भारत एक उम्मीद को जिंदा रखे हुए हैं: पश्चिम की अनदेखी के बावजूद ग्लोबल साउथ की आवाज…

वैश्विक समुदाय जलवायु रिकॉर्डों के टूटने की बढ़ती आवृत्ति, तीव्रता और पैमाने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। औसत वैश्विक तापमान हर दशक में लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा है। जलवायु संकट से निपटने हेतु वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 4 नवंबर 2025, 09:42 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
भारत एक उम्मीद को जिंदा रखे हुए हैं: पश्चिम की अनदेखी के बावजूद ग्लोबल साउथ की आवाज…
Photo: UB India News Archive

वैश्विक समुदाय जलवायु रिकॉर्डों के टूटने की बढ़ती आवृत्ति, तीव्रता और पैमाने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। औसत वैश्विक तापमान हर दशक में लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा है। जलवायु संकट से निपटने हेतु वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों का नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) करता है। अब तक जलवायु नीति पर जिस सोच का दबदबा रहा है, वह पश्चिमी देशों की है, जो प्रकृति को सिर्फ एक संसाधन या व्यापार की वस्तु मानती है।

औद्योगिक क्रांति की इसी बुनियादी सोच ने पश्चिमी देशों में आर्थिक विकास को तो बढ़ाया, लेकिन इसकी कीमत पारिस्थितिकी तंत्र की तबाही, जैव विविधता के नुकसान और जलवायु संकट के रूप में चुकाई है। जलवायु सम्मेलन (कॉप) की बैठकों में यह साफ दिखता है कि विकसित देशों ने न तो वित्तीय सहायता और न ही तकनीकी सहयोग के अपने वादों को पूरा किया है। इसके चलते बातचीत की यह पूरी प्रक्रिया संदेहास्पद हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की एमिशन गैप रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ने 2023 में नया रिकॉर्ड बनाया-57.1 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य, जो 2022 की तुलना में 1.3 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान ऊर्जा क्षेत्र का रहा, जहां जीवाश्म ईंधनों का अंधाधुंध उपयोग अब भी जारी है। यह तब है, जब वैज्ञानिक प्रमाण पेरिस समझौते में उल्लिखित तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने के लिए सीमित समय अवधि की चेतावनी दे रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव समान नहीं होते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ता है। भारत दुनिया के सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील देशों में से एक है। डाउन टू अर्थ रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में, भारत में 322 दिनों में चरम मौसमी घटनाएं हुईं-जैसे बाढ़, सूखा, हीटवेव, बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव और हिमनदों का पिघलना। इनका असर लोगों की आजीविका, स्वास्थ्य, सफाई व्यवस्था, आधारभूत ढांचे, जल और खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा देश के विकास पर पड़ा। जर्मनवॉच संस्था द्वारा प्रकाशित जलवायु जोखिम सूचकांक 2025 रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में चरम मौसमी घटनाओं के कारण भारत में 80,000 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है और देश को लगभग 180 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।

इस मामले में प्राचीन भारतीय दर्शन एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो प्रकृति के प्रति श्रद्धा, एकत्व और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाता है। यह दर्शन पृथ्वी को केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक जीवंत इकाई (मातृभूमि) के रूप में देखता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का विचार संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानता है। बृहदारण्यक उपनिषद में सर्वात्मभाव की बात होती है, यानी सभी के साथ अपनी पहचान। भगवदगीता सामूहिक पर्यावरण संरक्षण को समुदायों के अस्तित्व के लिए आवश्यक मानती है। यह पारंपरिक भारतीय दृष्टिकोण ही है, जिसे वैश्विक जलवायु और पर्यावरणीय एजेंडा का मार्गदर्शक बनना चाहिए।

यद्यपि, भारत ऐतिहासिक रूप से जलवायु संकट का जिम्मेदार नहीं रहा है और उसका प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भी वैश्विक औसत से काफी कम है, फिर भी वह इस मुद्दे पर बेहद सक्रिय है। भारत ने जलवायु, ऊर्जा व अनुकूलन से जुड़े महत्वाकांक्षी तथा सार्थक लक्ष्य तय किए हैं, जो राष्ट्रीय निर्धारित योगदान और दीर्घकालिक निम्न उत्सर्जन विकास रणनीतियों में भी दर्ज हैं। इन दस्तावेजों में 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य भी दोहराया गया है। यह सोच अनेक कल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और अभियानों के रूप में सामने आई है।

