भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है…………….

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना की है। थरूर ने एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन प्रोजेक्ट सिंडिकेट में लिखे अपने लेख में कहा- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा। थरूर ने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 4 नवंबर 2025, 09:30 AM 7 मिनट read
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भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है…………….
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना की है। थरूर ने एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन प्रोजेक्ट सिंडिकेट में लिखे अपने लेख में कहा- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा।

थरूर ने ‘Indian Politics Are a Family Business’ लेख में लिखा- यह समय है, जब भारत को वंशवाद (परिवारवाद) छोड़कर योग्यता आधारित व्यवस्था अपनानी चाहिए। इसके लिए कानूनी रूप से तय कार्यकाल, आंतरिक पार्टी चुनाव और मतदाताओं को जागरूक करने जैसे मूलभूत सुधार जरूरी हैं।

थरूर ने अपने लेख में नेहरू-गांधी परिवार को भारत का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार बताया। उन्होंने लिखा कि इस परिवार की विरासत आजादी के आंदोलन से जुड़ी है, लेकिन इसी कारण लोगों में यह सोच भी बढ़ी है कि राजनीति कुछ परिवारों का जन्मसिद्ध अधिकार है।

थरूर ने देशभर के कई राजनीतिक परिवारों का उदाहरण दिया

थरूर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवारों ने भी पीढ़ियों तक सत्ता संभाली है। इसके साथ उन्होंने देशभर की कई राजनीतिक परिवारों का उदाहरण दिया।

थरूर ने लेख में ओडिशा में नवीन पटनायक, महाराष्ट्र में उद्धव और आदित्य ठाकरे, उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह और अखिलेश यादव, बिहार में रामविलास और चिराग पासवान, पंजाब में प्रकाश सिंह और सुखबीर बादल, तेलंगाना में केसीआर के बेटे और बेटी के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई के साथ ही तमिलनाडु में करुणानिधि और उनके बेटे एमके स्टालिन के परिवार का जिक्र किया।

भाजपा बोली- कांग्रेस के भविष्य को लेकर निराशा

भाजपा ने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर ‘असंतोष का संकेत’ बताया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि थरूर की यह टिप्पणी कांग्रेस के भविष्य को लेकर उनकी ‘निराशा’ दिखाती है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने थरूर के लेख को ‘बेहद सूझबूझ भरा’ बताया।

उन्होंने कहा- थरूर ने सही लिखा है कि गांधी परिवार ने भारतीय राजनीति को पारिवारिक व्यवसाय बना दिया है। थरूर अब खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने अपने ही दल के नेपो किड राहुल गांधी पर सीधा हमला किया है।

थरूर के आरोपों पर भड़के कांग्रेस नेता
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने शशि थरूर द्वारा गांधी परिवार पर लगाए गए आरोपों पर कहा कि ‘पंडित जवाहरलाल नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी ने अपना जीवन बलिदान करके खुद को साबित किया। राजीव गांधी ने भी बलिदान देकर देश सेवा की। ऐसे में अगर कोई गांधी परिवार के वंशवाद की बात करता है तो फिर देश में किस अन्य परिवार ने ऐसा बलिदान, समर्पण और क्षमता दिखाई है। क्या वो भाजपा है?’

 

‘पता नहीं क्या नतीजे भुगतने पड़ेंगे’

कांग्रेस से बीजेपी में आए नेता भी उनके सियासी भविष्य को लेकर उन्हें आगाह करने लग गए हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने बिना सीधे नाम लिए आरोप लगाया है कि गांधी परिवार बदला लेता है और उन्होंने थरूर के खिलाफ भी पार्टी की ओर से कार्रवाई की आशंका जताई है।

प्रोजेक्ट सिंडिकेट में छपे शशि थरूर के लेख को लेकर बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पोस्ट में लिखा है कि यह ‘लेख पैनी नजर वाला है।’ ‘पता नहीं इतनी बेबाकी से बोलने के लिए डॉक्टर थरूर को क्या नतीजे भुगतने पड़ेंगे। डॉ थरूर को पहले ही ऑपरेशन सिंदूर ‘सरेंडर नैरेटिव’पर नेपो किड राहुल गांधी को खरी-खोटी सुनाने के लिए निशाना बनाया जा चुका है।’

‘फर्स्ट फैमिली बहुत ही बदला लेने वाली है’

