जीएसटी रिफॉर्म से इकोनॉमी को होगा 20 लाख करोड़ का फायदा,टाटा, महिंद्रा, टोयोटा की कारें ₹3.5 लाख तक सस्ती हुईं ………..

जीएसटी रिफॉर्म हो चुका है. अब देश में आम लोगों के लिए सिर्फ दो ही जीएसटी स्लैब होंगी. पहली स्लैब 5 फीसदी की होगी दूसरी स्लैब 18 फीसदी की भी होगी. वैसे एक अतिरिक्त स्लैब 40 फीसदी की भी रखी गई है. जिसमें सिन प्रोडक्ट्स, लग्जरी और प्रीमियम आइटम्स को रखा गया है. वैसे आम […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 7 सितंबर 2025, 07:15 AM 7 मिनट read
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जीएसटी रिफॉर्म हो चुका है. अब देश में आम लोगों के लिए सिर्फ दो ही जीएसटी स्लैब होंगी. पहली स्लैब 5 फीसदी की होगी दूसरी स्लैब 18 फीसदी की भी होगी. वैसे एक अतिरिक्त स्लैब 40 फीसदी की भी रखी गई है. जिसमें सिन प्रोडक्ट्स, लग्जरी और प्रीमियम आइटम्स को रखा गया है. वैसे आम लोगों को फायदे के साथ ये भी बात सामने आई कि सरकार को करीब 48 हजार करोड़ रुपए के रेवेन्यू का नुकसान होगा. लेकिन अभी तक किसी ने इस बात की जानकारी नहीं दी थी कि देश की इकोनॉमी को कितना फायदा या नुकसान होगा?

शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से कहा गया कि जीएसटी रिफॉर्म से देश की इकोनॉमी को बड़ा फायदा होने जा रहा है. ये आंकड़ा करीब 20 लाख करोड़ रुपए हो सकता है. वहीं उन्होंने ये भी कहा कि इस रिफॉर्म का कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से बिल्कुल भी नहीं है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर उन्होंने किस तरह की जानकारी दी है.

ट्रंप के टैरिफ से रिफॉर्म का संबंध नहीं

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 2025-26 के बजट में इनकम टैक्स में राहत के साथ-साथ जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाना भारत की इकोनॉमी को “एक नए स्तर” पर ले जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि इनडायरेक्ट टैक्सेशन में सुधार अमेरिकी शुल्कों से संबंधित नहीं हैं. वैष्णव ने भाजपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जीएसटी रिफॉर्म की तैयारी लगभग डेढ़ साल पहले, अमेरिकी चुनावों से काफी पहले शुरू हो गई थी. यह प्रधानमंत्री मोदी के सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के स्पष्ट लक्ष्य का हिस्सा था. नई जीएसटी व्यवस्था देश के लिए एक परिवर्तन यात्रा की शुरुआत का प्रतीक होगी. डोनाल्ड ट्रंप के शुल्कों पर, वैष्णव ने कहा कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है.

इकोनॉमी को होगा 20 लाख करोड़ का फायदा

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस जीएसटी रिफॉर्म से देश की इकोनॉमी को मितना फायदा होने का अनुमान है. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि देश की इकोनॉमी कंजंप्शन पर डिपेंड करती है. देश की इकोनॉमी में कंजंप्शन की हिस्सेदारी 61 फीसदी से ज्यादा की है. जीएसटी रिफॉर्म से कंजंप्शन में इजाफा होता है तो देश की इकोनॉमी को फायदा होगा. संभावित प्रभाव की व्याख्या करते हुए, मंत्री ने कहा कि आज हमारी जीडीपी लगभग 330 लाख करोड़ रुपए की है, जिसमें से लगभग 202 लाख करोड़ रुपए की खपत है. अगर खपत में केवल 10 फीसदी की भी वृद्धि होती है, तो इसका मतलब होगा कि जीडीपी में 20 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त योगदान होगा.

 

टाटा, महिंद्रा, टोयोटा की कारें ₹3.5 लाख तक सस्ती हुईं

देश की कई बड़ी कार कंपनियों ने GST में छूटा सा सीधा फायदा ग्राहकों को देने का फैसला किया है। ऐसे में कार की कीमतें 3.5 लाख रुपए तक सस्ती हो गई हैं।

इधर, वियतनाम की इलेक्ट्रिक मेकर विनफास्ट ने भारत में अपनी प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV- VF 6 और VF 7 लॉन्च कर दी है। कंपनी ने VF 6 की शुरुआती कीमत 16.49 लाख रुपए और VF 7 की 20.89 लाख रुपए तय की है।

महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने आज यानी शनिवार (6 सितंबर) से ही अपनी सभी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) SUV गाड़ियों पर GST में मिली छूट का पूरा फायदा ग्राहकों को देने का फैसला किया है। ऐसा करने वाली महिंद्रा एंड महिंद्रा पहली ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई है। हालांकि, नई GST दरें 22 सितंबर से लागू होंगी।

