टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के आरोपों के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राजभवन में तलाशी अभियान चलाने का फैसला किया है। दरअसल टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया कि राजभवन में भाजपा के अपराधियों को पनाह दी जा रही है और उन्हें हथियार दिए जा रहे हैं। इसके बाद राज्यपाल ने भी टीएमसी सांसद के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लोगों से राजभवन आकर तलाशी लेने की बात कही थी।
पश्चिम बंगाल राजभवन में तलाशी अभियान चलाएंगे !
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के आरोपों के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राजभवन में तलाशी अभियान चलाने का फैसला किया है। दरअसल टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया कि राजभवन में भाजपा के अपराधियों को पनाह दी जा रही है और उन्हें हथियार दिए जा रहे हैं। इसके बाद राज्यपाल […]
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सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।
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समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में बिहार और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी से विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स और नेताओं ने संवेदनशील मुद्दे को मजाक में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं।
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आर्थिक संकट के समय, लोकतांत्रिक देश जोखिम लेने से बचते हैं, जबकि तानाशाह देश जोखिम उठाते हैं। इतिहास का यह पैटर्न याद रखने लायक है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जैसे हालात थे, कुछ-कुछ वैसे ही हालात इस समय बन गए हैं। 1930 और 40 के दशक की तरह ही, टकराव के दायरे बढ़ गए हैं और आपस में मिल रहे हैं। तानाशाह शासकों का गुट पूरी तरह से सक्रिय सैन्य गठबंधन बन गया है। पश्चिम की हालत बहुत खराब है। अमेरिका सैन्य रूप से तैयार नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी से और अचानक गिरावट आने की चेतावनी वाले संकेत हर जगह दिख रहे हैं।
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