उन्होंने आगे लिखा, ‘डॉ थरूर खतरों के खिलाड़ी बन चुके हैं। उन्होंने नेपो किड्स या वंशवाद के नवाबों को सीधा नेपो किड्स बता दिया है। सर जब मैंने 2017 में राहुल गांधी को नेपो नामदार कहा था, आप जानते हैं कि मेरे साथ क्या हुआ था। सर आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूं….फर्स्ट फैमिली बहुत ही बदला लेने वाली है।’ पूनावाला एक समय कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरे हुआ करते थे। लेकिन, जब 2017 में उन्होंने कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों को ‘दिखावा’ कह दिया था, तो वह सुर्खियों में आ गए थे। इसी चुनाव में राहुल गांधी को उनकी मां सोनिया गांधी की जगह कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था।

‘जब मुख्य योग्यता किसी का सरनेम हो जाए’

दरअसल, ‘इंडियन पॉलिटिक्स आर ए फैमिली बिजनेस’ के शीर्षक वाले अपने लेख में केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और नेशनल कांफ्रेंस जैसे दलों में वंशवाद की राजनीति पर फोकस किया है। उन्होंने लिखा है, ‘वंशवाद की राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। जब राजनीतिक शक्ति काबिलियत,प्रतिबद्धता या जमीनी जुड़ाव की जगह खानदान से तय होती है, तो शासन की गुणवत्ता खराब हो जाती है।…यह तब और भी अधिक समस्या से भर जाता है, जब उम्मीदवारों की मुख्य योग्यता उनका सरनेम हो जाए।’

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि किसी के पारिवारिक इतिहास के चलते किसी व्यक्ति को राजनीति में आने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र में जनता फैसला करती है। आप किसी को इसलिए राजनीति में आने से नहीं रोक सकते क्योंकि उसके पिता सांसद थे। ये तो हर क्षेत्र में हो रहा है। आप इससे बचने का क्या रास्ता ढूंढेंगे?’

कांग्रेस नेता उदित राज ने गांधी परिवार की वंशवादी राजनीति का बचाव करते हुए कहा कि एक डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है और बिजनेसमैन का बेटा बिजनेसमैन। राजनीति भी अपवाद नहीं है। अगर एक राजनेता का आपराधिक इतिहास है तो ये हमारे समाज की सच्चाई को दिखाता है। चुनाव टिकट जाति और परिवार के आधार पर बांटे जाते हैं। उदित राज ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर भी वंशवादी राजनीति को बढ़ाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस बोली- परिवारवाद सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि परिवारवाद सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “डॉक्टर, व्यापारी और अभिनेता भी अपने परिवार की राह पर चलते हैं।” उदित राज ने आगे कहा कि असली समस्या यह है कि अवसर कुछ परिवारों तक सीमित रह जाते हैं, जिससे बाकी लोगों के लिए आगे बढ़ने के मौके कम हो जाते हैं।

वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी कहा कि परिवारवाद सिर्फ राजनीति में नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा- लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। किसी को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता क्योंकि उसके पिता सांसद थे।

कई बार मोदी सरकार की तारीफ कर चुके थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर कई बार पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान देकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “ऊर्जा और वैश्विक दृष्टि” की तारीफ की थी। हाल ही में वे विदेश नीति से जुड़ी पहल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत के राजनयिक प्रतिनिधि की भूमिका में भी नजर आए।

उनके हाल के बयानों में केंद्र सरकार की विदेश नीति और कुछ विपक्षी राज्यों की नीतियों की तारीफ शामिल रही है, जिससे पार्टी नेतृत्व कई बार असहज हुआ है।

6 सितंबरः थरूर बोले, PM के नए लहजे का स्वागत– थरूर ने भारत-अमेरिका में टैरिफ को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब की सराहना की थी। थरूर ने केरल के तिरुवनंतपुरम में न्यूज एजेंसी ANI से कहा था- मैं इस नए लहजे का ऐहतियात के साथ स्वागत करता हूं।

10 जुलाईः थरूर ने इमरजेंसी को काला अध्याय बताया– शशि थरूर ने मलयालम भाषा के अखबार ‘दीपिका’ में प्रकाशित आर्टिकल लिखा था कि इमरजेंसी को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे सबक लेना जरूरी है। उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर फैसला बताया।

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