कंपनी ने ऐलान किया कि उनकी ICE SUV रेंज की कीमतों में 1.01 लाख रुपए से लेकर 1.56 लाख रुपए तक की कटौती की गई है। सबसे ज्यादा फायदा XUV3XO डीजल मॉडल पर मिलेगा, जिसकी कीमत में 1.56 लाख रुपए की कमी आई है।

वियतनाम की इलेक्ट्रिक मेकर विनफास्ट ने भारत में अपनी प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUV- VF 6 और VF 7 लॉन्च कर दी है। कंपनी ने VF 6 की शुरुआती कीमत 16.49 लाख रुपए और VF 7 की 20.89 लाख रुपए तय की है। विनफास्ट का दावा है कि फुल चार्ज में VF 6 में 468 Km और VF 7 में 510 Km तक रेंज मिलेगी।

कंपनी ने VF 6 को तीन ट्रिम और VF 7 को पांच वेरिएंट में पेश किया गया है। साथ ही कंपनी 10 साल या 2 लाख Km तक की बैटरी वारंटी दे रही है। इसके अलावा कंपनी अपने वी-ग्रीन चार्जिंग स्टेशंस पर जुलाई 2028 तक फ्री चार्जिंग की सुविधा भी कस्टमर्स को दे रही है।

टाटा मोटर्स ने अपनी गाड़ियों की कीमत घटाने का ऐलान किया है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 22 सितंबर से टाटा की गाड़ियां 65,000 रुपए से लेकर 1.55 लाख रुपए तक सस्ती हो जाएंगी।

कंपनी ने यह फैसला GST दरों में बदलाव की मंजूरी के बाद लिया है। 3 सितंबर को GST काउंसिल ने छोटी कारों पर लगने वाले टैक्स को 28% से घटाकर 18% कर दिया था।

टाटा मोटर्स ने कहा कि वह GST दरों बदलाव का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएगी। कंपनी का मानना है कि GST दरों में यह बदलाव लोगों के लिए कार खरीदना आसान बनाएगा और इससे भारत में आधुनिक गाड़ियों की मांग भी बढ़ेगी।

GST बदलाव​ से​​​​​ छोटी कार और 350cc तक की बाइक्स सस्ती होंगी

  • 1,200 सीसी तक पेट्रोल या 1,500 सीसी तक डीजल गाड़ियों पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे मारुति स्विफ्ट, ऑल्टो और नेक्सॉन जैसी छोटी गाड़ियां सस्ती हो जाएंगी ।
  • इसके अलावा 350cc तक की बाइक जैसे होंडा शाइन, एक्टिवा भी सस्ती हो जाएंगी। कॉमर्शियल व्हीकल्स जैसे बसें, ट्रक और एम्बुलेंस भी 28% से घटकर 18% GST के दायरे में आ गए हैं।

लग्जरी कारों की कीमत भी घटेगी

लग्जरी कारों पर GST को 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी लग्जरी गाड़ियां थोड़ी सस्ती हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि नए टैक्स स्लैब में GST से पहले लगने वाले कॉम्पेनसेशन सेस को खत्म कर दिया गया है।

पहले लग्जरी कारों पर 17-22% तक का सेस लगता था

पहले लग्जरी कारों पर 28% GST के साथ 17-22% तक का सेस लगता था, जिससे कुल टैक्स 50% तक पहुंच जाता था। इससे लग्जरी कारें काफी महंगी हो जाती थीं।

उदाहरण के लिए, अगर मर्सिडीज की कीमत पहले 1 करोड़ रुपए थी, तो उस पर करीब 50 लाख रुपए टैक्स देना पड़ता था। अब यह 40 लाख रुपए तक सीमित हो सकता है।

अब सरकार ने 4,000 मिमी से लंबी या 1,500 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली गाड़ियों पर GST 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया है। यानी, टैक्स बढ़ा दिया है, लेकिन सेस हटा दिया है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेस हटाने के कारण पहले और अब में ज्यादा अंतर नहीं आएगा। कुल मिलाकर ये गाड़ियां थोड़ी सस्ती हो सकती हैं, लेकिन फर्क ज्यादा नहीं होगा।

राज्यों को नुकसान से बचाने लगाया था कॉम्पेन्सेशन सेस

कॉम्पेन्सेशन सेस एक तरह का अतिरिक्त टैक्स है, जो सरकार कुछ खास सामानों पर लगाती है ताकि राज्यों को मुआवजा दे सके। 2017 में जब GST (वस्तु एवं सेवा कर) लागू हुआ था, तब कई राज्यों को लगता था कि उनके टैक्स से होने वाली कमाई कम हो जाएगी।

इसे पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने कॉम्पेन्सेशन सेस शुरू किया, जो महंगी गाड़ियों, सिगरेट, शराब जैसे लग्जरी या हानिकारक सामानों पर लगाया जाता था। यह टैक्स GST के ऊपर अतिरिक्त होता है और इससे जमा हुआ पैसा राज्यों को उनके नुकसान की भरपाई के लिए दिया जाता था।

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