गन्ना किसानों के आंदोलन से घबराई कर्नाटक सरकार, सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री से लगाई मदद की गुहार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य में गन्ना किसानों के संकट को हल करने के लिए तुरंत बैठक की मांग की है। कर्नाटक में बीते कई दिनों से गन्ना किसान आंदोलन कर रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया हुआ है। किसान आंदोलन को समर्थन बढ़ता ही जा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 7 नवंबर 2025, 05:32 AM 4 मिनट read
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गन्ना किसानों के आंदोलन से घबराई कर्नाटक सरकार, सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री से लगाई मदद की गुहार
Photo: UB India News Archive

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य में गन्ना किसानों के संकट को हल करने के लिए तुरंत बैठक की मांग की है। कर्नाटक में बीते कई दिनों से गन्ना किसान आंदोलन कर रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया हुआ है। किसान आंदोलन को समर्थन बढ़ता ही जा रहा है और यह आंदोलन कई अन्य जिलों में भी फैल सकता है। सीएम ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में अपील करते हुए लिखा कि ‘मैं आपसे जल्द से जल्द बैठक करने का अनुरोध करता हूं ताकि हम अपने गन्ना किसानों, अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्नाटक और देश में गन्ने की वैल्यू-चेन की भलाई के लिए मिलकर काम कर सकें।’

सीएम बोले- एफआरपी केंद्र सरकार तय करती है
कर्नाटक के गन्ना किसानों ने गन्ने के लिए 3,500 रुपये प्रति टन का मूल्य तय करने की मांग को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को दखल देने का फैसला किया और शुक्रवार को किसानों और चीनी मिल मालिकों के साथ लगातार दो बैठकें बुलाईं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) तय करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपना आंदोलन और तेज न करें और शुक्रवार को बंगलूरू में बातचीत के लिए बुलाया। किसान गन्ने के लिए 3,500 रुपये प्रति टन की मांग कर रहे हैं, वहीं मिलों ने 3,200 रुपये प्रति टन से ज्यादा देने से इनकार कर दिया है।

कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज, 3500 रुपए प्रति क्विंटल की मांग पर अड़े

कर्नाटक राज्य में गन्ने के किसान उचित मूल्य के लिए एक सप्ताह से आंदोलित है। जिसमें एक किसान ने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की, जो अभी अस्पताल में भर्ती है। किसानों ने चीनी की 26 फैक्ट्रियों पर ताला लगा दिया व राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया। किसानों ने गन्ने की कीमत 3500 रुपए प्रति क्विंटल की मांग की है वरना सम्पूर्ण राज्य में तेज आन्दोलन की चेतावनी दी है।

किसानों का यह आंदोलन उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी, बागलकोट व हावेरी जिलों में अधिक हावी है। समाचार पत्रों के अनुसार चीनी मील के मालिक किसानों को 3200 रुपए प्रति टन के भाव देने के लिए तैयार हैं लेकिन किसान 3500 रुपए की मांग पर अडिग हैं। किसानों के आन्दोलन में छात्र व अन्य सामाजिक संगठन भी हिस्सा ले रहे हैं, जिससे आंदोलन को मजबूती मिल रही है।

किसानों की मुख्य मांग है कि महाराष्ट्र राज्य के शुगर प्राइस मॉडल को कर्नाटक राज्य में भी लागू किया जाए, जिससे किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान प्राप्त हो सके। इसके अलावा किसानों ने गन्ने की फसल पर केंद्र सरकार द्वारा जारी उचित व लाभकारी मूल्य (एफआरपी) की मांग की है, जो अभी तक किसानों को नहीं मिलती है।

देश में गन्ना उत्पादन में कर्नाटक राज्य तीसरे नंबर पर आता है व सरकारी आकड़ों के अनुसार कर्नाटक में 2024-25 में 6.8 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई की गई थी। लेकिन गन्ने के भाव व गन्ना मील की व्यवस्था उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र राज्य की तुलना में कर्नाटक में अव्यस्थित है।

गन्ने के किसानों को कम भाव मिलने की मुख्य वजह केंद्र सरकार द्वारा जारी एफआरपी न मिलकर राज्य सरकार द्वारा मूल्य प्राप्त होता है। इसके अलावा चीनी मीलों पर राजनेतिक लोगों का काफी अधिक प्रभाव है जिसके कारण मूल्य अधिक नहीं बढ़ता है।

कर्नाटक के कृषि व गन्ना मंत्री शिवानंद पाटील ने किसानों से मिलकर बातचीत की। पाटील ने मीडिया में बताया कि किसानों से बातचीत चल रही है व किसानों की मांग समझने की कोशिश कर रहे है।

पाटील ने यह भी कहा कि एफआरपी मूल्य केंद्र सरकार तय करती है, राज्य सरकार इसमे कुछ नहीं कर सकती है। लेकिन किसानों को उचित मूल्य दिए जाने को लेकर फैक्ट्रियों के सदस्यों से बातचीत चल रही है।

कर्नाटक राज्य के विपक्ष नेताओ ने भी किसानों के आंदोलन को समर्थन किया है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बी वाई विजयेन्द्र ने अस्पताल में भर्ती किसान से मुलाकात की व आंदोलित स्थल जाकर किसानों से मिले।

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