आज भारत दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में चौथे स्थान पर है और सौर ऊर्जा में तीसरे पायदान पर। भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 2014 से जून, 2025 तक 41 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है-यह 2.82 गीगावॉट से बढ़कर 116.25 गीगावॉट तक पहुंच गई है। 2005 से 2020 के बीच, भारत के जीडीपी की एमिशन तीव्रता में 36 फीसदी की कमी आई है। विकास की दृष्टि से, भारत ने 17 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है और 2023 में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दस लाख से भी अधिक नौकरियां प्रदान की हैं। प्रति व्यक्ति बिजली की खपत में पिछले 10 वर्षों में 46 फीसदी की वृद्धि हुई है।

हाल के समय में, भारत ने स्वच्छ ऊर्जा, नई तकनीक, कार्बन प्राइसिंग, ऊर्जा संक्रमण, हरित इमारतों के नियम, इलेक्ट्रिक गाड़ियों, ऊर्जा की बचत और भंडारण, हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में काफी निवेश किया है। इसका मकसद है आत्मनिर्भरता बढ़ाना और पर्यावरण से जुड़ी नौकरियां पैदा करना। जलवायु वार्ताओं (कॉप) में भारत ने विकसित देशों से मांग की है कि वे गरीब और विकासशील देशों को वित्तीय मदद, तकनीक और क्षमता निर्माण में सहयोग करें। भारत ने यह भी कहा है कि विकसित देशों को विकासशील देशों में एनर्जी ट्रांजिशन, डीकार्बनाइजेशन, क्लाइमेट अनुकूलन को संभव बनाना चाहिए। इस तरह भारत ग्लोबल साउथ की ओर से एक अहम आवाज बनकर सामने आया है। अपने राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना आदि की सफलता से प्रेरित होकर भारत ने कॉप 26 में मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) शुरू किया। इसके जरिये भारत ने दुनिया से अपील की कि वे पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली अपनाएं, जो भारत की पारंपरिक सोच से मेल खाती है।

भारत ने कई देशों के साथ मिलकर जलवायु संरक्षण के उपायों को आगे बढ़ाया है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस, वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड, कोएलिशन ऑफ डिजास्टर रिस्क रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर, लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन जैसी पहलों के जरिये भारत ने ऐसे मंचों का नेतृत्व किया है, जो ज्ञान, सर्वोत्तम प्रथाओं, ठोस अनुभवों और सहयोग के आदान-प्रदान को संभव बनाते हैं, जिससे पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है। भारत ने जलवायु और ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को अन्य वैश्विक मंचों पर भी मजबूती से उठाया है। लिहाजा, जब दुनिया जलवायु संकट की आग में झुलस रही है, जब हर देश समाधान की तलाश में है, तब भारत एक उम्मीद बनकर उभरा है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰
समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?
खास खबर

समय रैना के कॉमेडी शो की कौन सी बात पर मचा बवाल?

समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।

UB India News Desk30 अग॰
क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?
खास खबर

क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध से पहले वाले आर्थिक दौर में पहुंच चुकी है?

आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।

UB India News Desk30 अग॰
खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी
खास खबर

खेलो इंडिया डायलॉग: ‘जो खेलेगा वो खिलेगा’, युवा एथलीटों से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग – खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ के तहत गुरुवार को युवा एथलीटों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जो खेलेगा वो खिलेगा। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि खिलाड़ियों के नाम से ही उनके राज्य और शहर की पहचान होती है। पीएम […]

UB India News27 अग॰
पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………
खास खबर

पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज…………

पंजाब में 25 सालों तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते रहे हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान 2020 में यह ढाई दशक पुरानी दोस्ती टूट गई थी. अब 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के साथ फिर से अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन की बात तेज हो गई है. बीजेपी […]

UB India News27 अग॰
अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?
खास खबर

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों अहम?

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर दोनों देश व्यापार, वैश्विक मंचों और बहुपक्षीय संगठनों में साथ दिखते हैं तो दूसरी ओर हिमालयी सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है. ऐसे वक्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल […]

UB India News27 अग॰
भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..
खास खबर

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या 3 हजार तक पहुंच सकती ,67 अरब डॉलर निवेश टारगेट…………..

भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ सालों में दोगुनी होकर करीब 3 हजार तक पहुंच सकती है. जापान दौरे पर पहुंचे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जापान की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए तैयार हैं. पीयूष गोयल ने ये भी कहा कि टेक्नोलॉजी की कमी […]

UB India News27 अग॰