देश में बाढ़-लैंडस्लाइड क्यों ? SC का राज्यों को नोटिस, 3 हफ्ते में मांगा जवाब…

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में लैंडस्लाइड और बाढ़ पर संज्ञान लिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और एनडीएमए यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में पेड़ों की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 4 सितंबर 2025, 07:38 AM 5 मिनट read
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देश में बाढ़-लैंडस्लाइड क्यों ? SC का राज्यों को नोटिस, 3 हफ्ते में मांगा जवाब…
Photo: UB India News Archive

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में लैंडस्लाइड और बाढ़ पर संज्ञान लिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और एनडीएमए यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में पेड़ों की अवैध कटाई के कारण आपदाएं आई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों में बाढ़, भूस्खलन से संबंधित याचिका दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की. साथ ही सॉलिसिटर जनरल से उपचारात्मक उपाय सुनिश्चित करने को कहा. इस दौरान सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमने प्रकृति के साथ इतनी छेड़छाड़ की है कि अब वह हमें उसी का जवाब दे रही है.

सॉलिसिटर जनरल (SG) मेहता ने कहा कि वह पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव से संपर्क करेंगे और उनसे विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध करेंगे. हमने प्रकृति के साथ इतना हस्तक्षेप किया है कि अब वह हमें नुकसान पहुंचा रही है.इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सहमति जताई.

CJI गवई ने आगे कहा कि हमने अभूतपूर्व बारिश और बाढ़ देखी है. ये एक बहुत ही गंभीर मामला  लगता है.  हम पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य को नोटिस जारी करते हैं. इन राज्यों की सरकारें अगले तीन हफ्ते में हमे जवाब दें. उन्होंने SG तुषार मेहता से कहा कि केंद्र भी इस पर ध्यान दें . यह एक बहुत ही गंभीर मामला लग रहा है. मीडिया में दिखाया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में लकड़ी के ब्लॉक बह रहे हैं.

आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत के कई राज्‍यों में आसमान से आफत बरस रही है. फ्लैश फ्लड यानी बादल फटने की घटनाओं, भारी बारिश और लैंडस्‍लाइड जैसी आपदाओं में सैकड़ों जानें गई हैं. ये आफत थमने का नाम नहीं ले रही हैं. अब एक बार‍ फिर कई राज्‍यों में संकट के बादल छाए हुए हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने  चार राज्यों में फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी की है. इन राज्‍यों में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं. मंगलवार को उत्तर पश्चिम भारत के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद ये अलर्ट जारी किया गया है.

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड में बाढ़ से कितनी मची तबाही?

केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, बाढ़, अचानक आई बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) का गठन किया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि आईएमसीटी स्थिति और राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों का मौके पर ही आकलन करेगी.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि गृह मंत्रालय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईएमसीटी का गठन किया. इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है.
आगामी सप्ताह की शुरुआत में केंद्रीय टीम हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के उन ज़िलों का दौरा करेंगी जो वर्तमान मानसून के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश, अचानक आई बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं.
बयान में कहा गया है कि एक आईएमसीटी और एक बहु-क्षेत्रीय टीम पहले ही हिमाचल प्रदेश का दौरा कर चुकी है. बयान में कहा गया कि केंद्रीय टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा. इन टीम में व्यय, कृषि एवं किसान कल्याण, जल शक्ति, विद्युत, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और ग्रामीण विकास मंत्रालयों/विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे.

इसमें कहा गया कि गृह मंत्रालय प्रभावित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में है और आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना और वायु सेना की टीम तैनात कर राहत एवं बचाव कार्यों में हर संभव राहत-सामग्री सहायता प्रदान कर रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा अगस्त 2019 में लिए गए निर्णय के अनुसार, गृह मंत्रालय किसी भी गंभीर आपदा की स्थिति में नुकसान का तत्काल मूल्यांकन करने के लिए बिना किसी ज्ञापन की प्रतीक्षा किए तुरंत अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम का गठन करता है.
बयान में कहा गया है कि मूल्यांकन पूरा होने के बाद, केंद्र सरकार स्थापित प्रक्रियाओं के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से प्रभावित राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है. इसमें कहा गया है कि 2025-26 वित्तीय वर्ष के दौरान, केंद्र ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में 24 राज्यों को 10,498.80 करोड़ रुपये जारी किए हैं, ताकि वे प्रभावित लोगों को राहत सहायता प्रदान कर सकें.
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