर्थशास्त्री शुमिता देवेश्वर के मुताबिक, राज्य इस कदम से और ज्यादा घाटे में जा सकते हैं और इससे वे बजट बनाने के लिए केंद्र पर ज्यादा निर्भर हो जाएंगे. हालांकि उन्होंने इसे लंबे समय में सकारात्मक बताया.

बिहार चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक

राज्यों की प्रतिक्रिया अब तक मिली-जुली रही है. केरल के पूर्व वित्त मंत्री टी.एम. थॉमस आइजैक ने इसे तबाही करार दिया, जबकि तमिलनाडु के वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें पहले प्रस्ताव का असर समझना होगा. कर्नाटक सरकार के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने चेतावनी दी कि जीएसटी में बड़ा झटका राज्यों की वित्तीय हालत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. इस फैसले को दिवाली से पहले लागू करने की तैयारी है. ये बिहार चुनाव से ठीक पहले होगा, और माना जा रहा है कि केंद्र सरकार इसे चुनावी फायदा लेने के लिए इस्तेमाल कर सकती है.

GST में राज्यों की इतनी है हिस्सेदारी

केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को काफी तेजी से आगे बढ़ाया है. गृह मंत्री अमित शाह जुलाई से ही राज्यों और मंत्रालयों के साथ बातचीत कर रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी राज्यों से इस प्रस्ताव को समर्थन देने की अपील की है. राज्य सरकारें अपनी कमाई का लगभग 40% हिस्सा जीएसटी से पाती हैं. जीएसटी से पहले उन्हें अपने टैक्स लगाने का अधिकार था, लेकिन अब यह अधिकार बहुत सीमित है. सिर्फ पेट्रोलियम और शराब जैसे कुछ सामान पर ही. पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट में हैं कम आमदनी, ज्यादा कर्ज और घाटे के कारण है.

GST 2.0 से लंबे समय में होगा फायदा

केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में तो घाटा होगा, लेकिन लंबे समय में लोगों की बढ़ी हुई खपत से यह पूरा हो जाएगा. राज्यों के पास शराब और पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाकर अतिरिक्त कमाई करने का विकल्प भी है. इस हफ्ते राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति में इन प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को केंद्र का पक्ष रखा.

अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल करेगी, जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं और जिसकी अध्यक्षता केंद्र की वित्त मंत्री करती हैं. अगर आम सहमति न बनी तो वोटिंग कराई जा सकती है, जिसमें तीन-चौथाई बहुमत चाहिए होगा. बीजेपी की सरकार 21 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में होने के कारण उसे इसमें दिक्कत आने की संभावना कम है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